अल-बय्यिना · 7/8
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बय्यिना
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ هُمْ خَيْرُ الْبَرِيَّةِ ۝٧
Innal lazeena aamanu wa `amilus saalihaati ula-ika hum khairul bareey yah
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे यही लोग बेहतरीन ख़लाएक़ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: अल्लाह पर, उसके रसूल पर और उसकी लाई हुई हर चीज़ पर ईमान लाए।
  • الصَّالِحَاتِ: वे अच्छे काम जो अल्लाह को पसंद हों और उसकी शरीयत के अनुसार हों।
  • الْبَرِيَّةِ: सारी मख़लूक़ात (सृष्टि), यानी इंसान और जिन्नात।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की बड़ी तारीफ़ फ़रमा रहा है जो ईमान लाए और उस ईमान के साथ अच्छे काम भी करते रहे। यहाँ सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं है, बल्कि ईमान के साथ अमल-ए-सालिह (नेक काम) का होना ज़रूरी है। यानी जिसका दिल ईमान से रोशन हो और उसके बाद उसके अमल भी अच्छे हों, वही इंसान अल्लाह की नज़र में सबसे बेहतर है।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही लोग सारी मख़लूक़ात में सबसे अच्छे हैं। यह एक बहुत बड़ा सम्मान है जो अल्लाह ने मोमिनीन को अता किया है। ग़ौर फ़रमाइए, अल्लाह ने यह नहीं कहा कि वे दुनिया में सबसे अमीर हैं या सबसे ताक़तवर हैं, बल्कि फ़रमाया कि वे "सबसे बेहतरीन मख़लूक़" हैं। यह उनकी असली पहचान है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इंसान की असली अज़मत और बुलंदी उसके ईमान और नेक अमल में है, न कि माल, दौलत, नस्ल या रंग-रूप में। अल्लाह के पास वही इंसान सबसे प्यारा है जो उस पर ईमान रखे और उसकी बताई हुई राह पर चले।

यह आयत हमें बशारत (खुशखबरी) देती है कि अगर हम सच्चे दिल से ईमान लाएँ और अपने जीवन को अच्छे कामों से सजाएँ, तो हम भी अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छे लोगों में शामिल हो सकते हैं। कितनी बड़ी खुशकिस्मती है कि अल्लाह हमें यह मौक़ा दे रहा है कि हम अपने अमल से इस बुलंद मक़ाम तक पहुँच सकते हैं।

प्यारे भाइयो और बहनो! आइए हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को अच्छा बनाएँ। नमाज़, रोज़ा, ज़कात, सच्चाई, ईमानदारी, माँ-बाप की सेवा, रिश्तेदारों के साथ अच्छा सलूक — ये सब वे अच्छे काम हैं जो हमें अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छा बना सकते हैं। याद रखिए, दुनिया की कामयाबी भले ही किसी को मिले, लेकिन असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा और उसकी तारीफ़ है।



📜 आयत 5-8 — सूरा अल-बय्यिना

5وَمَا أُمِرُوا إِلَّا لِيَعْبُدُوا اللَّهَ مُخْلِصِينَ لَهُ الدِّينَ حُنَفَاءَ وَيُقِيمُوا الصَّلَاةَ وَيُؤْتُوا الزَّكَاةَ ۚ وَذَٰلِكَ دِينُ الْقَيِّمَةِ
(तब) और उन्हें तो बस ये हुक्म दिया गया था कि निरा ख़ुरा उसी का एतक़ाद रख के बातिल से कतरा के ख़ुदा की इबादत करे और पाबन्दी से नमाज़ पढ़े और ज़कात अदा करता रहे और यही सच्चा दीन है
6إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ وَالْمُشْرِكِينَ فِي نَارِ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ أُولَٰئِكَ هُمْ شَرُّ الْبَرِيَّةِ
बेशक अहले किताब और मुशरेकीन से जो लोग (अब तक) काफ़िर हैं वह दोज़ख़ की आग में (होंगे) हमेशा उसी में रहेंगे यही लोग बदतरीन ख़लाएक़ हैं
7إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ أُولَٰئِكَ هُمْ خَيْرُ الْبَرِيَّةِ
बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे यही लोग बेहतरीन ख़लाएक़ हैं
8جَزَاؤُهُمْ عِندَ رَبِّهِمْ جَنَّاتُ عَدْنٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۖ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ ۚ ذَٰلِكَ لِمَنْ خَشِيَ رَبَّهُ
उनकी जज़ा उनके परवरदिगार के यहाँ हमेशा रहने (सहने) के बाग़ हैं जिनके नीचे नहरें जारी हैं और वह आबादुल आबाद हमेशा उसी में रहेंगे ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश ये (जज़ा) ख़ास उस शख़्श की है जो अपने परवरदिगार से डरे
अल-बय्यिनाकुरान सूची
8आयत
मदनीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-बय्यिना 7

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Wednesday, September 30, 2026

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