Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سِرَّهُمْ (उनका भेद): वह बात जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं।
- نَجْوَاهُمْ (उनकी सरगोशी): वह गुप्त बातचीत जो वे आपस में कानाफूसी करके करते हैं।
- عَلَّامُ الْغُيُوبِ (छिपी हुई बातों का सबसे बड़ा जानने वाला): अल्लाह हर उस चीज़ को जानता है जो आँखों से छिपी हो, चाहे वह दिल में हो या ब्रह्मांड के किसी कोने में।
तफसीर (व्याख्या):
क्या इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) को यह नहीं मालूम कि अल्लाह उनके दिलों के भेदों को और उनकी गुप्त बैठकों की सरगोशी को पूरी तरह जानता है? वे जो भी चालें चलते हैं, जो भी बुरी योजनाएँ बनाते हैं, और जो कुछ भी वे अपने सीने में छिपाते हैं — अल्लाह उस सब से पूरी तरह अवगत है। वह हर उस चीज़ का जानने वाला है जो छिपी हुई है, चाहे वह ज़मीन की गहराइयों में हो या आसमान की बुलंदियों में, चाहे वह दिल के किसी कोने में हो या किसी की ज़ुबान पर। उससे कोई भी बात छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। यह आयत मुनाफ़िक़ों को चेतावनी दे रही है कि उनकी साज़िशें और गुप्त बातें अल्लाह से छिपी नहीं हैं, और वह उन्हें उनके किए का पूरा-पूरा बदला देगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह हमारे दिलों के राज़, हमारी गुप्त बातें और हमारी छिपी हुई नीयतें सब कुछ जानता है। यह विश्वास इंसान को अच्छे कामों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
- जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमें हर हाल में देख रहा है और हमारी हर बात सुन रहा है, तो हमारे अंदर अल्लाह का डर पैदा होता है, जो हमें गुनाहों से बचाता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान और अपने दिल दोनों को पाक रखना चाहिए, क्योंकि हमारी हर छिपी बात अल्लाह के सामने खुली है।
- मुनाफ़िक़ी (दिखावा) सबसे बड़ी बुराई है — इंसान को चाहिए कि वह जो अंदर से हो, वही बाहर से दिखाए, क्योंकि अल्लाह सिर्फ़ ज़ाहिर को नहीं, बल्कि बातिन (भीतर) को भी जानता है।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की निगरानी का एहसास हमारे लिए सबसे बड़ी तरबियत (शिक्षा) है — जो इंसान यह समझ ले कि अल्लाह उसे देख रहा है, वह कभी अकेले में भी गुनाह नहीं कर सकता।
📜 आयत 76-80 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 78
सूरा अत-तौबा आयत 78 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या वह लोग इतना भी न जानते थे कि ख़ुदा…सूरा आयत 78/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 76–80. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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