Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- عَبْدُ اللَّهِ (अब्दुल्लाह): अल्लाह के बंदे, यानी हज़रत मुहम्मद ﷺ।
- يَدْعُوهُ (यद्ऊहु): उसे पुकारता है, यानी अल्लाह की इबादत करता है और उसकी तरफ बुलाता है।
- لِبَدًا (लिबदन): एक दूसरे के ऊपर जमा हुए, गुच्छेदार, भीड़ की वजह से इकट्ठे हुए लोग।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब अल्लाह के बंदे हज़रत मुहम्मद ﷺ ने "नख़ला" (मक्का के पास एक घाटी) में रात के समय खड़े होकर अल्लाह की इबादत की और क़ुरआन की तिलावत शुरू की, तो जिन्नों का एक गिरोह (जो नसीबीन के इलाके से आया था) उनकी क़ुरआन की तिलावत सुनने के लिए इस कदर बेताब हो गया कि वे एक दूसरे पर चढ़ते-गिरते हुए, इकट्ठे होकर उनके पास आ खड़े हुए। उनकी भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि वे एक-दूसरे के ऊपर लदे हुए थे, ताकि क़ुरआन का एक शब्द भी उनके कानों से न छूटे। यह मंज़र उस वक़्त का है जब अल्लाह के रसूल ﷺ ने सुबह की नमाज़ में क़ुरआन पढ़ा और जिन्नों ने उसे सुनकर अपनी क़ौम की तरफ लौटकर कहा: "हमने एक अजीब क़ुरआन सुना है जो सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है, हम उस पर ईमान ले आए।"
यह आयत उस वक़्त की तस्वीर पेश करती है जब अल्लाह के नबी ﷺ ने अकेले रात के सन्नाटे में अल्लाह की इबादत की और क़ुरआन की तिलावत की। यह इबादत सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि जिन्नात के लिए भी हिदायत का ज़रिया बनी। जिन्नों का इस तरह इकट्ठा होना और क़ुरआन सुनने के लिए बेताब होना इस बात का सबूत है कि क़ुरआन में ऐसी कशिश है जो इंसानों और जिन्नों दोनों को अपनी तरफ खींच लेती है। यह हमारे लिए एक सबक़ है कि जब हम अल्लाह की इबादत करें और क़ुरआन पढ़ें, तो उसे सच्चे दिल से पढ़ें, क्योंकि अल्लाह की बात में वो नूर है जो दिलों को रोशन कर देता है।
अल्लाह तआला ने इस आयत में हमें बताया कि उसका बंदा जब उसे पुकारता है, तो सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि जिन्नात भी उसकी तरफ रुख करते हैं। यह हमारे नबी ﷺ की शान है कि उनकी इबादत और तिलावत का असर पूरी कायनात पर पड़ता है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी नमाज़ों और क़ुरआन की तिलावत को सिर्फ रस्म न बनाएं, बल्कि उसे दिल से समझें और उस पर अमल करें। जब हम अल्लाह की तरफ सच्चे दिल से रुख करेंगे, तो अल्लाह हमारी मदद करेगा और हमें सीधा रास्ता दिखाएगा। यही इस आयत का पैग़ाम है कि अल्लाह की इबादत में इतनी बरकत है कि उसके फरिश्ते, जिन्न और इंसान सब उसकी तरफ खिंचे चले आते हैं।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 19
सूरा अल-जिन्न आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि जब उसका बन्दा (मोहम्मद) उसकी इबादत को…सूरा आयत 19/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जिन्न
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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