अल-बलद · 18/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बलद
أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ ۝١٨
Ulaaa`ika As-haabul maimanah
📖 हिंदी अर्थ
यही लोग ख़ुश नसीब हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُولَٰئِكَ (ओले-इक): ये लोग
  • أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ (अस्हाबुल मैमनाह): दाहिने हाथ वाले, यानी सौभाग्यशाली और सफल लोग

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्होंने पिछली आयात में बताए गए कठिन कार्यों को किया—गर्दन छुड़ाना, अनाथों और मुहताजों को खाना खिलाना, ईमान लाना, सब्र और रहम की ताकीद करना। अल्लाह फ़रमाता है कि यही लोग "अस्हाबुल मैमनाह" हैं, यानी दाहिने हाथ वाले।

क़यामत के दिन जब सारे इंसान अपने कर्मों के हिसाब से दो गिरोहों में बंट जाएँगे—एक दाहिनी तरफ़ (जन्नत की तरफ़) और एक बाईं तरफ़ (जहन्नम की तरफ़)—तो ये नेक लोग दाहिनी तरफ़ होंगे। यह उनके लिए सम्मान, सफलता और अल्लाह की रहमत की निशानी है। दाहिना हाथ इस्लामी संस्कृति में बरकत, अच्छाई और सम्मान का प्रतीक है, और इन लोगों को यह मरतबा उनके अच्छे आचरण और ईमान की वजह से मिलेगा।

यह आयत हमें बताती है कि असली कामयाबी दुनिया के माल-दौलत या ओहदे में नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसके दीन पर चलने में है। जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, ईमान को अपनी ज़िंदगी का आधार बनाते हैं, और सब्र के साथ दूसरों पर रहम करते हैं, वही अल्लाह के यहाँ इज़्ज़त वाले हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बड़ी खुशखबरी देती है कि अल्लाह उन लोगों को कभी नाकाम नहीं करता जो उसकी राह में भलाई करते हैं। आज हम जो छोटे-छोटे नेक काम करते हैं—किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी अनाथ का सहारा बनना, किसी ज़रूरतमंद की मदद करना—यह सब क़यामत के दिन हमारे लिए रोशनी बनेगा और हमें दाहिने हाथ वालों में शामिल करेगा। अल्लाह हम सबको इस नेक राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — सूरा अल-बलद

16أَوْ مِسْكِينًا ذَا مَتْرَبَةٍ
खाना खिलाना
17ثُمَّ كَانَ مِنَ الَّذِينَ آمَنُوا وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ وَتَوَاصَوْا بِالْمَرْحَمَةِ
फिर तो उन लोगों में (शामिल) हो जाता जो ईमान लाए और सब्र की नसीहत और तरस खाने की वसीयत करते रहे
18أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ
यही लोग ख़ुश नसीब हैं
19وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا هُمْ أَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया है यही लोग बदबख्त हैं
20عَلَيْهِمْ نَارٌ مُّؤْصَدَةٌ
कि उनको आग में डाल कर हर तरफ से बन्द कर दिया जाएगा
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अनुवाद — अल-बलद 18

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Thursday, October 1, 2026

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