अल-इनशिक़ाक · 25/25
अनुवाद उच्चारण — अल-इनशिक़ाक
إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ ۝٢٥
Illal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati lahum ajrun ghairu mamnoon
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • غَيْرُ مَمْنُونٍ: ऐसा बदला जो कभी खत्म न हो, न कटे, न घटे, और न ही उसमें कोई एहसान जताया जाए।

तफसीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने ईमान लाया और नेक अमल किए—यानी अपने दिल से अल्लाह और उसके रसूल को माना और अपने अमल को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाया—उनके लिए ऐसा अज्र (बदला) है जो कभी खत्म नहीं होगा। यह अज्र जन्नत है, जो हमेशा रहने वाली है, और अल्लाह की तरफ से मिलने वाला यह इनाम न कभी घटेगा, न कटेगा, और न ही उसमें कोई कमी आएगी।

यहाँ अल्लाह तआला उन लोगों के लिए खुशखबरी दे रहा है जो कुफ्र और इनकार से बचकर ईमान लाए और अपने जीवन को अच्छे कामों से सजाया। उनके लिए वह इनाम है जिसकी कोई अंत नहीं, और न ही उस पर कोई एहसान जताया जाएगा। यह अल्लाह का फज़ल है जो वह अपने नेक बंदों को देगा, और यह उनके लिए हमेशा की खुशी और सुकून का ज़रिया होगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला की रहमत और इनाम का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो ईमान लाए और नेक अमल करे। चाहे इंसान ने पहले कितनी भी गलतियाँ की हों, अगर वह सच्चे दिल से तौबा करके अल्लाह की तरफ लौट आए और अच्छे काम करने लगे, तो अल्लाह उसे माफ कर देता है और उसे ऐसा इनाम देता है जो कभी खत्म नहीं होता। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह का इनाम असीमित है, और उसकी रहमत से कोई निराश नहीं होना चाहिए। आओ, हम सब अपने जीवन को ईमान और नेक अमल से सजाएँ, ताकि हम भी उस अज्र-ए-गैर-ममनून (कभी न खत्म होने वाले इनाम) के हक़दार बन सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-25 — अल-इनशिक़ाक

23وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
और जो बातें ये लोग अपने दिलों में छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
24فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
25إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)
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अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 25

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Tuesday, August 18, 2026

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