अल-मुरसलात · 30/50
अनुवाद उच्चारण — अल-मुरसलात
انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ ۝٣٠
Intaliqooo ilaa zillin zee salaasi shu`ab
📖 हिंदी अर्थ
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • انطَلِقُوا: चलो, जाओ (यहाँ यह अपमानजनक और तिरस्कारपूर्ण आदेश है)।
  • ظِلٍّ: छाया (यहाँ इसका अर्थ है जहन्नम का धुआँ)।
  • ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ: तीन शाखाओं वाला (धुएँ का तीन हिस्सों में विभाजित होना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन जब काफ़िरों को उनके अंजाम का सामना करना होगा, तो उनसे कहा जाएगा: "चलो, उस छाया की ओर जाओ जो तीन शाखाओं वाली है!" यह कोई आरामदेह छाया नहीं है, बल्कि जहन्नम का वह काला और घना धुआँ है जो अपनी भयावहता के कारण तीन हिस्सों में टूट जाता है। यह धुआँ न तो उन्हें उस दिन की तपिश से राहत देगा, न ही आग की लपटों की गर्मी से कोई सुरक्षा प्रदान करेगा।

यह वही धुआँ है जिसके बारे में क़ुरआन ने पहले ही आगाह कर दिया था, लेकिन काफ़िरों ने इसे झुठलाया। आज वे इसका सामना कर रहे हैं, और यह उनके लिए बेहद अपमानजनक और दर्दनाक है। यह छाया उन्हें उस दिन की कड़ी धूप से भी नहीं बचाएगी, क्योंकि यह स्वयं आग का ही एक रूप है।

इस आयत में अल्लाह तआला ने काफ़िरों की स्थिति को इस तरह बयान किया है कि वे जिस चीज़ से बचना चाहते थे, उसी की ओर उन्हें भगाया जा रहा है। यह उनके लिए सबसे बड़ी यातना है कि उन्हें "छाया" की ओर बुलाया जा रहा है, लेकिन वह छाया भी उनके लिए अज़ाब का सामान है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी रहमत की ओर लौटने की तरग़ीब देती है। अल्लाह ने इस दुनिया में हमें राहत की छायाएँ दी हैं — पेड़ों की छाँव, घरों की सुरक्षा, और आराम के साधन — ताकि हम उसके एहसानों को पहचानें और उसका शुक्र अदा करें। लेकिन जो लोग इन नेमतों को भूलकर अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं, उनके लिए आख़िरत में सिर्फ़ अज़ाब है।

आओ, हम इस दुनिया की अस्थायी छायाओं पर भरोसा न करें, बल्कि उस सच्ची राहत की तलाश करें जो अल्लाह की रहमत और उसके रसूल ﷺ की पैरवी में है। जन्नत की छायाएँ हमेशा रहने वाली हैं, और वहाँ का सुकून कभी ख़त्म नहीं होता। अल्लाह हमें उस रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे, जो उसकी रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 28-32 — अल-मुरसलात

28وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
29انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
30انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
31لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِي مِنَ اللَّهَبِ
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
32إِنَّهَا تَرْمِي بِشَرَرٍ كَالْقَصْرِ
उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल
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अनुवाद — अल-मुरसलात 30

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Tuesday, August 18, 2026

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