अल-मुद्दस्सिर · 34/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
وَالصُّبْحِ إِذَا أَسْفَرَ ۝٣٤
Wassub hi izaaa asfar
📖 हिंदी अर्थ
और सुबह की जब रौशन हो जाए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالصُّبْحِ: सुबह (प्रातःकाल) की क़सम।
  • إِذَا أَسْفَرَ: जब वह रोशन हो जाए और चमक उठे, यानी सुबह का उजाला फैल जाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में सुबह की क़सम खाई है, जब वह रोशन हो जाती है और अंधेरा छटकर उजाला फैल जाता है। यह क़सम उन लोगों के जवाब में है जो रसूल (ﷺ) और क़ुरआन को झुठलाते थे। अल्लाह ने पहले चाँद की क़सम खाई, फिर रात के जाने की, और अब सुबह के उजाला होने की क़सम खाई। ये सारी क़समें इस बात की गवाह हैं कि जिस दिन का वादा किया गया है—यानी क़यामत का दिन—वह सच है और उसका आना निश्चित है।

सुबह का उजाला अल्लाह की क़ुदरत की एक अज़ीम निशानी है। जिस तरह रात के अंधेरे के बाद सुबह की रोशनी ज़रूर आती है, उसी तरह मौत के बाद दोबारा ज़िंदा होना और हिसाब-किताब का दिन भी ज़रूर आएगा। यह क़सम इसलिए खाई गई ताकि इंसान समझे कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसे अपने कर्मों का हिसाब देना है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह सुबह का उजाला अंधेरे को मिटा देता है, उसी तरह ईमान और अच्छे काम इंसान के दिल से ग़लतियों और पापों के अंधेरे को मिटा देते हैं। अल्लाह ने हमें दिन और रात बनाए, ताकि हम उसमें सोचें और समझें कि जो अल्लाह चाहता है, वही होता है। जो लोग रसूल (ﷺ) की बात मानेंगे और अल्लाह की इबादत करेंगे, उनके लिए जन्नत की रोशनी है, और जो इनकार करेंगे, उनके लिए आग का अज़ाब है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपनी ज़िंदगी में हमेशा सच्चाई और नेकी का रास्ता अपनाना चाहिए। सुबह का उजाला हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा हमेशा खुला है। जब तक इंसान ज़िंदा है, वह तौबा कर सकता है और अपने अंधेरे कर्मों को रोशनी में बदल सकता है। अल्लाह हम सबको सीधा रास्ता दिखाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो सुबह के उजाले की तरह रोशन और पाक ज़िंदगी जीते हैं। आमीन।



📜 आयत 32-36 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

32كَلَّا وَالْقَمَرِ
सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम
33وَاللَّيْلِ إِذْ أَدْبَرَ
और रात की जब जाने लगे
34وَالصُّبْحِ إِذَا أَسْفَرَ
और सुबह की जब रौशन हो जाए
35إِنَّهَا لَإِحْدَى الْكُبَرِ
कि वह (जहन्नुम) भी एक बहुत बड़ी (आफ़त) है
36نَذِيرًا لِّلْبَشَرِ
(और) लोगों के डराने वाली है
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
34आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 34

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और सुबह की जब रौशन हो जाए

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Thursday, October 1, 2026

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