अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةٌ: एक समुदाय या गिरोह।
- تَعِظُونَ: तुम नसीहत देते हो।
- مُهْلِكُهُمْ: उन्हें विनष्ट करने वाला।
- مُعَذِّبُهُمْ: उन्हें यातना देने वाला।
- مَعْذِرَةً: बहाना, सफ़ाई पेश करने के लिए।
- يَتَّقُونَ: वे डरें (अल्लाह से) और बचें।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब उनमें से एक अच्छा गिरोह (जो नेकी का हुक्म देता था) उन लोगों से (जो नसीहत करने वालों से) कह रहा था: "तुम उन लोगों को क्यों नसीहत देते हो जिन्हें अल्लाह ने दुनिया में हलाक करने का फ़ैसला कर लिया है या आख़िरत में उन्हें सख्त अज़ाब देने वाला है? तुम्हारी नसीहत का उन पर कोई असर नहीं होगा।" तो नसीहत करने वालों ने जवाब दिया: "हम यह नसीहत इसलिए करते हैं ताकि अपने रब के सामने हमारा कोई बहाना न रहे (यानी हमने अपना फ़र्ज़ अदा कर दिया), और इस उम्मीद में कि शायद वे (अल्लाह से) डरें और अपनी गलती से बाज़ आ जाएँ।" यानी हमारा मक़सद सिर्फ अल्लाह का हुक्म पूरा करना और उनकी भलाई की दुआ करना है, चाहे वे सुनें या न सुनें।
फ़ायदे (सबक):
- अच्छाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना हर हाल में वाजिब है, चाहे लोग सुनें या न सुनें। हमारा फ़र्ज़ सिर्फ पहुँचाना है, नतीजा अल्लाह के हाथ में है।
- जब लोग गुनाह पर अड़ जाएँ और उनके हलाक होने का अंदेशा हो, तब भी नेक लोगों को चुप नहीं बैठना चाहिए, बल्कि नसीहत जारी रखनी चाहिए।
- नसीहत का एक मक़सद यह भी है कि अल्लाह के सामने हमारा बहाना पुख़्ता हो जाए — यानी हमने अपनी ज़िम्मेदारी निभा दी, ताकि हम पर कोई मोरचा न लगे।
- इस आयत से पता चलता है कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए — शायद एक दिन वे गुनाहगार भी तौबा कर लें और अल्लाह से डरने लगें। अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए।
- यह सबक सिखाती है कि समाज में बुराई के खिलाफ आवाज़ उठाना अल्लाह की इबादत है, और यही अच्छे इंसान की पहचान है।
📜 आयत 162-166 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 164
सूरा अल-आराफ आयत 164 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उनमें से एक जमाअत ने (उन लोगों में…सूरा आयत 164/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 162–166. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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