अल-आराफ · 57/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَهُوَ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَنزَلْنَا بِهِ الْمَاءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِ مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۚ كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ ۝٥٧
Wa Huwal lazee yursilur riyaaha bushram baina yadai rahmatihee hattaaa izaaa aqallat sahaaban siqaalan suqnaahu libaladim maiyitin fa annzalnaa bihil maaa`a fa akhrajnaa bihee minn kullis samaraat; kazaalika nukhrijul mawtaa la`allakum tazakkaroon
📖 हिंदी अर्थ
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بُشْرًا: खुशखबरी देने वाली (हवाएँ)।
  • بَيْنَ يَدَيْ: सामने, आगे।
  • رَحْمَتِهِ: उसकी रहमत (बारिश)।
  • أَقَلَّتْ: उठा लेना, ढो लेना।
  • سَحَابًا ثِقَالًا: पानी से लदे भारी बादल।
  • لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ: सूखे, बंजर और मृत शहर (ज़मीन) के लिए।
  • تَذَكَّرُونَ: नसीहत हासिल करो, सीख लो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ही वह (सर्वशक्तिमान) है जो अपनी रहमत (बारिश) से पहले हवाओं को खुशखबरी देने वाली बनाकर भेजता है। ये हवाएँ नरम और लचीली होती हैं, जो बादलों को इकट्ठा करती हैं और लोगों को रहमत की आशा से भर देती हैं। जब ये हवाएँ पानी से लदे भारी बादलों को उठा लेती हैं, तो अल्लाह उन बादलों को एक ऐसे शहर (ज़मीन) की तरफ हाँकता है जो सूखा, बंजर और बेजान पड़ा हो। फिर उस ज़मीन पर बारिश बरसाता है, और उस पानी के ज़रिए हर तरह के फल, फसलें और हरियाली निकालता है। जिस तरह हम इस मृत (बंजर) ज़मीन को बारिश से ज़िंदा करते हैं, उसी तरह हम मरे हुए इंसानों को उनकी क़ब्रों से ज़िंदा करके निकालेंगे। यह सब कुछ इसलिए है ताकि तुम लोग (ऐ इंसानों!) अल्लाह की क़ुदरत को समझो, उसकी वहदानियत (एकता) पर दिल से यक़ीन करो और क़यामत के दिन दोबारा जीवित होने की सच्चाई को मान लो।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की रहमत की पहचान: बारिश से पहले हवाओं का भेजा जाना अल्लाह की रहमत और उसकी मेहरबानी की निशानी है। वह अपने बंदों को अज़ाब से पहले रहमत की खुशखबरी देता है।
  2. क़ुदरत का सबूत: बंजर ज़मीन को हरा-भरा करना अल्लाह की उस क़ुदरत का ज़िंदा सबूत है जो मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करेगी। जो इंसान इस दुनिया में यह नज़ारा देखता है, उसे आख़िरत के दिन पर शक नहीं रहना चाहिए।
  3. उम्मीद और तवक्कुल: यह आयत इंसान को सिखाती है कि जब हालात बंजर और मायूस करने वाले हों, तो अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। वही हवाओं को बदलकर बारिश बरसा सकता है और मुश्किलों को आसानी में बदल सकता है।
  4. सीखने की दावत: अल्लाह तआला इंसान को बार-बार सोचने और सीखने की तरफ बुलाता है। क़ुदरत के ये नज़ारे सिर्फ़ देखने के लिए नहीं, बल्कि उनसे अल्लाह की वहदानियत और उसकी ताक़त का सबक लेने के लिए हैं।


📜 आयत 55-59 — अल-आराफ

55ادْعُوا رَبَّكُمْ تَضَرُّعًا وَخُفْيَةً ۚ إِنَّهُ لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ
देखो हुकूमत और पैदा करना बस ख़ास उसी के लिए है वह ख़ुदा जो सारे जहाँन का परवरदिगार बरक़त वाला है
56وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَاحِهَا وَادْعُوهُ خَوْفًا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحْمَتَ اللَّهِ قَرِيبٌ مِّنَ الْمُحْسِنِينَ
(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके - चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो
57وَهُوَ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَنزَلْنَا بِهِ الْمَاءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِ مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۚ كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
58وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذِي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ
हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है
59لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
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अनुवाद — अल-आराफ 57

सूरा अल-आराफ आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब…

सूरा आयत 57/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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