अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آمَنُوا: अल्लाह पर, उसके रसूल पर और उसकी लाई हुई हर चीज़ पर ईमान लाए।
- الصَّالِحَاتِ: वे अच्छे काम जो अल्लाह को पसंद हों और उसकी शरीयत के अनुसार हों।
- الْبَرِيَّةِ: सारी मख़लूक़ात (सृष्टि), यानी इंसान और जिन्नात।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला उन लोगों की बड़ी तारीफ़ फ़रमा रहा है जो ईमान लाए और उस ईमान के साथ अच्छे काम भी करते रहे। यहाँ सिर्फ़ ईमान का दावा काफ़ी नहीं है, बल्कि ईमान के साथ अमल-ए-सालिह (नेक काम) का होना ज़रूरी है। यानी जिसका दिल ईमान से रोशन हो और उसके बाद उसके अमल भी अच्छे हों, वही इंसान अल्लाह की नज़र में सबसे बेहतर है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यही लोग सारी मख़लूक़ात में सबसे अच्छे हैं। यह एक बहुत बड़ा सम्मान है जो अल्लाह ने मोमिनीन को अता किया है। ग़ौर फ़रमाइए, अल्लाह ने यह नहीं कहा कि वे दुनिया में सबसे अमीर हैं या सबसे ताक़तवर हैं, बल्कि फ़रमाया कि वे "सबसे बेहतरीन मख़लूक़" हैं। यह उनकी असली पहचान है।
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि इंसान की असली अज़मत और बुलंदी उसके ईमान और नेक अमल में है, न कि माल, दौलत, नस्ल या रंग-रूप में। अल्लाह के पास वही इंसान सबसे प्यारा है जो उस पर ईमान रखे और उसकी बताई हुई राह पर चले।
यह आयत हमें बशारत (खुशखबरी) देती है कि अगर हम सच्चे दिल से ईमान लाएँ और अपने जीवन को अच्छे कामों से सजाएँ, तो हम भी अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छे लोगों में शामिल हो सकते हैं। कितनी बड़ी खुशकिस्मती है कि अल्लाह हमें यह मौक़ा दे रहा है कि हम अपने अमल से इस बुलंद मक़ाम तक पहुँच सकते हैं।
प्यारे भाइयो और बहनो! आइए हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को अच्छा बनाएँ। नमाज़, रोज़ा, ज़कात, सच्चाई, ईमानदारी, माँ-बाप की सेवा, रिश्तेदारों के साथ अच्छा सलूक — ये सब वे अच्छे काम हैं जो हमें अल्लाह की नज़र में सबसे अच्छा बना सकते हैं। याद रखिए, दुनिया की कामयाबी भले ही किसी को मिले, लेकिन असली कामयाबी अल्लाह की रज़ा और उसकी तारीफ़ है।
📜 आयत 5-8 — अल-बय्यिना
अनुवाद — अल-बय्यिना 7
सूरा अल-बय्यिना आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जो लोग ईमान लाए और अच्छे काम करते रहे…सूरा आयत 7/8 — अल-बय्यिना البينة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बय्यिना सुनें, अल-बय्यिना अनुवाद, अल-बय्यिना mp3, अल-बय्यिना pdf. आयत 5–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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