अल-अनफाल · 40/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
وَإِن تَوَلَّوْا فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَوْلَاكُمْ ۚ نِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ ۝٤٠
Wa in tawallaw fa`lamooo annal laaha mawlaakum; ni`mal mawlaa wa ni`man naseer
📖 हिंदी अर्थ
और अगर सरताबी करें तो (मुसलमानों) समझ लो कि ख़ुदा यक़ीनी तुम्हारा मालिक है और वह क्या अच्छा मालिक है और क्या अच्छा मददगार है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَلَّوْا: मुँह मोड़ लें, अर्थात ईमान लाने और आज्ञा मानने से इनकार कर दें।
  • مَوْلَاكُمْ: तुम्हारा संरक्षक, सहायक और मददगार।
  • نِعْمَ الْمَوْلَى: कितना अच्छा संरक्षक है (वह)।
  • نِعْمَ النَّصِيرُ: कितना अच्छा सहायक है (वह)।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे ईमानवालो! यदि ये मुशरिकीन तुम्हारी दावत (ईमान और इस्लाम की ओर बुलाने) से मुँह मोड़ लें, और कुफ़्र, शिर्क तथा अल्लाह के मार्ग से रोकने पर अड़े रहें, और तुमसे लड़ने का इरादा करें, तो तुम घबराओ मत और निराश मत होओ। बल्कि तुम पक्का यक़ीन रखो कि अल्लाह तुम्हारा संरक्षक और सहायक है। वही तुम्हारी हिफ़ाज़त करने वाला और तुम्हारे दुश्मनों पर तुम्हें विजय दिलाने वाला है। वह कितना उत्तम संरक्षक है जो अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, और कितना उत्तम सहायक है जो अपने मददगारों को कभी हारने नहीं देता। जो अल्लाह से दोस्ती रखता है, वह कभी नाकाम नहीं होता, और जो उसकी मदद पर भरोसा करता है, वह कभी पराजित नहीं होता।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुसलमानों की असली ताक़त अल्लाह पर भरोसा और उसकी मदद पर यक़ीन है, न कि सिर्फ़ अपनी तादाद या हथियारों पर।
  2. अल्लाह अपने ईमानवाले बंदों का संरक्षक है; यह बात मोमिन के दिल में इत्मीनान और सुकून पैदा करती है कि चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर हों, अल्लाह की मदद उसके साथ है।
  3. यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि जब वे अल्लाह के दीन की ख़ातिर जिहाद करें, तो अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा और उनकी मदद करेगा।
  4. इससे यह भी पता चलता है कि अल्लाह से वफ़ादारी और उसकी राह पर चलने वालों के लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी है, और यही सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी है।


📜 आयत 38-42 — सूरा अल-अनफाल

38قُل لِّلَّذِينَ كَفَرُوا إِن يَنتَهُوا يُغْفَرْ لَهُم مَّا قَدْ سَلَفَ وَإِن يَعُودُوا فَقَدْ مَضَتْ سُنَّتُ الْأَوَّلِينَ
(ऐ रसूल) तुम काफिरों से कह दो कि अगर वह लोग (अब भी अपनी शरारत से) बाज़ रहें तो उनके पिछले कुसूर माफ कर दिए जाएं और अगर फिर कहीं पलटें तो यक़ीनन अगलों के तरीक़े गुज़र चुके जो, उनकी सज़ा हुई वही इनकी भी होगी
39وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
मुसलमानों काफ़िरों से लड़े जाओ यहाँ तक कि कोई फसाद (बाक़ी) न रहे और (बिल्कुल सारी ख़ुदाई में) ख़ुदा की दीन ही दीन हो जाए फिर अगर ये लोग (फ़साद से) न बाज़ आएं तो ख़ुदा उनकी कारवाइयों को ख़ूब देखता है
40وَإِن تَوَلَّوْا فَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ مَوْلَاكُمْ ۚ نِعْمَ الْمَوْلَىٰ وَنِعْمَ النَّصِيرُ
और अगर सरताबी करें तो (मुसलमानों) समझ लो कि ख़ुदा यक़ीनी तुम्हारा मालिक है और वह क्या अच्छा मालिक है और क्या अच्छा मददगार है
41۞ وَاعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُم مِّن شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ إِن كُنتُمْ آمَنتُم بِاللَّهِ وَمَا أَنزَلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا يَوْمَ الْفُرْقَانِ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
और जान लो कि जो कुछ तुम (माल लड़कर) लूटो तो उनमें का पॉचवॉ हिस्सा मख़सूस ख़ुदा और रसूल और (रसूल के) क़राबतदारों और यतीमों और मिस्कीनों और परदेसियों का है अगर तुम ख़ुदा पर और उस (ग़ैबी इमदाद) पर ईमान ला चुके हो जो हमने ख़ास बन्दे (मोहम्मद) पर फ़ैसले के दिन (जंग बदर में) नाज़िल की थी जिस दिन (मुसलमानों और काफिरों की) दो जमाअतें बाहम गुथ गयी थी और ख़ुदा तो हर चीज़ पर क़ादिर है
42إِذْ أَنتُم بِالْعُدْوَةِ الدُّنْيَا وَهُم بِالْعُدْوَةِ الْقُصْوَىٰ وَالرَّكْبُ أَسْفَلَ مِنكُمْ ۚ وَلَوْ تَوَاعَدتُّمْ لَاخْتَلَفْتُمْ فِي الْمِيعَادِ ۙ وَلَٰكِن لِّيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا لِّيَهْلِكَ مَنْ هَلَكَ عَن بَيِّنَةٍ وَيَحْيَىٰ مَنْ حَيَّ عَن بَيِّنَةٍ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَسَمِيعٌ عَلِيمٌ
(ये वह वक्त था) जब तुम (मैदाने जंग में मदीने के) क़रीब नाके पर थे और वह कुफ्फ़ार बईद (दूर के) के नाके पर और (काफ़िले के) सवार तुम से नशेब में थे और अगर तुम एक दूसरे से (वक्त क़ी तक़रीर का) वायदा कर लेते हो तो और वक्त पर गड़बड़ कर देते मगर (ख़ुदा ने अचानक तुम लोगों को इकट्ठा कर दिया ताकि जो बात यदनी (होनी) थी वह पूरी कर दिखाए ताकि जो शख़्स हलाक (गुमराह) हो वह (हक़ की) हुज्जत तमाम होने के बाद हलाक हो और जो ज़िन्दा रहे वह हिदायत की हुज्जत तमाम होने के बाद ज़िन्दा रहे और ख़ुदा यक़ीनी सुनने वाला ख़बरदार है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
40आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 40

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Tuesday, September 29, 2026

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