क्या वह लोग इतना भी न जानते थे कि ख़ुदा (उनके) सारे भेद और उनकी सरगोशी (सब कुछ) जानता है और ये कि ग़ैब की बातों से ख़ूब आगाह है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
سِرَّهُمْ (उनका भेद): वह बात जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं।
نَجْوَاهُمْ (उनकी सरगोशी): वह गुप्त बातचीत जो वे आपस में कानाफूसी करके करते हैं।
عَلَّامُ الْغُيُوبِ (छिपी हुई बातों का सबसे बड़ा जानने वाला): अल्लाह हर उस चीज़ को जानता है जो आँखों से छिपी हो, चाहे वह दिल में हो या ब्रह्मांड के किसी कोने में।
तफसीर (व्याख्या):
क्या इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) को यह नहीं मालूम कि अल्लाह उनके दिलों के भेदों को और उनकी गुप्त बैठकों की सरगोशी को पूरी तरह जानता है? वे जो भी चालें चलते हैं, जो भी बुरी योजनाएँ बनाते हैं, और जो कुछ भी वे अपने सीने में छिपाते हैं — अल्लाह उस सब से पूरी तरह अवगत है। वह हर उस चीज़ का जानने वाला है जो छिपी हुई है, चाहे वह ज़मीन की गहराइयों में हो या आसमान की बुलंदियों में, चाहे वह दिल के किसी कोने में हो या किसी की ज़ुबान पर। उससे कोई भी बात छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। यह आयत मुनाफ़िक़ों को चेतावनी दे रही है कि उनकी साज़िशें और गुप्त बातें अल्लाह से छिपी नहीं हैं, और वह उन्हें उनके किए का पूरा-पूरा बदला देगा।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह हमारे दिलों के राज़, हमारी गुप्त बातें और हमारी छिपी हुई नीयतें सब कुछ जानता है। यह विश्वास इंसान को अच्छे कामों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमें हर हाल में देख रहा है और हमारी हर बात सुन रहा है, तो हमारे अंदर अल्लाह का डर पैदा होता है, जो हमें गुनाहों से बचाता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान और अपने दिल दोनों को पाक रखना चाहिए, क्योंकि हमारी हर छिपी बात अल्लाह के सामने खुली है।
मुनाफ़िक़ी (दिखावा) सबसे बड़ी बुराई है — इंसान को चाहिए कि वह जो अंदर से हो, वही बाहर से दिखाए, क्योंकि अल्लाह सिर्फ़ ज़ाहिर को नहीं, बल्कि बातिन (भीतर) को भी जानता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की निगरानी का एहसास हमारे लिए सबसे बड़ी तरबियत (शिक्षा) है — जो इंसान यह समझ ले कि अल्लाह उसे देख रहा है, वह कभी अकेले में भी गुनाह नहीं कर सकता।
फिर उनसे उनके ख़ामयाजे (बदले) में अपनी मुलाक़ात के दिन (क़यामत) तक उनके दिल में (गोया खुद) निफाक डाल दिया इस वजह से उन लोगों ने जो ख़ुदा से वायदा किया था उसके ख़िलाफ किया और इस वजह से कि झूठ बोला करते थे
जो लोग दिल खोलकर ख़ैरात करने वाले मोमिनीन पर (रियाकारी का) और उन मोमिनीन पर जो सिर्फ अपनी शफ़क़क़्त (मेहनत) की मज़दूरी पाते (शेख़ी का) इल्ज़ाम लगाते हैं फिर उनसे मसख़रापन करते तो ख़ुदा भी उन से मसख़रापन करेगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
(ऐ रसूल) ख्वाह तुम उन (मुनाफिक़ों) के लिए मग़फिरत की दुआ मॉगों या उनके लिए मग़फिरत की दुआ न मॉगों (उनके लिए बराबर है) तुम उनके लिए सत्तर बार भी बख्शिस की दुआ मांगोगे तो भी ख़ुदा उनको हरगिज़ न बख्शेगा ये (सज़ा) इस सबब से है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल के साथ कुफ्र किया और ख़ुदा बदकार लोगों को मंज़िलें मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।