अल-अनआम · 51/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَأَنذِرْ بِهِ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ ۝٥١
Wa anzir bihil lazeena yakhaafoona ai yuhsharooo ilaa Rabbihim laisa lahum min doonihee waliyyunw wa laa shafee`ul la`allahum yattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَأَنذِرْ: डराओ, सावधान करो।
  • يُحْشَرُوا: एकत्र किए जाएँ, उठाए जाएँ (क़ियामत के दिन)।
  • وَلِيّ: सहायक, मददगार, संरक्षक।
  • شَفِيع: सिफ़ारिश करने वाला।
  • يَتَّقُونَ: डरें, बचें (अल्लाह की नाफ़रमानी से)।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इस क़ुरआन के ज़रिए उन लोगों को डराएँ जो इस बात का यक़ीन रखते हैं कि उन्हें अपने रब की तरफ़ (क़ियामत के दिन) उठाया जाना है। ये वे लोग हैं जो अल्लाह के वादे और उसकी धमकी को सच मानते हैं। उनके लिए अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं जो उन्हें फ़ायदा पहुँचा सके, और न ही कोई सिफ़ारिश करने वाला है जो उनकी सिफ़ारिश करके उन्हें अज़ाब से बचा सके। यह डरावा इसलिए है ताकि वे अल्लाह से डरें और उसके हुक्मों पर अमल करें तथा उसकी मनाही से बचें। यह आयत उन सभी लोगों को शामिल करती है जो आख़िरत के दिन पर ईमान रखते हैं — चाहे वे मुसलमान हों या अहले-किताब — क्योंकि क़ुरआन उन सभी के लिए चेतावनी और नसीहत है। जो लोग इस चेतावनी को दिल से सुनेंगे और उस पर अमल करेंगे, वही क़ुरआन से लाभ उठाने वाले हैं।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उससे डर और अल्लाह की तरफ़ रुजू करने का ज़रिया है। जो लोग आख़िरत पर ईमान रखते हैं, वही क़ुरआन की नसीहत से असर लेते हैं।
  2. हमें यह यक़ीन दिलाया गया है कि क़ियामत के दिन न कोई हमारा मददगार होगा और न कोई सिफ़ारिश करने वाला — सिवाय अल्लाह की मर्ज़ी के। इसलिए आज ही अपने अमल को सुधार लें और अल्लाह की रहमत के साये में आने की कोशिश करें।
  3. यह आयत हमें तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाने की तरग़ीब देती है, क्योंकि तक़वा ही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है। जो लोग अल्लाह से डरते हैं, अल्लाह उन्हें हर मुश्किल से निकालने का रास्ता दिखाता है।
  4. इस आयत से हमें यह भी पता चलता है कि नबी का काम सिर्फ़ ख़ुशख़बरी देना नहीं, बल्कि डराना भी है — ताकि लोग ग़फ़लत में न रहें और अपने रब की तरफ़ लौटें। यह हमारे लिए भी सबक़ है कि हम दूसरों को अच्छी बात समझाएँ और उन्हें आख़िरत के दिन की याद दिलाएँ।


📜 आयत 49-53 — अल-अनआम

49وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا يَمَسُّهُمُ الْعَذَابُ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब उनको पलट जाएगा
50قُل لَّا أَقُولُ لَكُمْ عِندِي خَزَائِنُ اللَّهِ وَلَا أَعْلَمُ الْغَيْبَ وَلَا أَقُولُ لَكُمْ إِنِّي مَلَكٌ ۖ إِنْ أَتَّبِعُ إِلَّا مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِي الْأَعْمَىٰ وَالْبَصِيرُ ۚ أَفَلَا تَتَفَكَّرُونَ
(ऐ रसूल) उनसे कह दो कि मै तो ये नहीं कहता कि मेरे पास ख़ुदा के ख़ज़ाने हैं (कि ईमान लाने पर दे दूंगा) और न मै गैब के (कुल हालात) जानता हूँ और न मै तुमसे ये कहता हूँ कि मै फरिश्ता हूँ मै तो बस जो (ख़ुदा की तरफ से) मेरे पास वही की जाती है उसी का पाबन्द हूँ (उनसे पूछो तो) कि अन्धा और ऑंख वाला बराबर हो सकता है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं सोचते
51وَأَنذِرْ بِهِ الَّذِينَ يَخَافُونَ أَن يُحْشَرُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ ۙ لَيْسَ لَهُم مِّن دُونِهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ لَّعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को डराओ जो इस बात का ख़ौफ रखते हैं कि वह (मरने के बाद) अपने ख़ुदा के सामने जमा किये जायेंगे (और यह समझते है कि) उनका ख़ुदा के सिवा न कोई सरपरस्त हे और न कोई सिफारिश करने वाला ताकि ये लोग परहेज़गार बन जाएं
52وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِم مِّن شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِم مِّن شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ
और (ऐ रसूल) जो लोग सुबह व शाम अपने परवरदिगार से उसकी ख़ुशनूदी की तमन्ना में दुऑए मॉगा करते हैं- उनको अपने पास से न धुत्कारो-न उनके (हिसाब किताब की) जवाब देही कुछ उनके ज़िम्मे है ताकि तुम उन्हें (इस ख्याल से) धुत्कार बताओ तो तुम ज़ालिम (के शुमार) में हो जाओगे
53وَكَذَٰلِكَ فَتَنَّا بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لِّيَقُولُوا أَهَٰؤُلَاءِ مَنَّ اللَّهُ عَلَيْهِم مِّن بَيْنِنَا ۗ أَلَيْسَ اللَّهُ بِأَعْلَمَ بِالشَّاكِرِينَ
और इसी तरह हमने बाज़ आदमियों को बाज़ से आज़माया ताकि वह लोग कहें कि हाएं क्या ये लोग हममें से हैं जिन पर ख़ुदा ने अपना फ़जल व करम किया है (यह तो समझते की) क्या ख़ुदा शुक्र गुज़ारों को भी नही जानता
अल-अनआमकुरान सूची
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अनुवाद — अल-अनआम 51

सूरा अल-अनआम आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इस क़ुरान के ज़रिए से तुम उन लोगों को…

सूरा आयत 51/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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