अल-बुरूज · 9/22
अनुवाद उच्चारण — अल-बुरूज
الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ ۝٩
Allazee lahoo mulkus samaawaati wal ard; wallaahu `alaa kulli shai `in Shaheed
📖 हिंदी अर्थ
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुल्कुस्समावाति वल अर्द: आकाशों और धरती का स्वामित्व और राज्य।
  • शहीद: हर चीज़ पर गवाह, देखने-जानने वाला, जिससे कोई चीज़ छिपी न हो।

तफ़सीर:

यह आयत उस महान सत्ता का वर्णन कर रही है जो सारे जहान की मालिक है। अल्लाह ही है जिसके हाथ में आकाशों और धरती का पूरा राज्य है। वही उन्हें पैदा करने वाला, उन्हें चलाने वाला और उन पर पूर्ण अधिकार रखने वाला है। उसकी सल्तनत में कोई साझीदार नहीं, कोई उसका मुक़ाबला नहीं कर सकता।

और वही अल्लाह हर चीज़ पर शहीद (गवाह) है। यानी उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है — न छोटी, न बड़ी, न ज़मीन के अंदर की, न आसमान के ऊपर की। वह अपने बंदों के हर अमल को देखता है, हर नीयत को जानता है, हर बात को सुनता है। चाहे कोई अच्छा काम करे या बुरा, चाहे छुपकर करे या खुलकर — सब कुछ उसके इल्म में है और वह उस पर गवाह है।

इस आयत में उन ज़ालिमों के लिए बड़ी चेतावनी है जिन्होंने मोमिनों को अल्लाह पर ईमान लाने की वजह से अत्याचारों का शिकार बनाया, उन्हें आग के गड्ढों में डाला और उन्हें बेरहमी से तड़पाया। उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि जिस अल्लाह के लिए तुम मोमिनों को सज़ा दे रहे हो, वही सारे जहान का मालिक है और वह तुम्हारे हर ज़ुल्म को देख रहा है। तुम्हारे किए की सज़ा उससे छिपी नहीं है।

साथ ही, यह मोमिनों के लिए बशारत (खुशखबरी) है कि तुम्हारे सब्र और ईमान की क़ीमत अल्लाह के पास महफूज़ है। वह तुम्हारे साथ हुए ज़ुल्म का गवाह है और उसका इन्साफ़ कभी ज़ाया नहीं होता। जिस दिन वह अपना फैसला सुनाएगा, ज़ालिम अपने किए की सज़ा पाएगा और मोमिन अपने सब्र का अज्र पाएगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमें यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है और हमारे अच्छे-बुरे सभी कर्म उसके इल्म में हैं, तो हमें कभी बुराई की तरफ़ नहीं जाना चाहिए। और जब हम पर कोई ज़ुल्म हो, तो हमें यक़ीन होना चाहिए कि अल्लाह उसे देख रहा है और वह इन्साफ़ करने वाला है। यही ईमान की ताक़त है — यह जानना कि इस दुनिया की सारी ताक़तें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अल्लाह की ताक़त से बड़ी नहीं हो सकतीं। वही सबसे बड़ा मालिक है, वही सबसे बड़ा गवाह है, और उसका फैसला सबसे बेहतरीन है।



📜 आयत 7-11 — अल-बुरूज

7وَهُمْ عَلَىٰ مَا يَفْعَلُونَ بِالْمُؤْمِنِينَ شُهُودٌ
जब वह उन (ख़न्दक़ों) पर बैठे हुए और जो सुलूक ईमानदारों के साथ करते थे उसको सामने देख रहे थे
8وَمَا نَقَمُوا مِنْهُمْ إِلَّا أَن يُؤْمِنُوا بِاللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَمِيدِ
और उनको मोमिनीन की यही बात बुरी मालूम हुई कि वह लोग ख़ुदा पर ईमान लाए थे जो ज़बरदस्त और सज़ावार हम्द है
9الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
वह (ख़ुदा) जिसकी सारे आसमान ज़मीन में बादशाहत है और ख़ुदा हर चीज़ से वाक़िफ़ है
10إِنَّ الَّذِينَ فَتَنُوا الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ ثُمَّ لَمْ يَتُوبُوا فَلَهُمْ عَذَابُ جَهَنَّمَ وَلَهُمْ عَذَابُ الْحَرِيقِ
बेशक जिन लोगों ने ईमानदार मर्दों और औरतों को तकलीफें दीं फिर तौबा न की उनके लिए जहन्नुम का अज़ाब तो है ही (इसके अलावा) जलने का भी अज़ाब होगा
11إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَهُمْ جَنَّاتٌ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْكَبِيرُ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे उनके लिए वह बाग़ात हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं यही तो बड़ी कामयाबी है
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अनुवाद — अल-बुरूज 9

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Tuesday, August 18, 2026

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