Wa Huwal lazee yursilur riyaaha bushram baina yadai rahmatihee hattaaa izaaa aqallat sahaaban siqaalan suqnaahu libaladim maiyitin fa annzalnaa bihil maaa`a fa akhrajnaa bihee minn kullis samaraat; kazaalika nukhrijul mawtaa la`allakum tazakkaroon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
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اور وہی تو ہے جو اپنی رحمت (یعنی مینھ) سے پہلے ہواؤں کو خوشخبری (بنا کر) بھیجتا ہے۔ یہاں تک کہ جب وہ بھاری بھاری بادلوں کو اٹھا لاتی ہے تو ہم اس کو ایک مری ہوئی بستی کی طرف ہانک دیتے ہیں۔ پھر بادل سے مینھ برساتے ہیں۔ پھر مینھ سے ہر طرح کے پھل پیدا کرتے ہیں۔ اسی طرح ہم مردوں کو (زمین سے) زندہ کرکے باہر نکال لیں گے۔ (یہ آیات اس لیے بیان کی جاتی ہیں) تاکہ تم نصیحت پکڑو
لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ: सूखे, बंजर और मृत शहर (ज़मीन) के लिए।
تَذَكَّرُونَ: नसीहत हासिल करो, सीख लो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जो अपनी रहमत (बारिश) से पहले हवाओं को खुशखबरी देने वाली बनाकर भेजता है। ये हवाएँ नरम और लचीली होती हैं, जो बादलों को इकट्ठा करती हैं और लोगों को रहमत की आशा से भर देती हैं। जब ये हवाएँ पानी से लदे भारी बादलों को उठा लेती हैं, तो अल्लाह उन बादलों को एक ऐसे शहर (ज़मीन) की तरफ हाँकता है जो सूखा, बंजर और बेजान पड़ा हो। फिर उस ज़मीन पर बारिश बरसाता है, और उस पानी के ज़रिए हर तरह के फल, फसलें और हरियाली निकालता है। जिस तरह हम इस मृत (बंजर) ज़मीन को बारिश से ज़िंदा करते हैं, उसी तरह हम मरे हुए इंसानों को उनकी क़ब्रों से ज़िंदा करके निकालेंगे। यह सब कुछ इसलिए है ताकि तुम लोग (ऐ इंसानों!) अल्लाह की क़ुदरत को समझो, उसकी वहदानियत (एकता) पर दिल से यक़ीन करो और क़यामत के दिन दोबारा जीवित होने की सच्चाई को मान लो।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह की रहमत की पहचान: बारिश से पहले हवाओं का भेजा जाना अल्लाह की रहमत और उसकी मेहरबानी की निशानी है। वह अपने बंदों को अज़ाब से पहले रहमत की खुशखबरी देता है।
क़ुदरत का सबूत: बंजर ज़मीन को हरा-भरा करना अल्लाह की उस क़ुदरत का ज़िंदा सबूत है जो मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करेगी। जो इंसान इस दुनिया में यह नज़ारा देखता है, उसे आख़िरत के दिन पर शक नहीं रहना चाहिए।
उम्मीद और तवक्कुल: यह आयत इंसान को सिखाती है कि जब हालात बंजर और मायूस करने वाले हों, तो अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। वही हवाओं को बदलकर बारिश बरसा सकता है और मुश्किलों को आसानी में बदल सकता है।
सीखने की दावत: अल्लाह तआला इंसान को बार-बार सोचने और सीखने की तरफ बुलाता है। क़ुदरत के ये नज़ारे सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, बल्कि उनसे अल्लाह की वहदानियत और उसकी ताक़त का सबक लेने के लिए हैं।
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके - चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
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