अल-आराफ · 58/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذِي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ ۝٥٨
Walbaladut taiyibu yakhruju nabaatuhoo bi-izni Rabbihee wallazee khabusa laa yakhruju illaa nakidaa; kazaalika nusarriful Aayaati liqawminy yashkuroon
📖 हिंदी अर्थ
हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَلَدُ الطَّيِّبُ: अच्छी और उपजाऊ भूमि।
  • نَكِدًا: कठिनाई से, बहुत कम और बिना किसी लाभ के।
  • نُصَرِّفُ: हम विभिन्न प्रकार से प्रस्तुत करते हैं, दोहराते और स्पष्ट करते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में एक बहुत ही सुंदर और स्पष्ट उदाहरण दिया है। अच्छी और उपजाऊ भूमि जब वर्षा का पानी पीती है, तो वह अपने रब की आज्ञा से अच्छी और भरपूर फसल पैदा करती है। ठीक इसी प्रकार, जब एक सच्चा मोमिन (ईमानवाला) कुरआन की आयात और नसीहतें सुनता है, तो उसका दिल उन्हें अपना लेता है, और उसके अंदर अच्छे कर्म, अच्छा चरित्र और ईमान की मज़बूती पैदा होती है। उसका जीवन फलता-फूलता है और वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।

इसके विपरीत, खराब और शोरगिली (लवणीय) भूमि जब पानी पीती है, तो वह कुछ भी अच्छा नहीं उगाती; अगर कुछ उगता भी है, तो बहुत कम, कांटेदार और बेकार होता है। ठीक इसी प्रकार, जो व्यक्ति काफ़िर है या जिसका दिल सख्त और अहंकारी है, वह कुरआन और नसीहतों को सुनता है, लेकिन उससे कोई फायदा नहीं उठाता। उसके अंदर नेकी और अच्छाई पैदा नहीं होती, और उसका जीवन बेकार और बिना किसी सच्चे उद्देश्य के रहता है।

अल्लाह तआला फरमाता है कि इसी प्रकार हम अपनी आयात और निशानियों को विभिन्न तरीकों से बयान करते हैं और उन्हें दोहराते हैं, ताकि वे लोग समझ सकें जो अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करते हैं और उसकी इबादत करते हैं। शुक्र करने वालों का दिल नर्म होता है और वे हिदायत कबूल करते हैं।

फायदे और सबक:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह अच्छी ज़मीन से अच्छी फसल पैदा होती है, उसी तरह अच्छे दिल से अच्छे कर्म पैदा होते हैं। हमें अपने दिल को अच्छा और साफ रखने की कोशिश करनी चाहिए।
  2. कुरआन की आयात सुनने का फायदा तभी होता है जब हम उन्हें समझें और उन पर अमल करें। सिर्फ सुनना काफी नहीं है।
  3. अल्लाह तआला ने कुरआन में कई उदाहरण दिए हैं ताकि हम आसानी से समझ सकें। यह अल्लाह की रहमत और हमारे प्रति उसके प्यार की निशानी है।
  4. शुक्रगुज़ार बंदा हमेशा अल्लाह की तरफ रुजू करता है और उसकी हिदायत को कबूल करता है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में मशगूल रहें।
  5. यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम और कुरआन हर इंसान के लिए रहमत है, लेकिन फायदा वही उठा सकता है जो सच्चे दिल से सुनता और समझता है।


📜 आयत 56-60 — अल-आराफ

56وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَاحِهَا وَادْعُوهُ خَوْفًا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحْمَتَ اللَّهِ قَرِيبٌ مِّنَ الْمُحْسِنِينَ
(लोगों) अपने परवरदिगार से गिड़गिड़ाकर और चुपके - चुपके दुआ करो, वह हद से तजाविज़ करने वालों को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता और ज़मीन में असलाह के बाद फसाद न करते फिरो और (अज़ाब) के ख़ौफ से और (रहमत) की आस लगा के ख़ुदा से दुआ मांगो
57وَهُوَ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَنزَلْنَا بِهِ الْمَاءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِ مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۚ كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
58وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذِي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ
हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है
59لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
60قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ إِنَّا لَنَرَاكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो
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अनुवाद — अल-आराफ 58

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Tuesday, August 18, 2026

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