यूनुस · 33/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
كَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ فَسَقُوا أَنَّهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٣٣
Kazaalika haqqat Kalimatu Rabbika `alal lazeena fasaqooo annahum laa yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
ये तुम्हारे परवरदिगार की बात बदचलन लोगों पर साबित होकर रही कि ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَقَّتْ: सिद्ध हो गई, लाज़िम हो गई।
  • كَلِمَتُ رَبِّكَ: आपके रब का फ़ैसला और अटल आदेश।
  • فَسَقُوا: जो अल्लाह की आज्ञा से निकल गए, हठ और सरकशी के साथ कुफ़्र पर डटे रहे।

व्याख्या:

ऐ नबी! जिस प्रकार अल्लाह का फ़ैसला सत्य और अटल है, उसी प्रकार आपके रब की वह बात और आदेश भी उन लोगों पर सिद्ध हो चुका है जिन्होंने अल्लाह की आज्ञा मानने से इनकार किया, हठधर्मी से सत्य को ठुकराया और अपनी सरकशी में बढ़ते चले गए। उनके इसी आचरण के कारण अल्लाह का अटल फ़ैसला उन पर लागू हो गया कि वे कभी ईमान नहीं लाएँगे। यह उनका अंजाम उनके अपने कर्मों का परिणाम है, क्योंकि उन्होंने सत्य को जानते हुए भी उसे नकारा और अपनी ज़िद पर अड़े रहे। उनका दिल और दिमाग़ इस क़दर सत्य से दूर हो गया कि अब उनमें ईमान की गुंजाइश ही नहीं बची। यह अल्लाह की ओर से उन पर लागू होने वाला न्यायपूर्ण फ़ैसला है, जो उनके स्वयं के किए का परिणाम है।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह का फ़ैसला अटल और सत्य है; वह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि उसका हर आदेश न्याय और हिकमत पर आधारित होता है।
  2. हठ और सरकशी इंसान को ईमान की नेमत से महरूम कर देती है; जो सत्य को जानकर भी उसे नकारता है, उसका दिल धीरे-धीरे सत्य को समझने की क्षमता खो देता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सत्य के आगे झुकते हैं और अपनी ज़िद छोड़ देते हैं; इसलिए हमें हमेशा सत्य को क़बूल करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
  4. इंसान की किस्मत उसके अपने कर्मों और इरादों से जुड़ी है; अल्लाह का फ़ैसला उसके आचरण के अनुसार ही होता है। यह हमें अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेने की प्रेरणा देता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 31-35 — यूनुस

31قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أَمَّن يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَمَن يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۚ فَسَيَقُولُونَ اللَّهُ ۚ فَقُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) ऑंखों का कौन मालिक है और कौन शख़्श मुर्दे से ज़िन्दा को निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो
32فَذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمُ الْحَقُّ ۖ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ إِلَّا الضَّلَالُ ۖ فَأَنَّىٰ تُصْرَفُونَ
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो
33كَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ فَسَقُوا أَنَّهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
ये तुम्हारे परवरदिगार की बात बदचलन लोगों पर साबित होकर रही कि ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगें
34قُلْ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۚ قُلِ اللَّهُ يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ ۖ فَأَنَّىٰ تُؤْفَكُونَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि तुम ने जिन लोगों को (ख़ुदा का) शरीक बनाया है कोई भी ऐसा है जो मख़लूकात को पहली बार पैदा करे फिर उन को (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा करे (तो क्या जवाब देगें) तुम्ही कहो कि ख़ुदा ही पहले भी पैदा करता है फिर वही दोबारा ज़िन्दा करता है तो किधर तुम उल्टे जा रहे हो
35قُلْ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَهْدِي إِلَى الْحَقِّ ۚ قُلِ اللَّهُ يَهْدِي لِلْحَقِّ ۗ أَفَمَن يَهْدِي إِلَى الْحَقِّ أَحَقُّ أَن يُتَّبَعَ أَمَّن لَّا يَهِدِّي إِلَّا أَن يُهْدَىٰ ۖ فَمَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ
(ऐ रसूल उनसे) कहो तो कि तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में से कोई ऐसा भी है जो तुम्हें (दीन) हक़ की राह दिखा सके तुम ही कह दो कि (ख़ुदा) दीन की राह दिखाता है तो जो तुम्हे दीने हक़ की राह दिखाता है क्या वह ज्यादा हक़दार है कि उसके हुक्म की पैरवी की जाए या वह शख़्श जो (दूसरे) की हिदायत तो दर किनार खुद ही जब तक दूसरा उसको राह न दिखाए राह नही देख पाता तो तुम लोगों को क्या हो गया है
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अनुवाद — यूनुस 33

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सूरा आयत 33/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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