अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- كَلَّا: हरगिज़ नहीं, ऐसा नहीं है जैसा ये कहते हैं। यह इन्कार और झिड़की के लिए आया है।
- وَالْقَمَرِ: चन्द्रमा की क़सम।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला ने उन मुशरिकीन के उस दावे का खंडन किया है जो कहते थे कि अगर हम पर अज़ाब आया तो हमें जहन्नुम के फ़रिश्ते ही काफ़ी हैं या फिर वे कहते थे कि मुहम्मद ﷺ जो कुछ लेकर आए हैं वह झूठ है। अल्लाह फ़रमाता है: हरगिज़ नहीं! यह बात बिल्कुल ग़लत है। जिस दिन अल्लाह का अज़ाब आएगा, उस दिन कोई किसी के काम न आएगा।
फिर अल्लाह तआला ने चन्द्रमा की क़सम खाई। चन्द्रमा अल्लाह की क़ुदरत की एक अज़ीम निशानी है। वह रात की तारीकी में रौशनी फैलाता है, अपने मुख़्तलिफ़ मराहिल (चरणों) से गुज़रता है — कभी पतला हिलाल बनता है, कभी पूरा चाँद बन जाता है। यह तमाम तग़य्युरात अल्लाह ही के इशारे से होते हैं। यह क़सम उन लोगों को सोचने पर मजबूर करती है कि जिस ज़ात ने चाँद-सूरज को पैदा किया और उन्हें अपने क़ाबू में रखा, क्या वह उनके झूठे दावों और शिर्क से बेख़बर है? हरगिज़ नहीं!
यह क़सम दरअसल उस बड़े ख़तरे की तरफ़ इशारा है जो आने वाला है — यानी क़यामत का दिन और जहन्नुम का अज़ाब। अल्लाह तआला ने चन्द्रमा की क़सम खाकर बताया कि यह बात जो वे कह रहे हैं, हरगिज़ सही नहीं। जहन्नुम की आग एक बहुत बड़ी आफ़त है, जिससे बचने का ज़रिया सिर्फ़ ईमान और नेक अमल है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! ज़रा सोचिए — जिस चाँद को हम रोज़ाना आसमान में देखते हैं, जिसकी रौशनी से रातें मुकम्मल होती हैं, उसी की क़सम अल्लाह ने खाई है। यह क़सम हमें बताती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे सब कुछ मुतिअ (आज्ञाकारी) है। चाँद, सूरज, सितारे — सब अल्लाह के हुक्म के ताबे हैं। तो क्या हम इंसान, जो अशरफ़ुल मख़लूक़ात हैं, अपने रब की इताअत न करें?
यह आयत हमें दावत देती है कि हम चाँद की रौशनी में अल्लाह की अज़मत पर ग़ौर करें, उसकी क़ुदरत पर ईमान लाएँ, और उस दिन के अज़ाब से डरें जिसका ज़िक्र अल्लाह ने क़ुरआन में किया है। जो शख्स अल्लाह और उसके रसूल ﷺ पर ईमान लाएगा और नेक अमल करेगा, उसके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है। और जो इन्कार करेगा, उसके लिए जहन्नुम का अज़ाब है। अल्लाह हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 30-34 — अल-मुद्दस्सिर
अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 32
सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सुन रखो (हमें) चाँद की क़समसूरा आयत 32/56 — अल-मुद्दस्सिर المدثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुद्दस्सिर सुनें, अल-मुद्दस्सिर अनुवाद, अल-मुद्दस्सिर mp3, अल-मुद्दस्सिर pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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