अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَاضِرَةَ الْبَحْرِ: समुद्र के किनारे बसी हुई बस्ती।
- يَعْدُونَ: सीमा का उल्लंघन करना, हद से बढ़ जाना।
- شُرَّعًا: खुले तौर पर, पानी की सतह पर तैरती हुई (मछलियाँ)।
- لَا يَسْبِتُونَ: जिस दिन वे सब्त (शनिवार) का पालन नहीं करते।
- نَبْلُوهُم: हम उनकी परीक्षा लेते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन यहूदियों से उस बस्ती के बारे में पूछिए जो समुद्र के किनारे बसी हुई थी। यह बस्ती "अयला" (अक़बा) के नाम से जानी जाती है। वहाँ के निवासियों ने सब्त (शनिवार) के दिन की पवित्रता का उल्लंघन किया। अल्लाह ने उन्हें आदेश दिया था कि वे शनिवार के दिन मछली का शिकार न करें, लेकिन उन्होंने इस आदेश की अवहेलना की।
अल्लाह ने उनकी परीक्षा के लिए यह व्यवस्था बनाई कि शनिवार के दिन मछलियाँ पानी की सतह पर खुले तौर पर तैरती हुई उनके पास आतीं, जिससे वे उन्हें आसानी से देख सकते थे। लेकिन शनिवार के अलावा अन्य दिनों में मछलियाँ उनके पास नहीं आती थीं। यह स्थिति उनके लिए एक कठिन परीक्षा थी।
इस परीक्षा में वे सफल नहीं हो सके। उन्होंने चालाकी का सहारा लिया — वे शनिवार से पहले जाल बिछा देते या गड्ढे खोद देते, और शनिवार को मछलियाँ उन जालों या गड्ढों में फँस जातीं। फिर रविवार को वे उन्हें निकालकर खा लेते। इस प्रकार वे दिखावे में तो शनिवार का पालन करते थे, लेकिन वास्तव में अल्लाह की सीमा का उल्लंघन करते थे।
अल्लाह ने उन्हें इसी प्रकार परीक्षा में डाला क्योंकि वे अवज्ञाकारी और पापी थे। यह परीक्षा उनके फ़िस्क़ (अवज्ञा) के कारण थी, ताकि उनका असली स्वरूप प्रकट हो सके।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की सीमाओं का सम्मान करना: यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए, चाहे वे हमारी समझ में कितने भी कठिन या अजीब क्यों न लगें। अल्लाह की हर आज्ञा में हमारी भलाई छिपी होती है।
- धोखे से बचना: जो लोग अल्लाह के आदेशों को तोड़ने के लिए बहाने और तरकीबें ढूँढते हैं, वे अल्लाह को धोखा नहीं दे सकते। अल्लाह उनके दिलों की बात जानता है और उनके कर्मों का हिसाब लेगा।
- परीक्षा का उद्देश्य: अल्लाह कभी-कभी अपने बंदों को कठिन परिस्थितियों में डालकर परीक्षा लेता है। यह परीक्षा हमें बेहतर इंसान बनाने के लिए होती है, न कि हमें नष्ट करने के लिए।
- अवज्ञा के परिणाम: यह क़िस्सा बताता है कि अल्लाह की अवज्ञा करने वालों को अंततः कठोर सज़ा का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की राह पर चलना चाहिए।
- क़ुरआन की शिक्षा: यह क़िस्सा हमें बताता है कि क़ुरआन में पिछली उम्मतों के हालात इसलिए बयान किए गए हैं ताकि हम उनसे सबक लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें।
📜 आयत 161-165 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 163
सूरा अल-आराफ आयत 163 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) उनसे ज़रा उस गाँव का हाल तो…सूरा आयत 163/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 161–165. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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