अल-आराफ · 3/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
اتَّبِعُوا مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ ۝٣
Ittabi`oo maaa unzila `ilaikum mir Rabbikum wa laa tattabi`oo min dooniheee awliyaaa`; qaleelam maa tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّبِعُوا – पालन करो, अनुसरण करो
  • أُنزِلَ إِلَيْكُم – जो तुम्हारी ओर उतारा गया
  • مِن رَّبِّكُمْ – तुम्हारे पालनहार की ओर से
  • وَلَا تَتَّبِعُوا – और अनुसरण मत करो
  • مِن دُونِهِ – उस (अल्लाह) के अलावा
  • أَوْلِيَاءَ – मित्र, संरक्षक, सहायक
  • قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ – तुम बहुत कम शिक्षा ग्रहण करते हो / नसीहत हासिल करते हो

विस्तृत तफसीर:

ऐ लोगों! तुम्हारे रब की ओर से जो कुछ तुम्हारे पास उतारा गया है—अर्थात यह कुरआन और रसूल ﷺ की सुन्नत—उसी का पालन करो। यही तुम्हारी भलाई और सफलता का रास्ता है। इस वही (प्रकाशना) में तुम्हारे लिए हिदायत, रहमत और नूर है। यह तुम्हारे रब की तरफ से भेजा गया है, जो तुम्हारा सबसे बड़ा हितैषी है, जो तुम्हें सबसे अधिक जानता है और तुम पर सबसे अधिक दयालु है। उसकी हर बात में भलाई है, उसका हर हुक्म तुम्हारे लिए बेहतरीन है।

लेकिन अल्लाह के अलावा दूसरों को अपना मित्र, संरक्षक और सहायक मत बनाओ—चाहे वे शैतान हों, या गुमराह करने वाले विद्वान, या कोई और जो तुम्हें अल्लाह की राह से भटकाना चाहते हों। ऐसे लोगों की बात मानकर अल्लाह के हुक्मों को छोड़ देना, यह सबसे बड़ी भूल है। याद रखो, ये तथाकथित मित्र तुम्हें कभी भलाई की ओर नहीं ले जा सकते, बल्कि वे तुम्हें अल्लाह की नाराज़गी और विनाश की ओर ले जाते हैं।

अफसोस की बात है कि तुम बहुत कम सीखते और नसीहत हासिल करते हो। अगर तुम गहराई से सोचो और अपने दिल की आँखों से देखो, तो तुम समझ जाओगे कि अल्लाह का मार्ग ही सच्चा मार्ग है। जो कुछ अल्लाह ने उतारा है, उसी में तुम्हारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई की याद दिलाती है—हमारी कामयाबी सिर्फ अल्लाह के हुक्मों पर चलने में है। जब हम कुरआन और सुन्नत को अपनाते हैं, तो हमारा जीवन रोशन हो जाता है, हमारे दिलों को सुकून मिलता है और हमारी आख़िरत संवर जाती है। इसके विपरीत, जो लोग अल्लाह के अलावा दूसरों को अपना सहारा बनाते हैं, वे कभी सच्ची शांति नहीं पा सकते।

याद रखिए, अल्लाह ने हमें कुरआन इसलिए भेजा ताकि हम उसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यह हमारे लिए रहमत है, हमारे लिए शिफा (इलाज) है। जो इसे अपनाता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। आइए, हम सब इस आयत पर अमल करें, अल्लाह की किताब को अपना रहनुमा बनाएं और अपने जीवन को उसके अनुसार ढालें। यही हमारी सच्ची भलाई है, यही हमारी सच्ची कामयाबी है। अल्लाह हम सबको इसकी तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-आराफ

1المص
अलिफ़ लाम मीम स्वाद
2كِتَابٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो
3اتَّبِعُوا مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो
4وَكَم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا فَجَاءَهَا بَأْسُنَا بَيَاتًا أَوْ هُمْ قَائِلُونَ
तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और क्या (तुम्हें) ख़बर नहीं कि ऐसी बहुत सी बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर डाला तो हमारा अज़ाब (ऐसे वक्त) आ पहुचा
5فَمَا كَانَ دَعْوَاهُمْ إِذْ جَاءَهُم بَأْسُنَا إِلَّا أَن قَالُوا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
कि वह लोग या तो रात की नींद सो रहे थे या दिन को क़लीला (खाने के बाद का लेटना) कर रहे थे तब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा तो उनसे सिवाए इसके और कुछ न कहते बन पड़ा कि हम बेशक ज़ालिम थे
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-आराफ 3

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Sunday, October 11, 2026

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