अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- نَفَقَاتُهُمْ: उनके खर्च (दान)
- كُسَالَى: आलसी, सुस्त, बोझ समझकर
- كَارِهُونَ: नापसंद करने वाले, अनिच्छा से
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के उस हाल का वर्णन कर रहा है जिसके कारण उनके दान और खर्च कभी स्वीकार नहीं होते। उनके दान अस्वीकार होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के साथ कुफ़्र किया — यानी उन्होंने अल्लाह को नहीं माना और उसके पैग़म्बर को झुठलाया। ईमान ही वह बुनियाद है जिस पर हर नेक अमल की क़बूलियत टिकी होती है; जब यही बुनियाद ही न हो, तो ऊपर बनी कोई भी इमारत क़बूल नहीं हो सकती।
इसके अलावा, जब वे नमाज़ के लिए आते हैं तो बड़ी सुस्ती और आलस के साथ आते हैं — जैसे उन पर कोई बोझ लाद दिया गया हो। वे नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं मानते, बल्कि एक मजबूरी समझते हैं जिसे उन्हें निभाना पड़ता है। उनके दिलों में नमाज़ की कोई अहमियत नहीं, न उन्हें इसका कोई सवाब चाहिए और न छोड़ने का कोई डर।
इसी तरह, जब वे खर्च करते हैं (ज़कात या दान) तो उसे इस तरह करते हैं जैसे उनसे कुछ छीना जा रहा हो। वे इसे नुक़सान समझते हैं और रोकने को फ़ायदा। उनका खर्च किसी नेक नीयत से नहीं होता, बल्कि लोगों को दिखाने या किसी दबाव में आकर होता है। इसलिए उनका यह खर्च भी अल्लाह के यहाँ क़बूल नहीं होता, क्योंकि अल्लाह तो सिर्फ़ उन्हीं लोगों का अमल क़बूल करता है जो उस पर ईमान रखते हैं और खुशी से उसकी इबादत करते हैं।
फ़ायदे और सबक:
- ईमान हर नेक अमल की क़बूलियत की शर्त है। बिना ईमान के कोई भी अमल अल्लाह के यहाँ स्वीकार नहीं होता, चाहे वह कितना ही बड़ा क्यों न हो।
- नमाज़ में आलस और सुस्ती मुनाफ़िक़ों की निशानी है। मोमिन की पहचान यह है कि वह नमाज़ को शौक़ और खुशी से अदा करता है, क्योंकि वह जानता है कि यह अल्लाह से मुलाक़ात का ज़रिया है।
- खर्च करने में नापसंदगी और कंजूसी भी कमज़ोर ईमान की दलील है। मोमिन अल्लाह की राह में खुशी-खुशी खर्च करता है, क्योंकि उसे यक़ीन है कि अल्लाह उसे बदले में और ज़्यादा देगा।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अमल की क़ीमत उसकी नीयत पर है। जो काम अल्लाह के लिए नहीं होता, वह दिखावा है और दिखावा अल्लाह के यहाँ कभी क़बूल नहीं होता।
- मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दिल की हालत हमेशा जाँचता रहे — क्या वह नमाज़ को प्यार से पढ़ता है या बोझ समझकर? क्या वह खर्च करते वक़्त खुश है या दुखी? यही उसके ईमान की कसौटी है।
📜 आयत 52-56 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 54
सूरा अत-तौबा आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनकी ख़ैरात के क़ुबूल किए जाने में और कोई…सूरा आयत 54/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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