अल-मुरसलात · 31/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِي مِنَ اللَّهَبِ ۝٣١
Laa zaleelinw wa laa yughnee minal lahab
📖 हिंदी अर्थ
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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📜 आयत 29-33 — सूरा अल-मुरसलात

29انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
30انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
31لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِي مِنَ اللَّهَبِ
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
32إِنَّهَا تَرْمِي بِشَرَرٍ كَالْقَصْرِ
उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल
33كَأَنَّهُ جِمَالَتٌ صُفْرٌ
गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
31आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 31

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Thursday, October 1, 2026

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