यूनुस · 38/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّثْلِهِ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٣٨
Am yaqooloonaf taraahu qul faatoo bisooratim mislihee wad`oo manis tata`tum min doonil laahi in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • افْتَرَاهُ: उसने इसे स्वयं रच लिया / झूठ गढ़ लिया।
  • مِّثْلِهِ: उसके समान (कुरआन की तरह)।
  • وَادْعُوا: बुला लो / मदद माँग लो।
  • مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह के अतिरिक्त (जिन्हें तुम पूजते हो)।

व्याख्या:

क्या ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) कहते हैं कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इस कुरआन को स्वयं गढ़ लिया और इसे अल्लाह की ओर जोड़ दिया? अल्लाह तआला अपने नबी को आदेश देता है कि उन्हें उत्तर दो: "यदि तुम सच्चे हो और तुम्हारा यह दावा सही है कि यह कुरआन किसी इंसान की रचना है, तो तुम भी इस कुरआन जैसी एक ही सूरा ले आओ। तुम अरब हो, भाषा और वाक्पटुता में माहिर हो, और मैं भी तुम्हारी ही तरह एक इंसान हूँ। यदि यह कुरआन मेरी ओर से है, तो तुम्हें भी इसके समान एक सूरा बना लाने में सक्षम होना चाहिए।"

साथ ही, अल्लाह उन्हें चुनौती देता है कि वे अपने सहायकों को बुला लें — चाहे वे इंसान हों या जिन्न, चाहे वे देवता हों या देवी — जिन्हें वे अल्लाह के अतिरिक्त पूजते हैं, ताकि वे इस कार्य में उनकी मदद कर सकें। लेकिन यह कार्य उनके लिए असंभव है, क्योंकि कुरआन अल्लाह का कलाम है, जो अपनी फ़साहत (वाक्पटुता), बलाग़त (प्रभावोत्पादकता), गहराई और सत्यता में मानवीय शक्ति से परे है। यह चुनौती उनकी नाकामी का प्रमाण है कि यह कुरआन अल्लाह की ओर से ही उतरा है, न कि किसी इंसान की रचना।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. कुरआन की अद्वितीयता और उसका चमत्कार (इ'जाज़) इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यह अल्लाह का कलाम है। यह चुनौती (तहद्दी) आज तक कायम है, और कोई भी इसके समान एक सूरा भी नहीं ला सका।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को अपने विरोधियों की बातों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें तर्क और प्रमाण के साथ जवाब देना चाहिए।
  3. अल्लाह की किताब की महानता और उसकी हिफ़ाज़त हमारे लिए सबसे बड़ी नेमत है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी सफलता का ज़रिया है।
  4. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जब हम किसी काम में असमर्थ हों, तो हमें अपनी कमजोरी का एहसास करना चाहिए और अल्लाह की ताकत को पहचानना चाहिए। कुरआन जैसी किताब लाने से इंसानों की असमर्थता यह साबित करती है कि यह अल्लाह ही की ओर से है।
  5. इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो कुरआन को इंसानी किताब कहते हैं या उस पर आपत्ति करते हैं — उन्हें चाहिए कि वे अपने दावे में सच्चे हों तो अपनी बात का सबूत पेश करें, लेकिन वे ऐसा कभी नहीं कर सकते।


📜 आयत 36-40 — यूनुस

36وَمَا يَتَّبِعُ أَكْثَرُهُمْ إِلَّا ظَنًّا ۚ إِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ
तुम कैसे हुक्म लगाते हो और उनमें के अक्सर तो बस अपने गुमान पर चलते हैं (हालॉकि) गुमान यक़ीन के मुक़ाबले में हरगिज़ कुछ भी काम नहीं आ सकता बेशक वह लोग जो कुछ (भी) कर रहे हैं खुदा उसे खूब जानता है
37وَمَا كَانَ هَٰذَا الْقُرْآنُ أَن يُفْتَرَىٰ مِن دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِن تَصْدِيقَ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَتَفْصِيلَ الْكِتَابِ لَا رَيْبَ فِيهِ مِن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक़ नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है
38أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّثْلِهِ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो
39بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
40وَمِنْهُم مَّن يُؤْمِنُ بِهِ وَمِنْهُم مَّن لَّا يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِالْمُفْسِدِينَ
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कुरान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं
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अनुवाद — यूनुस 38

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Tuesday, August 18, 2026

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