अल-इनशिक़ाक · 24/25
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इनशिक़ाक
فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ ۝٢٤
Fabashshirhum bi`azaabin aleem
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَبَشِّرْهُمْ: उन्हें ख़ुशख़बरी दो (यहाँ व्यंग्य और ताने के रूप में प्रयोग हुआ है)।
  • بِعَذَابٍ أَلِيمٍ: दर्दनाक और बहुत ही तकलीफ़देह अज़ाब (यातना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब ये सारी निशानियाँ और सबूत सामने आ चुके हैं, आसमान फटने का, ज़मीन के बिछाए जाने का, सितारों के झड़ जाने का और इंसान के अपने रब के सामने हाज़िर होने का — फिर भी ये काफ़िर लोग क़ुरआन सुनकर सजदा नहीं करते और न ही उस पर ईमान लाते हैं। उनकी आदत ही झुठलाने और हक़ से मुँह मोड़ने की बन चुकी है। अल्लाह उनके दिलों के हाल को खूब जानता है — वो जानता है कि वे अंदर ही अंदर जानते हैं कि ये क़ुरआन हक़ है, लेकिन सरकशी और हठधर्मी की वजह से इसे कबूल नहीं करते।

तो ऐ नबी! आप उन्हें ख़ुशख़बरी सुनाओ — मगर कैसी ख़ुशख़बरी? उस अज़ाब की जो बहुत ही दर्दनाक और तकलीफ़देह होगा। ये उनके लिए तैयार किया गया है, जिसमें वे हमेशा रहेंगे। ये ख़ुशख़बरी उनके लिए मज़ाक़ और ताने के रूप में है, क्योंकि वे दुनिया में हँसी-मज़ाक़ करते थे, तो अल्लाह ने उन्हें उस अज़ाब की ख़बर दी जो उनके इंतज़ार में है।

लेकिन जो लोग ईमान लाए, अच्छे काम किए और अल्लाह के हुक्मों पर अमल किया — उनके लिए ऐसा अज्र (इनाम) है जो कभी ख़त्म नहीं होगा और न ही कम किया जाएगा। यही असली कामयाबी है।

दावती पहलू:

ये आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि इंसान अपनी ज़िद और हठधर्मी की वजह से कितना बड़ा नुक़सान उठा सकता है। अल्लाह ने हमें अक़्ल दी, क़ुरआन दिया, रसूल भेजे — सब कुछ हमारी हिदायत के लिए। जो इन नेअमतों से फ़ायदा नहीं उठाता, वो सिर्फ़ अपना नुक़सान करता है। आज हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को खोलकर पढ़ें, उस पर ग़ौर करें और उस पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी की चाबी है। अल्लाह हमें हक़ समझने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 22-25 — सूरा अल-इनशिक़ाक

22بَلِ الَّذِينَ كَفَرُوا يُكَذِّبُونَ
बल्कि काफ़िर लोग तो (और उसे) झुठलाते हैं
23وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
और जो बातें ये लोग अपने दिलों में छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
24فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
25إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍ
मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)
अल-इनशिक़ाककुरान सूची
25आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अल-इनशिक़ाक 24

सूरा अल-इनशिक़ाक आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो

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Thursday, October 1, 2026

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