यूनुस · 31/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أَمَّن يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَمَن يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۚ فَسَيَقُولُونَ اللَّهُ ۚ فَقُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ ۝٣١
Qul mai yarzuqukum minas samaaa`i wal ardi ammany yamlikus sam`a wal absaara wa mai yukhrijul haiya minal maiyiti wa yikhrijul maiyita minal haiyi wa mai yudabbirul amr; fasa yaqooloonal laah; faqul afalaa tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) ऑंखों का कौन मालिक है और कौन शख़्श मुर्दे से ज़िन्दा को निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَرْزُقُكُمْ: तुम्हें आजीविका प्रदान करता है।
  • يَمْلِكُ: अधिकार रखता है, स्वामित्व रखता है।
  • يُدَبِّرُ: प्रबंधन करता है, व्यवस्था करता है।
  • تَتَّقُونَ: डरते हो, बचते हो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से पूछिए: "कौन है जो तुम्हें आकाश से रिज़्क़ देता है, यानी बारिश बरसाकर, और ज़मीन से, यानी उसमें उगाई जाने वाली फ़सलों, फलों और खनिज पदार्थों के ज़रिए? और कौन है जो सुनने और देखने की शक्तियों का स्वामी है, जो इन्हें पैदा करता है और इन पर पूरा अधिकार रखता है? और कौन है जो जीवित को मृत से निकालता है, जैसे नطفे से इंसान और अंडे से पक्षी, और मृत को जीवित से निकालता है, जैसे जानवर से नطفा और पक्षी से अंडा? और कौन है जो आकाश और ज़मीन और उनमें मौजूद हर चीज़ के मामलों का प्रबंधन करता है, तुम्हारे जीवन और मृत्यु का इंतज़ाम करता है?"

ये लोग, चाहे कितने भी जिद्दी क्यों न हों, इसका जवाब देने से बच नहीं सकते। वे स्वयं स्वीकार करेंगे कि यह सब अल्लाह ही करता है। उनके मुँह से यह सच निकलेगा ही, क्योंकि उनका दिल इस हक़ीक़त को जानता है। तो आप उनसे कहिए: "जब तुम यह सब जानते हो कि ये कार्य अल्लाह ही के हैं, तो क्या तुम अल्लाह की पूजा में उसके साथ दूसरों को साझी बनाकर उसकी सज़ा से नहीं डरते? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बचते नहीं?"

फ़ायदे:

  • यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की कुदरत के नज़ारे हर तरफ़ बिखरे हुए हैं — बारिश, ज़मीन की पैदावार, हमारी इंद्रियाँ, और जीवन-मृत्यु का चक्र — ये सब उसकी वहदानियत की निशानियाँ हैं।
  • इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) अल्लाह की वहदानियत की गवाही देती है, भले ही वह ज़बान से इनकार करे। इसलिए हमें अपनी फ़ितरत की आवाज़ सुननी चाहिए और अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए।
  • अल्लाह की नेअमतों पर ग़ौर करने से इंसान का दिल उसकी मोहब्बत और ख़ौफ़ से भर जाता है, और वह उसकी इबादत में एकाग्र हो जाता है।
  • यह आयत दावत का एक बेहतरीन तरीक़ा सिखाती है — पहले सवालों के ज़रिए सामने वाले की फ़ितरत को जगाओ, फिर उसे अल्लाह की तरफ़ बुलाओ।


📜 आयत 29-33 — सूरा यूनुस

29فَكَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ إِن كُنَّا عَنْ عِبَادَتِكُمْ لَغَافِلِينَ
तो (अब) हमारे और तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते ख़ुदा ही काफी है हम को तुम्हारी परसतिश की ख़बर ही न थी
30هُنَالِكَ تَبْلُو كُلُّ نَفْسٍ مَّا أَسْلَفَتْ ۚ وَرُدُّوا إِلَى اللَّهِ مَوْلَاهُمُ الْحَقِّ ۖ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
(ग़रज़) वहाँ हर शख़्श जो कुछ जिसने पहले (दुनिया में) किया है जाँच लेगा और वह सब के सब अपने सच्चे मालिक ख़ुदा की बारगाह में लौटकर लाए जाएँगें और (दुनिया में) जो कुछ इफ़तेरा परदाज़िया (झूठी बातें) करते थे सब उनके पास से चल चंपत हो जाएगें
31قُلْ مَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ أَمَّن يَمْلِكُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَمَن يُخْرِجُ الْحَيَّ مِنَ الْمَيِّتِ وَيُخْرِجُ الْمَيِّتَ مِنَ الْحَيِّ وَمَن يُدَبِّرُ الْأَمْرَ ۚ فَسَيَقُولُونَ اللَّهُ ۚ فَقُلْ أَفَلَا تَتَّقُونَ
ऐ रसूल तुम उने ज़रा पूछो तो कि तुम्हें आसमान व ज़मीन से कौन रोज़ी देता है या (तुम्हारे) कान और (तुम्हारी) ऑंखों का कौन मालिक है और कौन शख़्श मुर्दे से ज़िन्दा को निकालता है और ज़िन्दा से मुर्दे को निकालता है और हर अम्र (काम) का बन्दोबस्त कौन करता है तो फौरन बोल उठेंगे कि ख़ुदा (ऐ रसूल) तुम कहो तो क्या तुम इस पर भी (उससे) नहीं डरते हो
32فَذَٰلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمُ الْحَقُّ ۖ فَمَاذَا بَعْدَ الْحَقِّ إِلَّا الضَّلَالُ ۖ فَأَنَّىٰ تُصْرَفُونَ
फिर वही ख़ुदा तो तुम्हारा सच्चा रब है फिर हक़ बात के बाद गुमराही के सिवा और क्या है फिर तुम कहाँ फिरे चले जा रहे हो
33كَذَٰلِكَ حَقَّتْ كَلِمَتُ رَبِّكَ عَلَى الَّذِينَ فَسَقُوا أَنَّهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
ये तुम्हारे परवरदिगार की बात बदचलन लोगों पर साबित होकर रही कि ये लोग हरगिज़ ईमान न लाएँगें
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अनुवाद — यूनुस 31

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Friday, October 2, 2026

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