अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَاللَّيْلِ: रात की क़सम।
- إِذْ أَدْبَرَ: जब वह पीठ फेरकर चला जाए, यानी जब रात ख़त्म होने लगे और सुबह का आगमन हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में रात की क़सम खाई है, जब वह विदा होती है और अपने अंधेरे के साथ चली जाती है। यह क़सम उस वक़्त की ओर इशारा करती है जब रात का सन्नाटा टूटता है, अंधेरा छँटने लगता है और सुबह की रोशनी फैलने लगती है। यह वह पल है जब अल्लाह की क़ुदरत के नज़ारे साफ़ दिखाई देते हैं — रात का पीठ फेरना और दिन का आगमन, यह सब अल्लाह के इशारे से होता है।
इस क़सम का मक़सद उन लोगों को जवाब देना है जो रसूल ﷺ के पैग़ाम को झुठलाते थे। अल्लाह फ़रमाता है: यह बात वैसी नहीं है जैसा ये कहते हैं। मैंने क़सम खाई है चाँद की, रात की जब वह जाती है, और सुबह की जब वह रोशन होती है — कि ये क़ुरआन और ये चेतावनी सच है। यह नरक की आग एक बहुत बड़ी आफ़त है, जो इंसानों को डराने और सावधान करने के लिए पेश की गई है।
यह क़समें बताती हैं कि अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ हर तरफ़ हैं — रात और दिन का बदलना, अंधेरे के बाद उजाला, और हर चीज़ का एक वक़्त पर आना-जाना। जिस तरह रात के बाद सुबह ज़रूर आती है, उसी तरह मौत के बाद हिसाब ज़रूर आएगा। जो लोग इस पर यक़ीन करें और अच्छे काम करें, वे अल्लाह की रहमत के हक़दार होंगे, और जो इनकार करें, उनके लिए अज़ाब तैयार है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की बनाई हर चीज़ में उसकी याद है। रात का जाना और सुबह का आना हमें याद दिलाता है कि हमारी ज़िंदगी भी इसी तरह बदलती रहती है — कभी मुश्किल, कभी आसान। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसकी इबादत करनी चाहिए और उसके दिए हुए दीन पर चलना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाता है।
📜 आयत 31-35 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 33
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और रात की जब जाने लगेसूरा आयत 33/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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