अत-तौबा · 14/129
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तौबा
قَاتِلُوهُمْ يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ بِأَيْدِيكُمْ وَيُخْزِهِمْ وَيَنصُرْكُمْ عَلَيْهِمْ وَيَشْفِ صُدُورَ قَوْمٍ مُّؤْمِنِينَ ۝١٤
Qaatiloohum yu`az zibhumul laahu bi aideekum wa yukhzihim wa yansurkum `alaihim wa yashfi sudoora qawmim mu `mineen
📖 हिंदी अर्थ
इनसे (बेख़ौफ (ख़तर) लड़ो ख़ुदा तुम्हारे हाथों उनकी सज़ा करेगा और उन्हें रूसवा करेगा और तुम्हें उन पर फतेह अता करेगा और ईमानदार लोगों के कलेजे ठन्डे करेगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ: अल्लाह उन्हें यातना देगा।
  • وَيُخْزِهِمْ: और उन्हें अपमानित करेगा, उन्हें ज़िल्लत में डालेगा।
  • وَيَشْفِ صُدُورَ: और सीने ठीक कर देगा (दिलों का दर्द दूर करेगा)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालो! इन मुशरिकों से जिहाद करो। अगर तुम ऐसा करोगे तो अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत से उन्हें तुम्हारे हाथों यातना देगा, यानी तुम्हारे ज़रिए उन्हें क़त्ल, क़ैद और शिकस्त का मज़ा चखाएगा। वह उन्हें रुसवा करेगा और उनकी शिकस्त और अपमान के ज़रिए उन्हें ज़िल्लत में डालेगा। साथ ही वह तुम्हें उन पर ग़लबा और फ़तह अता करेगा। और जो मोमिनीन उस वक़्त जंग के मैदान में मौजूद नहीं हैं, उनके दिलों का दर्द और ग़म भी अल्लाह दूर करेगा, क्योंकि इन मुशरिकों की शरारतों और साज़िशों से उनके दिलों में जो ग़म और ग़ुस्सा था, वह इनकी शिकस्त और ज़िल्लत से दूर हो जाएगा। अल्लाह जिसे चाहता है, उसकी तौबा क़बूल करता है, और वह अपने बंदों के हाल को खूब जानता है और अपने फ़ैसलों में हिकमत वाला है।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि जिहाद और अल्लाह के दुश्मनों के ख़िलाफ़ क़दम उठाने से अल्लाह की मदद और नुसरत हासिल होती है।
  2. अल्लाह तआला अपने बंदों के ज़रिए अपने दुश्मनों को सज़ा देता है, यह मोमिनीन के लिए एक बड़ा शरफ़ है कि वे अल्लाह के हाथ का ज़रिया बनते हैं।
  3. मुसलमानों की जीत और दुश्मनों की शिकस्त से मोमिनीन के दिलों को सुकून और शिफ़ा मिलती है, और यह अल्लाह की रहमत है।
  4. अल्लाह तआला तौबा क़बूल करने वाला है, चाहे दुश्मन कितना ही बड़ा गुनाहगार क्यों न हो, अगर वह सच्चे दिल से तौबा करे तो अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत की वसीअत को दर्शाता है।


📜 आयत 12-16 — सूरा अत-तौबा

12وَإِن نَّكَثُوا أَيْمَانَهُم مِّن بَعْدِ عَهْدِهِمْ وَطَعَنُوا فِي دِينِكُمْ فَقَاتِلُوا أَئِمَّةَ الْكُفْرِ ۙ إِنَّهُمْ لَا أَيْمَانَ لَهُمْ لَعَلَّهُمْ يَنتَهُونَ
और अगर ये लोग एहद कर चुकने के बाद अपनी क़समें तोड़ डालें और तुम्हारे दीन में तुमको ताना दें तो तुम कुफ्र के सरवर आवारा लोगों से खूब लड़ाई करो उनकी क़समें का हरगिज़ कोई एतबार नहीं ताकि ये लोग (अपनी शरारत से) बाज़ आएँ
13أَلَا تُقَاتِلُونَ قَوْمًا نَّكَثُوا أَيْمَانَهُمْ وَهَمُّوا بِإِخْرَاجِ الرَّسُولِ وَهُم بَدَءُوكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ ۚ أَتَخْشَوْنَهُمْ ۚ فَاللَّهُ أَحَقُّ أَن تَخْشَوْهُ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
(मुसलमानों) भला तुम उन लोगों से क्यों नहीं लड़ते जिन्होंने अपनी क़समों को तोड़ डाला और रसूल को निकाल बाहर करना (अपने दिल में) ठान लिया था और तुमसे पहले छेड़ भी उन्होनें ही शुरू की थी क्या तुम उनसे डरते हो तो अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा उनसे कहीं बढ़ कर तुम्हारे डरने के क़ाबिल है
14قَاتِلُوهُمْ يُعَذِّبْهُمُ اللَّهُ بِأَيْدِيكُمْ وَيُخْزِهِمْ وَيَنصُرْكُمْ عَلَيْهِمْ وَيَشْفِ صُدُورَ قَوْمٍ مُّؤْمِنِينَ
इनसे (बेख़ौफ (ख़तर) लड़ो ख़ुदा तुम्हारे हाथों उनकी सज़ा करेगा और उन्हें रूसवा करेगा और तुम्हें उन पर फतेह अता करेगा और ईमानदार लोगों के कलेजे ठन्डे करेगा
15وَيُذْهِبْ غَيْظَ قُلُوبِهِمْ ۗ وَيَتُوبُ اللَّهُ عَلَىٰ مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और उन मोनिनीन के दिल की क़ुदरतें जो (कुफ्फ़ार से पहुचॅती है) दफ़ा कर देगा और ख़ुदा जिसकी चाहे तौबा क़ुबूल करे और ख़ुदा बड़ा वाक़िफकार (और) हिकमत वाला है
16أَمْ حَسِبْتُمْ أَن تُتْرَكُوا وَلَمَّا يَعْلَمِ اللَّهُ الَّذِينَ جَاهَدُوا مِنكُمْ وَلَمْ يَتَّخِذُوا مِن دُونِ اللَّهِ وَلَا رَسُولِهِ وَلَا الْمُؤْمِنِينَ وَلِيجَةً ۚ وَاللَّهُ خَبِيرٌ بِمَا تَعْمَلُونَ
क्या तुमने ये समझ लिया है कि तुम (यूं ही) छोड़ दिए जाओगे और अभी तक तो ख़ुदा ने उन लोगों को मुमताज़ किया ही नहीं जो तुम में के (राहे ख़ुदा में) जिहाद करते हैं और ख़ुदा और उसके रसूल और मोमेनीन के सिवा किसी को अपना राज़दार दोस्त नहीं बनाते और जो कुछ भी तुम करते हो ख़ुदा उससे बाख़बर है
अत-तौबाकुरान सूची
129आयत
मदनीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — अत-तौबा 14

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Wednesday, September 30, 2026

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