अत-तौबा · 55/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
فَلَا تُعْجِبْكَ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُمْ ۚ إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَتَزْهَقَ أَنفُسُهُمْ وَهُمْ كَافِرُونَ ۝٥٥
Falaa tu`jibka amwaaluhum wa laaa awlaaduhum; innamaa yureedul laahu liyu`az zibahum bihaa fil hayaatid dunyaa wa tazhaqa anfusuhum wa hum kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम को न तो उनके माल हैरत में डाले और न उनकी औलाद (क्योंकि) ख़ुदा तो ये चाहता है कि उनको आल व माल की वजह से दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी (ही) में मुबितलाए अज़ाब करे और जब उनकी जानें निकलें तब भी वह काफिर (के काफिर ही) रहें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَلَا تُعْجِبْكَ — तुम्हें आश्चर्यचकित न करें, तुम्हारे मन में उनके प्रति आकर्षण पैदा न हो।
  • أَمْوَالُهُمْ — उनके धन-दौलत।
  • وَلَا أَوْلَادُهُمْ — और न ही उनकी संतानें।
  • لِيُعَذِّبَهُم بِهَا — उन्हें इन (धन और संतान) के माध्यम से यातना देना।
  • وَتَزْهَقَ — और निकल जाए (रूख्सत हो जाए)।
  • أَنفُسُهُمْ — उनकी आत्माएँ।
  • وَهُمْ كَافِرُونَ — जबकि वे काफ़िर (इनकार करने वाले) हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के धन और उनकी संतानों को देखकर तुम आश्चर्यचकित न होना, और न ही उन्हें अपनी नज़रों में अच्छा समझना। ये चीज़ें उनके लिए कोई सम्मान या बड़ाई नहीं हैं, बल्कि इनका अंजाम बहुत बुरा है। अल्लाह तआला अपनी इच्छा से इन्हीं धन और संतानों को उनके लिए दुनिया की ज़िंदगी में यातना का ज़रिया बनाता है — वे इन्हें इकट्ठा करने में कठिनाइयाँ और थकान झेलते हैं, इनकी हिफ़ाज़त में मेहनत करते हैं, और इनमें आने वाली मुसीबतों और आफ़तों का सामना करते हैं, जबकि इन सबका उन्हें कोई सवाब (पुण्य) नहीं मिलता क्योंकि वे इसे अल्लाह की राह में नहीं खर्च करते। यहाँ तक कि उनकी आत्माएँ निकल जाती हैं और वे मर जाते हैं, जबकि वे अल्लाह और उसके रसूल के इनकार पर ही डटे रहते हैं। फिर आख़िरत में उन्हें जहन्नुम के सबसे निचले हिस्से में हमेशा की यातना मिलेगी।


फ़ायदे (सीख):

  1. धन और संतान किसी की सच्ची इज़्ज़त का पैमाना नहीं हैं — ये दुनिया की चीज़ें हैं, जो अच्छे और बुरे दोनों को मिलती हैं। असली कामयाबी ईमान और नेक अमल में है।
  2. अल्लाह की ओर से दी गई नेअमतें इम्तिहान हो सकती हैं — जब इंसान इन्हें अल्लाह की नाफ़रमानी में इस्तेमाल करता है, तो यही चीज़ें उसके लिए अज़ाब का सबब बन जाती हैं।
  3. मुनाफ़िक़ों के हाल से सबक़ — उनकी ज़ाहिरी कामयाबी देखकर मुसलमानों को रंज या हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उनका अंजाम बुरा है।
  4. मौत पर ईमान की हालत में आना सबसे बड़ी नेअमत है — आख़िरी साँस तक ईमान पर क़ायम रहना ही असली कामयाबी है, और कुफ़्र की हालत में मरना सबसे बड़ी नाकामी।
  5. दुनिया की मुसीबतें गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन सकती हैं — मोमिन के लिए, लेकिन काफ़िर के लिए ये सिर्फ़ अज़ाब हैं, क्योंकि उनमें सब्र और सवाब की नीयत नहीं होती।
🎧 सुनें

📜 आयत 53-57 — अत-तौबा

53قُلْ أَنفِقُوا طَوْعًا أَوْ كَرْهًا لَّن يُتَقَبَّلَ مِنكُمْ ۖ إِنَّكُمْ كُنتُمْ قَوْمًا فَاسِقِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग ख्वाह ख़ुशी से खर्च करो या मजबूरी से तुम्हारी ख़ैरात तो कभी कुबूल की नहीं जाएगी तुम यक़ीनन बदकार लोग हो
54وَمَا مَنَعَهُمْ أَن تُقْبَلَ مِنْهُمْ نَفَقَاتُهُمْ إِلَّا أَنَّهُمْ كَفَرُوا بِاللَّهِ وَبِرَسُولِهِ وَلَا يَأْتُونَ الصَّلَاةَ إِلَّا وَهُمْ كُسَالَىٰ وَلَا يُنفِقُونَ إِلَّا وَهُمْ كَارِهُونَ
और उनकी ख़ैरात के क़ुबूल किए जाने में और कोई वजह मायने नहीं मगर यही कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफ़रमानी की और नमाज़ को आते भी हैं तो अलकसाए हुए और ख़ुदा की राह में खर्च करते भी हैं तो बे दिली से
55فَلَا تُعْجِبْكَ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُمْ ۚ إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُعَذِّبَهُم بِهَا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَتَزْهَقَ أَنفُسُهُمْ وَهُمْ كَافِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम को न तो उनके माल हैरत में डाले और न उनकी औलाद (क्योंकि) ख़ुदा तो ये चाहता है कि उनको आल व माल की वजह से दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी (ही) में मुबितलाए अज़ाब करे और जब उनकी जानें निकलें तब भी वह काफिर (के काफिर ही) रहें
56وَيَحْلِفُونَ بِاللَّهِ إِنَّهُمْ لَمِنكُمْ وَمَا هُم مِّنكُمْ وَلَٰكِنَّهُمْ قَوْمٌ يَفْرَقُونَ
और (मुसलमानों) ये लोग ख़ुदा की क़सम खाएंगे फिर वह तुममें ही के हैं हालॉकि वह लोग तुममें के नहीं हैं मगर हैं ये लोग बुज़दिल हैं
57لَوْ يَجِدُونَ مَلْجَأً أَوْ مَغَارَاتٍ أَوْ مُدَّخَلًا لَّوَلَّوْا إِلَيْهِ وَهُمْ يَجْمَحُونَ
कि गर कहीं ये लोग पनाह की जगह (क़िले) या (छिपने के लिए) ग़ार या घुस बैठने की कोई (और) जगह पा जाए तो उसी तरफ रस्सियाँ तोड़ाते हुए भाग जाएँ
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अनुवाद — अत-तौबा 55

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Tuesday, August 18, 2026

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