Wa maa kaana haazal Quraanu ai yuftaraa min doonil laahi wa laakin tasdeeqal lazee baina yadaihi wa tafseelal Kitaabi laa raiba fee mir Rabbil `aalameen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक़ नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है
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اور یہ قرآن ایسا نہیں کہ خدا کے سوا کوئی اس کو اپنی طرف سے بنا لائے۔ ہاں (ہاں یہ خدا کا کلام ہے) جو (کتابیں) اس سے پہلے (کی) ہیں۔ ان کی تصدیق کرتا ہے اور ان ہی کتابوں کی (اس میں) تفصیل ہے اس میں کچھ شک نہیں (کہ) یہ رب العالمین کی طرف سے (نازل ہوا) ہے
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक़ नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
يُفْتَرَى: गढ़ा जाए, झूठ बनाया जाए।
مِن دُونِ اللَّهِ: अल्लाह के अलावा किसी और की ओर (इसे जोड़ा जाए)।
تَصْدِيقَ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ: उस (किताब) की पुष्टि करने वाला जो इससे पहले आई।
تَفْصِيلَ الْكِتَابِ: किताब (अर्थात् तौरात, इंजील आदि) के उन आदेशों और नियमों का विस्तार से वर्णन करने वाला।
لَا رَيْبَ فِيهِ: इसमें कोई संदेह नहीं।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह क़ुरआन कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे अल्लाह के अलावा किसी और ने गढ़ा हो या किसी इंसान ने अपनी ओर से बना लिया हो। यह असंभव है, क्योंकि इसकी वाणी, इसका ज्ञान, इसकी शिक्षाएँ और इसकी गहराई ऐसी हैं कि कोई भी मनुष्य, चाहे वह कितना ही विद्वान क्यों न हो, इसके समान कुछ भी प्रस्तुत नहीं कर सकता। यह क़ुरआन तो अल्लाह की ओर से उतारा गया है, और इसका उद्देश्य यह है कि यह उन दिव्य किताबों की पुष्टि करे जो इससे पहले अल्लाह ने अपने नबियों पर उतारी थीं, क्योंकि सभी नबियों का धर्म एक ही है — अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन। साथ ही, यह क़ुरआन उन पिछली किताबों में बताए गए आदेशों और नियमों को विस्तार से स्पष्ट करता है, ताकि उम्मत को पूरा मार्गदर्शन मिल सके। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह क़ुरआन सृष्टि के पालनहार अल्लाह की ओर से उतारा गया है, और इसकी हर आयत, हर शब्द सत्य और सटीक है।
फ़ायदे (लाभ):
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से है, और इसकी सच्चाई पर किसी भी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए। यह हमारे ईमान की नींव है।
क़ुरआन पिछली सभी दिव्य किताबों की पुष्टि करता है, इसलिए हमें सभी नबियों और उनकी शिक्षाओं पर ईमान रखना चाहिए, और यह हमें एकता और भाईचारे की ओर ले जाता है।
क़ुरआन में हर युग के लिए मार्गदर्शन है — यह जीवन के हर पहलू के लिए विस्तृत नियम और सिद्धांत प्रदान करता है, जिससे हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाल सकते हैं।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि जो व्यक्ति क़ुरआन को अपना मार्गदर्शक बनाता है, वह कभी भटक नहीं सकता, क्योंकि यह अल्लाह की ओर से है और इसमें कोई कमी या त्रुटि नहीं है।
इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में सफल हों।
(ऐ रसूल उनसे) कहो तो कि तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों में से कोई ऐसा भी है जो तुम्हें (दीन) हक़ की राह दिखा सके तुम ही कह दो कि (ख़ुदा) दीन की राह दिखाता है तो जो तुम्हे दीने हक़ की राह दिखाता है क्या वह ज्यादा हक़दार है कि उसके हुक्म की पैरवी की जाए या वह शख़्श जो (दूसरे) की हिदायत तो दर किनार खुद ही जब तक दूसरा उसको राह न दिखाए राह नही देख पाता तो तुम लोगों को क्या हो गया है
तुम कैसे हुक्म लगाते हो और उनमें के अक्सर तो बस अपने गुमान पर चलते हैं (हालॉकि) गुमान यक़ीन के मुक़ाबले में हरगिज़ कुछ भी काम नहीं आ सकता बेशक वह लोग जो कुछ (भी) कर रहे हैं खुदा उसे खूब जानता है
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक़ नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
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