अन-नाज़ियात · 9/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
أَبْصَارُهَا خَاشِعَةٌ ۝٩
Absaa ruhaa khashi`ah
📖 हिंदी अर्थ
उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अब्सारुहा: उनकी आँखें (यानी उन लोगों की आँखें जिनके दिल उस दिन काँप रहे होंगे)
  • ख़ाशि'अह: झुकी हुई, नीची, अपमानित और लज्जित

तफ़सीर:

यह आयत उस भयानक दिन (क़ियामत) का हाल बयान कर रही है जब कुछ लोगों के चेहरे उजले होंगे और कुछ के काले। जिन लोगों के दिल उस दिन सख्त खौफ़ और घबराहट से धड़क रहे होंगे, उनकी आँखें भी उसी हालत का इज़हार कर रही होंगी — वे आँखें नीची झुकी होंगी, शर्मिंदा और अपमानित। उनकी निगाहें किसी ओर नहीं उठ पाएँगी, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों को नहीं माना और आख़िरत को झुठलाया था। उस दिन जो कुछ वे देखेंगी — जहन्नम की आग, हिसाब की सख्ती, अज़ाब के मंज़र — उसकी हैबत से उनकी आँखें सिकुड़ जाएँगी और वे किसी तरफ़ देखने की हिम्मत नहीं कर पाएँगी।

यह वही हालत है जो अल्लाह तआला ने कुरआन में कई जगह बयान की है, जैसे "उनकी आँखें झुकी होंगी, उन पर रुसवाई छाई होगी" — यानी जिसने दुनिया में अल्लाह के सामने अपने आपको बड़ा समझा और उसकी इबादत से सरकशी की, उस दिन उसे ऐसी ज़िल्लत और रुसवाई देखनी पड़ेगी जिसका कोई अंदाज़ा नहीं।

नसीहत और दावत का पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी आँखों का इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं। जो आँखें आज अल्लाह की नाफ़रमानी की तरफ़ देखती हैं, वही आँखें उस दिन शर्म से नीची होंगी। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है — उसने तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। आज भी अगर हम अपनी आँखों को हराम से बचाएँ, अल्लाह की किताब और उसकी निशानियों को ग़ौर से देखें, तो यही आँखें उस दिन ठंडी होंगी और हमारे लिए गवाही देंगी। याद रखिए, जो लोग दुनिया में अल्लाह के आगे झुके, उन्हें उस दिन इज़्ज़त मिलेगी; और जो सरकश रहे, उनकी आँखें उस दिन ज़िल्लत से झुक जाएँगी। आओ, हम अपनी आँखों को उस चीज़ के लिए बचाएँ जो अल्लाह को पसंद है, ताकि उस दिन हमारा चेहरा रौशन हो और हमारी आँखें खुशी से भरी हों।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — अन-नाज़ियात

7تَتْبَعُهَا الرَّادِفَةُ
जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा
8قُلُوبٌ يَوْمَئِذٍ وَاجِفَةٌ
उस दिन दिलों को धड़कन होगी
9أَبْصَارُهَا خَاشِعَةٌ
उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी
10يَقُولُونَ أَإِنَّا لَمَرْدُودُونَ فِي الْحَافِرَةِ
कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे
11أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا نَّخِرَةً
क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 9

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Tuesday, August 18, 2026

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