Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحَافِرَةِ (अल-हाफ़िरा): इसका अर्थ है "शुरुआत की अवस्था" या "पहली हालत"। यानी मृत्यु से पहले की ज़िंदगी, जब इंसान इस धरती पर जीवित था। कहा जाता है कि जो चीज़ शुरू होती है उसे "हाफ़िरा" कहते हैं, क्योंकि यह अपनी शुरुआत की ओर लौटती है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयत उन काफ़िरों और मुनकिरों के बारे में है जो क़ियामत के दिन और दोबारा जीवित होने को नहीं मानते थे। वे मज़ाक़ और अंदाज़ में कहते थे: "क्या सच में हम मरने के बाद दोबारा उसी पहली ज़िंदगी में लौटाए जाएँगे? क्या हम फिर से उसी धरती पर जीवित होंगे?" वे इस बात को नामुमकिन और बेतुका समझते थे, और इसे हँसी-मज़ाक़ का विषय बनाते थे। उनका कहना था कि जब हम मरकर खाक और हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हमें फिर से ज़िंदा किया जाएगा? उन्होंने इसे एक असंभव बात करार दिया और कहा कि अगर ऐसा होगा तो यह बिल्कुल बेकार और झूठी वापसी होगी।
यह आयत उन लोगों के इनकार और उपहास को बयान करती है, जो आख़िरत पर विश्वास नहीं करते। वे अपनी समझ में इस बात को असंभव मानते हैं कि इंसान मरने के बाद फिर से जीवित होकर अपने कर्मों का हिसाब देगा। लेकिन अल्लाह तआला ने इसका जवाब आगे की आयात में दिया है कि जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत है। जो अल्लाह पहली बार पैदा कर सकता है, वह दोबारा क्यों नहीं पैदा कर सकता? ये दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है, और असली ज़िंदगी आख़िरत की है। जो लोग इस पर हँसते हैं और मज़ाक़ उड़ाते हैं, वही लोग उस दिन पछताएँगे जब उन्हें अपने कर्मों का सामना करना होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर अमल करें, और उस दिन के लिए तैयारी करें जब हम सब उसके सामने हाज़िर होंगे। यक़ीन मानिए, ये ज़िंदगी आज़माइश है, और अगली ज़िंदगी हमेशा की है — वहाँ सफलता उन्हीं को मिलेगी जो अल्लाह पर ईमान लाए और नेक अमल करें।
📜 आयत 8-12 — सूरा अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 10
सूरा अन-नाज़ियात आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की…सूरा आयत 10/46 — सूरा अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नाज़ियात सुनें, सूरा अन-नाज़ियात अनुवाद, सूरा अन-नाज़ियात mp3, सूरा अन-नाज़ियात pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अन-नाज़ियात
पवित्र क़ुरआन
Sunday, October 18, 2026
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