अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَرْزُقُكُمْ: तुम्हें आजीविका प्रदान करता है।
- يَمْلِكُ: अधिकार रखता है, स्वामित्व रखता है।
- يُدَبِّرُ: प्रबंधन करता है, व्यवस्था करता है।
- تَتَّقُونَ: डरते हो, बचते हो।
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से पूछिए: "कौन है जो तुम्हें आकाश से रिज़्क़ देता है, यानी बारिश बरसाकर, और ज़मीन से, यानी उसमें उगाई जाने वाली फ़सलों, फलों और खनिज पदार्थों के ज़रिए? और कौन है जो सुनने और देखने की शक्तियों का स्वामी है, जो इन्हें पैदा करता है और इन पर पूरा अधिकार रखता है? और कौन है जो जीवित को मृत से निकालता है, जैसे नطفे से इंसान और अंडे से पक्षी, और मृत को जीवित से निकालता है, जैसे जानवर से नطفा और पक्षी से अंडा? और कौन है जो आकाश और ज़मीन और उनमें मौजूद हर चीज़ के मामलों का प्रबंधन करता है, तुम्हारे जीवन और मृत्यु का इंतज़ाम करता है?"
ये लोग, चाहे कितने भी जिद्दी क्यों न हों, इसका जवाब देने से बच नहीं सकते। वे स्वयं स्वीकार करेंगे कि यह सब अल्लाह ही करता है। उनके मुँह से यह सच निकलेगा ही, क्योंकि उनका दिल इस हक़ीक़त को जानता है। तो आप उनसे कहिए: "जब तुम यह सब जानते हो कि ये कार्य अल्लाह ही के हैं, तो क्या तुम अल्लाह की पूजा में उसके साथ दूसरों को साझी बनाकर उसकी सज़ा से नहीं डरते? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बचते नहीं?"
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत के नज़ारे हर तरफ़ बिखरे हुए हैं — बारिश, ज़मीन की पैदावार, हमारी इंद्रियाँ, और जीवन-मृत्यु का चक्र — ये सब उसकी वहदानियत की निशानियाँ हैं।
- इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) अल्लाह की वहदानियत की गवाही देती है, भले ही वह ज़बान से इनकार करे। इसलिए हमें अपनी फ़ितरत की आवाज़ सुननी चाहिए और अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
- अल्लाह की नेअमतों पर ग़ौर करने से इंसान का दिल उसकी मोहब्बत और ख़ौफ़ से भर जाता है, और वह उसकी इबादत में एकाग्र हो जाता है।
- यह आयत दावत का एक बेहतरीन तरीक़ा सिखाती है — पहले सवालों के ज़रिए सामने वाले की फ़ितरत को जगाओ, फिर उसे अल्लाह की तरफ़ बुलाओ।
📜 आयत 29-33 — यूनुस
अनुवाद — यूनुस 31
सूरा यूनुस आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान…सूरा आयत 31/109 — यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूनुस सुनें, यूनुस अनुवाद, यूनुस mp3, यूनुस pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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