अत-तौबा · 78/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
أَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُمْ وَأَنَّ اللَّهَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ ۝٧٨
Alam ya`lamooo annal laaha ya`lamu sirrahum wa najwaahum wa annal laaha `Allaamul Ghuyoob
📖 हिंदी अर्थ
क्या वह लोग इतना भी न जानते थे कि ख़ुदा (उनके) सारे भेद और उनकी सरगोशी (सब कुछ) जानता है और ये कि ग़ैब की बातों से ख़ूब आगाह है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سِرَّهُمْ (उनका भेद): वह बात जो वे अपने दिलों में छिपाते हैं।
  • نَجْوَاهُمْ (उनकी सरगोशी): वह गुप्त बातचीत जो वे आपस में कानाफूसी करके करते हैं।
  • عَلَّامُ الْغُيُوبِ (छिपी हुई बातों का सबसे बड़ा जानने वाला): अल्लाह हर उस चीज़ को जानता है जो आँखों से छिपी हो, चाहे वह दिल में हो या ब्रह्मांड के किसी कोने में।

तफसीर (व्याख्या):

क्या इन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) को यह नहीं मालूम कि अल्लाह उनके दिलों के भेदों को और उनकी गुप्त बैठकों की सरगोशी को पूरी तरह जानता है? वे जो भी चालें चलते हैं, जो भी बुरी योजनाएँ बनाते हैं, और जो कुछ भी वे अपने सीने में छिपाते हैं — अल्लाह उस सब से पूरी तरह अवगत है। वह हर उस चीज़ का जानने वाला है जो छिपी हुई है, चाहे वह ज़मीन की गहराइयों में हो या आसमान की बुलंदियों में, चाहे वह दिल के किसी कोने में हो या किसी की ज़ुबान पर। उससे कोई भी बात छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। यह आयत मुनाफ़िक़ों को चेतावनी दे रही है कि उनकी साज़िशें और गुप्त बातें अल्लाह से छिपी नहीं हैं, और वह उन्हें उनके किए का पूरा-पूरा बदला देगा।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — वह हमारे दिलों के राज़, हमारी गुप्त बातें और हमारी छिपी हुई नीयतें सब कुछ जानता है। यह विश्वास इंसान को अच्छे कामों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
  2. जब हमें यह यक़ीन हो जाए कि अल्लाह हमें हर हाल में देख रहा है और हमारी हर बात सुन रहा है, तो हमारे अंदर अल्लाह का डर पैदा होता है, जो हमें गुनाहों से बचाता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान और अपने दिल दोनों को पाक रखना चाहिए, क्योंकि हमारी हर छिपी बात अल्लाह के सामने खुली है।
  4. मुनाफ़िक़ी (दिखावा) सबसे बड़ी बुराई है — इंसान को चाहिए कि वह जो अंदर से हो, वही बाहर से दिखाए, क्योंकि अल्लाह सिर्फ़ ज़ाहिर को नहीं, बल्कि बातिन (भीतर) को भी जानता है।
  5. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की निगरानी का एहसास हमारे लिए सबसे बड़ी तरबियत (शिक्षा) है — जो इंसान यह समझ ले कि अल्लाह उसे देख रहा है, वह कभी अकेले में भी गुनाह नहीं कर सकता।
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📜 आयत 76-80 — अत-तौबा

76فَلَمَّا آتَاهُم مِّن فَضْلِهِ بَخِلُوا بِهِ وَتَوَلَّوا وَّهُم مُّعْرِضُونَ
तो जब ख़ुदा ने अपने फज़ल (व करम) से उन्हें अता फरमाया-तो लगे उसमें बुख्ल करने और कतराकर मुंह फेरने
77فَأَعْقَبَهُمْ نِفَاقًا فِي قُلُوبِهِمْ إِلَىٰ يَوْمِ يَلْقَوْنَهُ بِمَا أَخْلَفُوا اللَّهَ مَا وَعَدُوهُ وَبِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ
फिर उनसे उनके ख़ामयाजे (बदले) में अपनी मुलाक़ात के दिन (क़यामत) तक उनके दिल में (गोया खुद) निफाक डाल दिया इस वजह से उन लोगों ने जो ख़ुदा से वायदा किया था उसके ख़िलाफ किया और इस वजह से कि झूठ बोला करते थे
78أَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَاهُمْ وَأَنَّ اللَّهَ عَلَّامُ الْغُيُوبِ
क्या वह लोग इतना भी न जानते थे कि ख़ुदा (उनके) सारे भेद और उनकी सरगोशी (सब कुछ) जानता है और ये कि ग़ैब की बातों से ख़ूब आगाह है
79الَّذِينَ يَلْمِزُونَ الْمُطَّوِّعِينَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ فِي الصَّدَقَاتِ وَالَّذِينَ لَا يَجِدُونَ إِلَّا جُهْدَهُمْ فَيَسْخَرُونَ مِنْهُمْ ۙ سَخِرَ اللَّهُ مِنْهُمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
जो लोग दिल खोलकर ख़ैरात करने वाले मोमिनीन पर (रियाकारी का) और उन मोमिनीन पर जो सिर्फ अपनी शफ़क़क़्त (मेहनत) की मज़दूरी पाते (शेख़ी का) इल्ज़ाम लगाते हैं फिर उनसे मसख़रापन करते तो ख़ुदा भी उन से मसख़रापन करेगा और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है
80اسْتَغْفِرْ لَهُمْ أَوْ لَا تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ إِن تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ سَبْعِينَ مَرَّةً فَلَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ ۚ ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ۗ وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْفَاسِقِينَ
(ऐ रसूल) ख्वाह तुम उन (मुनाफिक़ों) के लिए मग़फिरत की दुआ मॉगों या उनके लिए मग़फिरत की दुआ न मॉगों (उनके लिए बराबर है) तुम उनके लिए सत्तर बार भी बख्शिस की दुआ मांगोगे तो भी ख़ुदा उनको हरगिज़ न बख्शेगा ये (सज़ा) इस सबब से है कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल के साथ कुफ्र किया और ख़ुदा बदकार लोगों को मंज़िलें मकसूद तक नहीं पहुँचाया करता
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अनुवाद — अत-तौबा 78

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Tuesday, August 18, 2026

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