अल-अनआम · 52/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِم مِّن شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ ۝٥٢
Wa laa tatrudil lazeena yad`oona Rabbahum bilghadaati wal `ashiyyi yureedoona Wajhahoo ma `alaika min hisaabihim min shai`inw wa maa min hisaabika `alaihim min shai`in fatatrudahum fatakoona minaz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार से उसकी ख़ुशनूदी की तमन्ना में दुऑए मॉगा करते हैं- उनको अपने पास से न धुत्कारो-न उनके (हिसाब किताब की) जवाब देही कुछ उनके ज़िम्मे है ताकि तुम उन्हें (इस ख्याल से) धुत्कार बताओ तो तुम ज़ालिम (के शुमार) में हो जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَطْرُدِ: दूर करना, निकाल देना, अपनी मजलिस से भगा देना।
  • الْغَدَاةِ: सुबह का समय, दिन की शुरुआत।
  • الْعَشِيِّ: शाम का समय, दिन का अंत।
  • يُرِيدُونَ وَجْهَهُ: वे केवल अल्लाह की रज़ा और उसका चेहरा (स्वयं अल्लाह) चाहते हैं, यानी उनका अमल खालिस अल्लाह के लिए है।
  • حِسَابِهِم: उनके कर्मों का हिसाब, उनके अमल की जवाबदेही।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, हद से गुज़रने वाले, जो चीज़ को उसकी जगह पर नहीं रखते।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम उन कमज़ोर और ग़री� मुसलमानों को अपनी मजलिस से दूर मत करो जो सुबह-शाम अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं। वे दिन की शुरुआत और अंत में अल्लाह को याद करते हैं, और उनका एक ही मक़सद है—अल्लाह की रज़ा और उसका चेहरा। वे किसी दुनियावी फ़ायदे या दिखावे के लिए इबादत नहीं करते, बल्कि उनका दिल खालिस अल्लाह की मुहब्बत से भरा हुआ है।

याद रखो, उनका हिसाब तुम पर नहीं है। उनके अमल की जवाबदेही सिर्फ़ अल्लाह के ज़िम्मे है, और तुम्हारे अमल का हिसाब उन पर नहीं है। यानी हर इंसान अपने कर्मों के लिए खुद ज़िम्मेदार है। अगर वे किसी कमी या ख़ता पर हों, तो उनका मामला अल्लाह के सुपुर्द है। और अगर तुममें कोई कमी हो, तो उसका हिसाब उनसे नहीं लिया जाएगा।

इसलिए, ऐ नबी! तुम उन्हें अपनी मजलिस से दूर मत करो, चाहे बड़े-बड़े सरदारों और रईसों को अपनी तरफ़ माइल करने का लालच ही क्यों न हो। अगर तुमने ऐसा किया—यानी अल्लाह के नेक बंदों को उनके दीन की ख़ातिर ठुकराया—तो तुम ज़ालिमों में से हो जाओगे, यानी तुम अल्लाह की हदों से तजावुज़ करने वाले बन जाओगे। और ज़ुल्म का मतलब ही यह है कि चीज़ को उसकी जगह पर न रखा जाए—यहाँ अल्लाह के वली बंदों को उनके मुक़ाम से गिराना सबसे बड़ा ज़ुल्म है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में किसी इंसान की हैसियत उसके दौलत, नस्ल या मर्तबे से नहीं, बल्कि उसके तक़वा और अल्लाह से लगाव से है। अल्लाह के नज़दीक वही इज़्ज़त वाला है जो उसकी इबादत में रात-दिन बिताता है। हमें चाहिए कि हम ग़रीब और कमज़ोर मुसलमानों की इज़्ज़त करें, उनकी सोहबत को अपने लिए बरकत समझें, और कभी भी दुनियावी फ़ायदे के लिए उन्हें दूर न करें। याद रखें, अल्लाह उन्हीं लोगों को प्यार करता है जो उसके लिए एक-दूसरे से मुहब्बत रखते हैं, और क़यामत के दिन सबसे बड़ी कामयाबी उन्हीं की होगी जिन्होंने अल्लाह की रज़ा को दुनिया की हर चीज़ पर तरजीह दी।



📜 आयत 50-54 — अल-अनआम

50قُل لَّا أَقُولُ لَكُمْ عِندِي خَزَائِنُ اللَّهِ وَلَا أَعْلَمُ الْغَيْبَ وَلَا أَقُولُ لَكُمْ إِنِّي مَلَكٌ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ ۚ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ
(ऐ रसूल) उनसे कह दो कि मै तो ये नहीं कहता कि मेरे पास ख़ुदा के ख़ज़ाने हैं (कि ईमान लाने पर दे दूंगा) और न मै गैब के (कुल हालात) जानता हूँ और न मै तुमसे ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ मै तो बस जो (ख़ुदा की तरफ से) मेरे पास वही की जाती है उसी का पाबन्द हूँ (उनसे पूछो तो) कि अन्धा और ऑंख वाला बराबर हो सकता है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं सोचते
51وَأَنذِرْ بِهِ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं
52وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِم مِّن شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ
और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार से उसकी ख़ुशनूदी की तमन्ना में दुऑए मॉगा करते हैं- उनको अपने पास से न धुत्कारो-न उनके (हिसाब किताब की) जवाब देही कुछ उनके ज़िम्मे है ताकि तुम उन्हें (इस ख्याल से) धुत्कार बताओ तो तुम ज़ालिम (के शुमार) में हो जाओगे
53وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
54وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِن بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और जो लोग हमारी आयतों पर ईमान लाए हैं तुम्हारे पास ऑंए तो तुम सलामुन अलैकुम (तुम पर ख़ुदा की सलामती हो) कहो तुम्हारे परवरदिगार ने अपने ऊपर रहमत लाज़िम कर ली है बेशक तुम में से जो शख़्श नादानी से कोई गुनाह कर बैठे उसके बाद फिर तौबा करे और अपनी हालत की (असलाह करे ख़ुदा उसका गुनाह बख्श देगा क्योंकि) वह यक़ीनी बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीRevelation
52आयत

अनुवाद — अल-अनआम 52

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सूरा आयत 52/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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