अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَذَٰلِكُمُ – तो वही है (वह सर्वोच्च सत्ता)
- الْحَقُّ – सत्य, जो वास्तविकता पर आधारित हो
- الضَّلَالُ – पथभ्रष्टता, सत्य से भटक जाना
- فَأَنَّىٰ – तो कैसे / किस प्रकार
- تُصْرَفُونَ – तुम्हें फेरा जा रहा है (सत्य से विमुख किया जा रहा है)
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महान शक्ति और एकत्व के प्रमाण प्रस्तुत करने के बाद फ़रमाता है कि यही वह अल्लाह है जो तुम्हारा रब है, जो सत्य है। वही सच्चा मालिक और पालनहार है, जिसकी इबादत के योग्य कोई और नहीं। उसकी सत्ता, उसके गुण और उसके कार्य — सब कुछ सत्य पर आधारित है। उसके सिवा जो कुछ भी है, वह सब असत्य और मिथ्या है।
फिर अल्लाह तआला एक अत्यंत स्पष्ट और तार्किक प्रश्न उठाता है: "सत्य के बाद और क्या है, सिवाय पथभ्रष्टता के?" इसका अर्थ यह है कि सत्य और असत्य के बीच कोई तीसरा विकल्प नहीं है। यदि कोई व्यक्ति सत्य को नहीं अपनाता, तो वह स्वतः ही असत्य और भ्रम में पड़ जाता है। यह एक द्वंद्वात्मक (दो-विकल्पीय) स्थिति है — या तो सत्य होगा या फिर पथभ्रष्टता। कोई बीच का रास्ता नहीं है।
इसके बाद अल्लाह तआला आश्चर्य व्यक्त करता है: "तो तुम कहाँ से फेरे जा रहे हो?" अर्थात् जब सत्य इतना स्पष्ट है, उसके प्रमाण इतने उजागर हैं, तो फिर तुम्हें किस प्रकार सत्य से हटाकर असत्य की ओर मोड़ा जा रहा है? तुम्हारी बुद्धि और समझ पर क्या बीती कि तुम सत्य को छोड़कर मिथ्या की ओर जा रहे हो? यह एक लाक्षणिक प्रश्न है जो उनकी बुद्धि पर आश्चर्य प्रकट करता है।
शिक्षाएँ एवं लाभ:
- सत्य का एकमात्र स्रोत अल्लाह है — यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य केवल अल्लाह और उसका मार्ग है। उसके सिवा हर चीज़ असत्य है। यह विश्वास मुसलमान को जीवन में एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है।
- मध्यमार्ग का भ्रम — इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि धर्म के मामले में "बीच का रास्ता" नहीं होता। या तो आप सत्य पर हैं या फिर असत्य पर। यह स्पष्टता मुसलमान को अपने ईमान में दृढ़ता प्रदान करती है।
- तर्क और बुद्धि का उपयोग — अल्लाह तआला इस आयत में तर्कसंगत प्रश्न पूछकर हमें अपनी बुद्धि का उपयोग करने की प्रेरणा देता है। इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो अंधानुकरण नहीं, बल्कि समझदारी और विवेक पर आधारित है।
- कृतज्ञता का पाठ — जब हमें सत्य मिला है, तो यह अल्लाह की सबसे बड़ी नेमत है। हमें इस नेमत की क़द्र करनी चाहिए और उस पर स्थिर रहना चाहिए।
- सत्य की ओर बुलाना — यह आयत हमें सिखाती है कि जो लोग सत्य से भटके हुए हैं, उन्हें प्रेम और तर्क के साथ सत्य की ओर बुलाना चाहिए, क्योंकि सत्य के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है सिवाय पथभ्रष्टता के।
- अल्लाह की महानता का अनुभव — जब हम यह समझते हैं कि अल्लाह ही सत्य है और उसके सिवा सब कुछ मिथ्या है, तो हमारा दिल उसकी ओर झुकता है और हम उसकी इबादत में सुकून पाते हैं। यही सच्ची सफलता है।
📜 आयत 30-34 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 32
सूरा यूनुस आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़…सूरा आयत 32/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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