अल-इंसान · 6/31
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इंसान
عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ اللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا ۝٦
Aynany yashrabu bihaa `ibaadul laahi yafajjiroonahaa tafjeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَيْنًا (ऐनन): सोता, चश्मा
  • يَشْرَبُ بِهَا: उससे पीते हैं (यहाँ "बा" ज़रिए के लिए है, यानी उसी सोते से)
  • عِبَادُ اللَّهِ: अल्लाह के ख़ास बंदे, उसके नेक और पसंदीदा लोग
  • يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا: उसे ज़ोर से बहाते हैं, जहाँ चाहें वहाँ ले जाते हैं और आसानी से जारी करते हैं

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही शराब-ए-तहूर (पाक पेय) है जिसे काफ़ूर के साथ मिलाया गया है, और यह एक ऐसा चश्मा है जिससे अल्लाह के वफ़ादार और नेक बंदे पीते हैं। यह सोता अत्यंत स्वच्छ, मीठा और खुशगवार है, जो कभी सूखता नहीं, बल्कि लगातार बहता रहता है। अल्लाह के ये बंदे इसे जिस तरफ चाहते हैं, मोड़ लेते हैं — अपने घरों, महलों और बागों में जहाँ चाहें, आसानी से इसका प्रवाह कर लेते हैं। यह उनकी इच्छा और तसर्रुफ़ (अधिकार) में होता है, जैसे दुनिया में नहरें बहाई जाती हैं, लेकिन यहाँ यह पूर्ण स्वतंत्रता और सम्मान के साथ है।

यह नेमत उन लोगों के लिए है जो दुनिया में अल्लाह के सच्चे बंदे बनकर रहे — उन्होंने अपने अल्लाह से किए गए वादों को पूरा किया, उसकी इबादत में कोई कसर नहीं छोड़ी, और उस दिन (क़ियामत) से डरते रहे जिसका अज़ाब बहुत सख्त है और जिसकी बुराई हर तरफ फैलने वाली है। उन्होंने अल्लाह की मुहब्बत में भूखे को खाना खिलाया, अनाथ की मदद की, और कैदियों के साथ भलाई की — और यह सब केवल अल्लाह की रज़ा के लिए किया, न कि किसी दुनियावी बदले या तारीफ़ के लिए। उनका दिल इस बात पर जमा था कि वे अपने रब से उस सख्त दिन का खौफ रखते हैं जब चेहरे बिगड़ जाएंगे और माथे पर बल पड़ जाएंगे।

यह आयत हमें सिखाती है कि जो लोग अल्लाह के लिए अपनी ज़िंदगी को ढाल लेते हैं — उसकी इबादत, उसके बंदों से हमदर्दी और उसके दीन की खिदमत में — अल्लाह उन्हें ऐसी जन्नत देगा जिसकी नेमतों का कोई अंत नहीं। यहाँ तक कि उनके पीने का पानी भी उनके इख्तियार में होगा, जिसे वे जहाँ चाहें बहाएँ। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता। तो आओ, हम भी उन बंदों में शामिल होने की कोशिश करें जो अल्लाह की रज़ा के लिए दूसरों की मदद करते हैं, और उस दिन के खौफ से अपने अमल को सुधारते हैं — ताकि हम भी उस चश्मे से पी सकें जो कभी खत्म नहीं होता।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-इंसान

4إِنَّا أَعْتَدْنَا لِلْكَافِرِينَ سَلَاسِلَ وَأَغْلَالًا وَسَعِيرًا
हमने काफ़िरों के ज़ंजीरे, तौक और दहकती हुई आग तैयार कर रखी है
5إِنَّ الْأَبْرَارَ يَشْرَبُونَ مِن كَأْسٍ كَانَ مِزَاجُهَا كَافُورًا
बेशक नेकोकार लोग शराब के वह सागर पियेंगे जिसमें काफूर की आमेज़िश होगी ये एक चश्मा है जिसमें से ख़ुदा के (ख़ास) बन्दे पियेंगे
6عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا عِبَادُ اللَّهِ يُفَجِّرُونَهَا تَفْجِيرًا
और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे
7يُوفُونَ بِالنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُ مُسْتَطِيرًا
ये वह लोग हैं जो नज़रें पूरी करते हैं और उस दिन से जिनकी सख्ती हर तरह फैली होगी डरते हैं
8وَيُطْعِمُونَ الطَّعَامَ عَلَىٰ حُبِّهِ مِسْكِينًا وَيَتِيمًا وَأَسِيرًا
और उसकी मोहब्बत में मोहताज और यतीम और असीर को खाना खिलाते हैं
अल-इंसानकुरान सूची
31आयत
मदनीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-इंसान 6

सूरा अल-इंसान आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जहाँ चाहेंगे बहा ले जाएँगे

सूरा आयत 6/31 — सूरा अल-इंसान الإنسان (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इंसान सुनें, सूरा अल-इंसान अनुवाद, सूरा अल-इंसान mp3, सूरा अल-इंसान pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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