Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَلْمِزُونَ: बुराई करना, दोष निकालना, ताना मारना।
- الْمُطَّوِّعِينَ: अपनी इच्छा और खुशी से अतिरिक्त दान करने वाले।
- جُهْدَهُمْ: अपनी सामर्थ्य और ताकत के अनुसार (थोड़ी सी चीज़ जो वे दे सकें)।
- فَيَسْخَرُونَ: मज़ाक उड़ाना, उपहास करना।
- سَخِرَ اللَّهُ مِنْهُمْ: अल्लाह ने उन्हें अपनी यातना का पात्र बनाया (अर्थात उनका मज़ाक उड़ाने का बदला दिया)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) के बारे में है जो ईमान वाले दानशील लोगों का मज़ाक उड़ाते थे। जब अमीर मुसलमान बड़ी मात्रा में दान देते थे, तो ये मुनाफ़िक़ उन पर दोष लगाते थे कि वे केवल दिखावे के लिए ऐसा कर रहे हैं। और जब ग़रीब मुसलमान अपनी हैसियत के मुताबिक़ थोड़ा-बहुत दान देते थे, तो ये लोग उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहते थे: "इस छोटी सी चीज़ का क्या फ़ायदा? अल्लाह को इसकी कोई ज़रूरत नहीं।" इस तरह वे दोनों तरह के लोगों का उपहास करते थे।
अल्लाह ने इन मुनाफ़िक़ों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जिस तरह वे ईमान वालों का मज़ाक उड़ा रहे हैं, अल्लाह उन्हें अपनी यातना और अपमान में डालेगा। उनके लिए दर्दनाक अज़ाब तैयार है, क्योंकि उन्होंने न केवल अल्लाह के बंदों का अपमान किया, बल्कि अल्लाह के दीन और उसके वादों को भी झुठलाया।
फ़ायदे (सीख):
- दान की भावना की क़द्र: अल्लाह के नज़दीक दान की असली क़ीमत उसकी मात्रा से नहीं, बल्कि नीयत और सामर्थ्य से है। थोड़ा सा दान भी अगर ख़ालिस नीयत से दिया जाए, तो अल्लाह उसे कबूल करता है और उसका अज्र बढ़ाता है।
- उपहास से बचना: किसी भी इंसान की नेक कोशिश का मज़ाक उड़ाना बहुत बड़ा गुनाह है। यह दिल को तोड़ने वाला काम है और अल्लाह को सख्त नापसंद है। हमें चाहिए कि हर इंसान की नेक कोशिश की क़द्र करें, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो।
- अल्लाह की नज़र में बड़ाई: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के यहाँ बड़ाई धन-दौलत से नहीं, बल्कि तक़वा (परहेज़गारी) और अच्छे कामों से है। ग़रीब सहाबा का थोड़ा सा दान अल्लाह के यहाँ अमीरों के बड़े दान से ज़्यादा प्यारा हो सकता है, अगर उसमें सच्ची नीयत हो।
- मुनाफ़िक़ों की पहचान: यह आयत हमें मुनाफ़िक़ों की एक पहचान बताती है कि वे नेक कामों को बुरा भला कहते हैं और ईमान वालों का मज़ाक उड़ाते हैं। हमें ऐसे लोगों की बातों से सावधान रहना चाहिए और अपने नेक कामों में डटे रहना चाहिए।
- अल्लाह की सज़ा का डर: जो लोग दूसरों का मज़ाक उड़ाते हैं और अल्लाह के दीन का अपमान करते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ से दर्दनाक अज़ाब है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी ज़ुबान और अच्छे कामों में सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि अल्लाह की नाराज़गी से बच सकें।
📜 आयत 77-81 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 79
सूरा अत-तौबा आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो लोग दिल खोलकर ख़ैरात करने वाले मोमिनीन पर (रियाकारी…सूरा आयत 79/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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