अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَطْرُدِ: दूर करना, निकाल देना, अपनी मजलिस से भगा देना।
- الْغَدَاةِ: सुबह का समय, दिन की शुरुआत।
- الْعَشِيِّ: शाम का समय, दिन का अंत।
- يُرِيدُونَ وَجْهَهُ: वे केवल अल्लाह की रज़ा और उसका चेहरा (स्वयं अल्लाह) चाहते हैं, यानी उनका अमल खालिस अल्लाह के लिए है।
- حِسَابِهِم: उनके कर्मों का हिसाब, उनके अमल की जवाबदेही।
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, हद से गुज़रने वाले, जो चीज़ को उसकी जगह पर नहीं रखते।
तफसीर (व्याख्या):
ऐ नबी! तुम उन कमज़ोर और ग़री� मुसलमानों को अपनी मजलिस से दूर मत करो जो सुबह-शाम अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं। वे दिन की शुरुआत और अंत में अल्लाह को याद करते हैं, और उनका एक ही मक़सद है—अल्लाह की रज़ा और उसका चेहरा। वे किसी दुनियावी फ़ायदे या दिखावे के लिए इबादत नहीं करते, बल्कि उनका दिल खालिस अल्लाह की मुहब्बत से भरा हुआ है।
याद रखो, उनका हिसाब तुम पर नहीं है। उनके अमल की जवाबदेही सिर्फ़ अल्लाह के ज़िम्मे है, और तुम्हारे अमल का हिसाब उन पर नहीं है। यानी हर इंसान अपने कर्मों के लिए खुद ज़िम्मेदार है। अगर वे किसी कमी या ख़ता पर हों, तो उनका मामला अल्लाह के सुपुर्द है। और अगर तुममें कोई कमी हो, तो उसका हिसाब उनसे नहीं लिया जाएगा।
इसलिए, ऐ नबी! तुम उन्हें अपनी मजलिस से दूर मत करो, चाहे बड़े-बड़े सरदारों और रईसों को अपनी तरफ़ माइल करने का लालच ही क्यों न हो। अगर तुमने ऐसा किया—यानी अल्लाह के नेक बंदों को उनके दीन की ख़ातिर ठुकराया—तो तुम ज़ालिमों में से हो जाओगे, यानी तुम अल्लाह की हदों से तजावुज़ करने वाले बन जाओगे। और ज़ुल्म का मतलब ही यह है कि चीज़ को उसकी जगह पर न रखा जाए—यहाँ अल्लाह के वली बंदों को उनके मुक़ाम से गिराना सबसे बड़ा ज़ुल्म है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में किसी इंसान की हैसियत उसके दौलत, नस्ल या मर्तबे से नहीं, बल्कि उसके तक़वा और अल्लाह से लगाव से है। अल्लाह के नज़दीक वही इज़्ज़त वाला है जो उसकी इबादत में रात-दिन बिताता है। हमें चाहिए कि हम ग़रीब और कमज़ोर मुसलमानों की इज़्ज़त करें, उनकी सोहबत को अपने लिए बरकत समझें, और कभी भी दुनियावी फ़ायदे के लिए उन्हें दूर न करें। याद रखें, अल्लाह उन्हीं लोगों को प्यार करता है जो उसके लिए एक-दूसरे से मुहब्बत रखते हैं, और क़यामत के दिन सबसे बड़ी कामयाबी उन्हीं की होगी जिन्होंने अल्लाह की रज़ा को दुनिया की हर चीज़ पर तरजीह दी।
📜 आयत 50-54 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 52
सूरा अल-अनआम आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार…सूरा आयत 52/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 50–54. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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