Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَلُونَكُم (यलूनकुम): तुम्हारे सबसे निकट हों, तुमसे मिले हुए हों।
- غِلْظَةً (ग़िल्ज़ा): कठोरता, सख़्ती और शिद्दत।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमानवालों! अल्लाह तआला तुम्हें आदेश देता है कि कुफ्फ़ार में से उन लोगों से जिहाद करो जो तुम्हारे सबसे नज़दीक हैं, यानी तुम्हारे पड़ोस और आस-पास के काफ़िर। यह आदेश इसलिए है कि जो दुश्मन तुम्हारे सबसे करीब होता है, वही तुम्हारे लिए सबसे बड़ा ख़तरा होता है, क्योंकि उसका हमला अचानक और तेज़ होता है। इसलिए पहले उन्हीं से निपटो, फिर दूर वालों की बारी आएगी। साथ ही अल्लाह तुम्हें यह भी सिखाता है कि उन काफ़िरों को तुममें सख़्ती, कठोरता और शक्ति का एहसास होना चाहिए, ताकि वे तुम पर हमला करने की जुर्रत न कर सकें और तुम्हारे दुश्मनों के दिलों में तुम्हारा रोब बना रहे। यह सख़्ती और शिद्दत उनके ख़िलाफ़ होनी चाहिए, न कि मुसलमानों के आपसी मामलों में। और याद रखो कि अल्लाह तआला उन्हीं लोगों के साथ होता है जो उससे डरते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी नापसंदीदा चीज़ों से बचते हैं। जिसके साथ अल्लाह हो, उसे कभी हार नहीं सकती, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दुश्मन से निपटने में समझदारी और हिकमत की ज़रूरत है — पहले निकटतम ख़तरे को ख़त्म करना चाहिए, फिर दूर वालों की तरफ़ ध्यान देना चाहिए। यह एक फ़ितरती और अक्लमंदाना उसूल है जो हर मुसलमान के काम आ सकता है।
- मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने दुश्मनों के सामने कमज़ोरी न दिखाएँ, बल्कि अपनी ताक़त, हिम्मत और सख़्ती का इज़हार करें, ताकि दुश्मन उनसे डरे और उनकी इज़्ज़त करे। यह इस्लाम की सिखाई हुई एक बेहतरीन रणनीति है।
- इस आयत में अल्लाह के साथ होने की ख़ुशख़बरी सिर्फ़ उन्हीं के लिए है जो परहेज़गार हैं। यानी तक़वा (अल्लाह का डर) ही असली ताक़त है — जिसके पास तक़वा है, अल्लाह उसका साथी है, और अल्लाह का साथी कभी अकेला और कमज़ोर नहीं होता। यह बात हर मुसलमान के दिल को तसल्ली देती है कि अगर वह अल्लाह से डरता है और उसकी इताअत करता है, तो अल्लाह उसकी हिफ़ाज़त और मदद करेगा।
📜 आयत 121-125 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 123
सूरा अत-तौबा आयत 123 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों कुफ्फार में से जो लोग तुम्हारे आस पास…सूरा आयत 123/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 121–125. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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