अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَقَدْ أَرْسَلْنَا – हमने भेजा
- نُوحًا – नूह (अलैहिस्सलाम)
- قَوْمِهِ – उसकी क़ौम (समुदाय)
- اعْبُدُوا – इबादत करो
- مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ – उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं
- أَخَافُ – मैं डरता हूँ
- عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ – एक महान दिन की यातना
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को उनकी क़ौम की ओर भेजा, जो मूर्तियों की पूजा करते थे और अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराते थे। नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को पुकारते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला पूजो। उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। आसमानों और ज़मीन में कोई भी ऐसा नहीं जो इबादत का हक़दार हो, सिवाय अल्लाह के।"
फिर उन्होंने अपनी क़ौम को डराया और कहा: "मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।" यह दिन क़यामत का दिन है, या उस दिन का भी उल्लेख हो सकता है जब तूफ़ान (सैलाब) आया था। अगर तुम अपनी मूर्तियों की पूजा और कुफ़्र पर बने रहे, तो अल्लाह की ओर से तुम पर ऐसा अज़ाब आएगा जो बहुत भयानक होगा।
इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है। अल्लाह ने हर ज़माने में पैग़म्बर भेजे, और उनका मूल संदेश एक ही था – तौहीद (अल्लाह की एकता) और उसकी इबादत। यही इस्लाम की बुनियाद है। जब हम अल्लाह को अकेला पूजते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है, और हमारे कर्मों में सच्चाई और नेकी आती है।
आज भी हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में अल्लाह को अकेला मानें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह तआला हमें सच्चे दिल से अपनी इबादत करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 57-61 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 59
सूरा अल-आराफ आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के…सूरा आयत 59/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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