Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَدْعُو — मैं पुकारता हूँ, अर्थात् अपनी इबादत और प्रार्थना में एकमात्र उसे ही सम्बोधित करता हूँ।
- رَبِّي — मेरा पालनहार, जो मेरा सृष्टिकर्ता, पालन-पोषण करने वाला और स्वामी है।
- أُشْرِكُ — मैं साझी ठहराता हूँ, किसी और को उसके साथ इबादत में शामिल करता हूँ।
- أَحَدًا — किसी को भी, चाहे वह कोई भी प्राणी, देवता या वस्तु हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से साफ़ और दृढ़ शब्दों में कह दीजिए कि मैं केवल अपने रब को पुकारता हूँ और उसी की इबादत करता हूँ। मेरी दुआ, मेरी नमाज़, मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीवन और मेरी मृत्यु — सब कुछ केवल उसी के लिए है। मैं उसके साथ किसी को भी साझी नहीं ठहराता — न किसी फ़रिश्ते को, न किसी नबी को, न किसी इंसान को, न किसी जिन्न को और न ही किसी मूर्ति या तस्वीर को। मेरी इबादत ख़ालिस और एकमात्र उसी के लिए है, और यही मेरा दीन है, यही मेरा रास्ता है।
यह आयत तौहीद (एकेश्वरवाद) की वह बुनियाद है जिस पर पूरा इस्लाम खड़ा है। यह सिखाती है कि इबादत केवल अल्लाह के लिए है, और उसके साथ किसी भी प्रकार का शिर्क (साझीदारी) सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ा पाप है। जब एक इंसान अपने दिल को शिर्क से पाक कर लेता है और अपनी पूरी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के लिए समर्पित कर देता है, तो उसे एक अजीब सुकून, इत्मिनान और आज़ादी मिलती है — वह किसी इंसान, किसी ताक़त या किसी हालात का ग़ुलाम नहीं रहता, बल्कि सिर्फ़ अल्लाह का बंदा बन जाता है, और यही सबसे बड़ी इज़्ज़त है।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि जीवन की हर मुश्किल में, हर ज़रूरत में, हर दर्द में हमें सीधे अपने रब से जुड़ना चाहिए। उसी से माँगना चाहिए, उसी से उम्मीद रखनी चाहिए। जब दिल में यह यक़ीन पक्का हो जाए कि अल्लाह ही सब कुछ कर सकता है और वही सुनता है, तो इंसान कभी निराश नहीं होता। यही तौहीद हमें ज़िंदगी की हर परेशानी में सहारा देती है और हमें उस ताक़त से जोड़ती है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। आइए, हम अपने दिलों को शिर्क की हर मैल से पाक करें और अपनी ज़िंदगी को इसी पवित्र कलिमा पर क़ायम करें — "ला इलाहा इल्लल्लाह" — कोई इबादत के लायक़ नहीं, सिवाय अल्लाह के।
📜 आयत 18-22 — सूरा अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 20
सूरा अल-जिन्न आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो अपने परवरदिगार…सूरा आयत 20/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जिन्न
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


