अल-आराफ · 59/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ ۝٥٩
Laqad arsalnaa noohan ilaa qawmihee faqaala yaa qawmi` budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhoo inneee akhaafu `alaikum `azaaba Yawmin `Azeem
📖 हिंदी अर्थ
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَقَدْ أَرْسَلْنَا – हमने भेजा
  • نُوحًا – नूह (अलैहिस्सलाम)
  • قَوْمِهِ – उसकी क़ौम (समुदाय)
  • اعْبُدُوا – इबादत करो
  • مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ – उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं
  • أَخَافُ – मैं डरता हूँ
  • عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ – एक महान दिन की यातना

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बर हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को उनकी क़ौम की ओर भेजा, जो मूर्तियों की पूजा करते थे और अल्लाह के साथ दूसरों को साझी ठहराते थे। नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को पुकारते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला पूजो। उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा पूज्य नहीं है। आसमानों और ज़मीन में कोई भी ऐसा नहीं जो इबादत का हक़दार हो, सिवाय अल्लाह के।"

फिर उन्होंने अपनी क़ौम को डराया और कहा: "मैं तुम्हारे लिए एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।" यह दिन क़यामत का दिन है, या उस दिन का भी उल्लेख हो सकता है जब तूफ़ान (सैलाब) आया था। अगर तुम अपनी मूर्तियों की पूजा और कुफ़्र पर बने रहे, तो अल्लाह की ओर से तुम पर ऐसा अज़ाब आएगा जो बहुत भयानक होगा।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ा सबक है। अल्लाह ने हर ज़माने में पैग़म्बर भेजे, और उनका मूल संदेश एक ही था – तौहीद (अल्लाह की एकता) और उसकी इबादत। यही इस्लाम की बुनियाद है। जब हम अल्लाह को अकेला पूजते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है, हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है, और हमारे कर्मों में सच्चाई और नेकी आती है।

आज भी हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में अल्लाह को अकेला मानें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा। अल्लाह तआला हमें सच्चे दिल से अपनी इबादत करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 57-61 — अल-आराफ

57وَهُوَ الَّذِي يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَقَلَّتْ سَحَابًا ثِقَالًا سُقْنَاهُ لِبَلَدٍ مَّيِّتٍ فَأَنزَلْنَا بِهِ الْمَاءَ فَأَخْرَجْنَا بِهِ مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ ۚ كَذَٰلِكَ نُخْرِجُ الْمَوْتَىٰ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
(क्योंकि) नेकी करने वालों से ख़ुदा की रहमत यक़ीनन क़रीब है और वही तो (वह) ख़ुदा है जो अपनी रहमत (अब्र) से पहले खुशखबरी देने वाली हवाओ को भेजता है यहाँ तक कि जब हवाएं (पानी से भरे) बोझल बादलों के ले उड़े तो हम उनको किसी शहर की की तरफ (जो पानी का नायाबी (कमी) से गोया) मर चुका था हॅका दिया फिर हमने उससे पानी बरसाया, फिर हमने उससे हर तरह के फल ज़मीन से निकाले
58وَالْبَلَدُ الطَّيِّبُ يَخْرُجُ نَبَاتُهُ بِإِذْنِ رَبِّهِ ۖ وَالَّذِي خَبُثَ لَا يَخْرُجُ إِلَّا نَكِدًا ۚ كَذَٰلِكَ نُصَرِّفُ الْآيَاتِ لِقَوْمٍ يَشْكُرُونَ
हम यूं ही (क़यामत के दिन ज़मीन से) मुर्दों को निकालेंगें ताकि तुम लोग नसीहत व इबरत हासिल करो और उम्दा ज़मीन उसके परवरदिगार के हुक्म से उस सब्ज़ा (अच्छा ही) है और जो ज़मीन बड़ी है उसकी पैदावार ख़राब ही होती है
59لَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ فَقَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ
हम यू अपनी आयतों को उलेटफेर कर शुक्रग़ुजार लोगों के वास्ते बयान करते हैं बेशक हमने नूह को उनकी क़ौम के पास (रसूल बनाकर) भेजा तो उन्होनें (लोगों से ) कहाकि ऐ मेरी क़ौम ख़ुदा की ही इबादत करो उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं है और मैं तुम्हारी निस्बत (क़यामत जैसे) बड़े ख़ौफनाक दिन के अज़ाब से डरता हूँ
60قَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِهِ إِنَّا لَنَرَاكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
तो उनकी क़ौम के चन्द सरदारों ने कहा हम तो यक़ीनन देखते हैं कि तुम खुल्लम खुल्ला गुमराही में (पड़े) हो
61قَالَ يَا قَوْمِ لَيْسَ بِي ضَلَالَةٌ وَلَٰكِنِّي رَسُولٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
तब नूह ने कहा कि ऐ मेरी क़ौम मुझ में गुमराही (वग़ैरह) तो कुछ नहीं बल्कि मैं तो परवरदिगारे आलम की तरफ से रसूल हूँ
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अनुवाद — अल-आराफ 59

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Tuesday, August 18, 2026

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