Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَلَمْ نُهْلِكِ: क्या हमने विनाश नहीं किया?
- الْأَوَّلِينَ: पिछली उम्मतें (पहले के लोग)
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत और अज़ाब के अंदाज़ को याद दिलाते हुए फ़रमाता है: क्या हमने पिछली उम्मतों को हलाक नहीं किया, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया और कुफ़्र व इन्कार पर क़ायम रहे? जैसे क़ौमे नूह, आद, समूद और फ़िरऔन की क़ौम — ये सब अपने नबियों की तकज़ीब (झुठलाने) की वजह से अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुईं और उनका नामो-निशान मिट गया।
ये ज़िक्र सिर्फ़ इतिहास की सैर के लिए नहीं, बल्कि इसलिए है कि इंसान इबरत हासिल करे। अल्लाह ने उन पिछली क़ौमों को उनके ज़ुल्म और सरकशी की वजह से हलाक किया, और यही सुन्नत (क़ानून) आज भी जारी है — जो कोई भी हक़ को झुठलाएगा और रसूलों की नाफ़रमानी करेगा, उसका अंजाम भी वैसा ही होगा। फिर अल्लाह ने उनके बाद आने वालों को भी उन्हीं के हाल पर छोड़ा, और जब उन्होंने भी वही रास्ता अपनाया तो उन्हें भी उसी अज़ाब में मिला दिया।
इस आयत में कुफ़्फ़ारे मक्का के लिए भी एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है कि जिस तरह अल्लाह ने पिछली उम्मतों को उनके तकज़ीब की वजह से हलाक किया, उसी तरह वह इन लोगों को भी हलाक कर सकता है, क्योंकि इन्होंने भी रसूलुल्लाह ﷺ को झुठलाया और उनकी दावत को नकारा। अल्लाह की सुन्नत में कोई तब्दीली नहीं होती।
दावती पहलू:
ये आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि इतिहास के वरक़ पलट कर देखें — कितनी ही ताक़तवर क़ौमें थीं, जिनके महल और इमारतें आसमान को छूते थे, लेकिन जब उन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया, तो उनकी सारी ताक़त उनके किसी काम न आई। ये हमारे लिए सबक़ है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई हिदायत को क़बूल करें, क्योंकि यही हमारी नजात (मुक्ति) का ज़रिया है। अल्लाह रहीम और करीम है — उसने हमें क़ुरआन और सुन्नत के ज़रिए राह दिखाई है, ताकि हम उन क़ौमों के अंजाम से बचे रहें। जो लोग हिदायत क़बूल कर लेते हैं, अल्लाह उनसे मुहब्बत करता है और उन्हें जन्नत की नेमतों से नवाज़ता है।
📜 आयत 14-18 — सूरा अल-मुरसलात
अनुवाद — अल-मुरसलात 16
सूरा अल-मुरसलात आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या हमने अगलों को हलाक नहीं कियासूरा आयत 16/50 — सूरा अल-मुरसलात المرسلات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुरसलात सुनें, सूरा अल-मुरसलात अनुवाद, सूरा अल-मुरसलात mp3, सूरा अल-मुरसलात pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुरसलात
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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