यूनुस · 39/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ ۝٣٩
Bal kazzaboo bimaa lam yuheetoo bi`ilmihee wa lammaa yaatihim taaweeluh; kazaalika kazzabal lazeena min qablihim fanzur kaifa kaana `aaqibatuz zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ: उसके ज्ञान को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किया, अर्थात उसे समझा और परखा नहीं।
  • تَأْوِيلُهُ: उसका अंजाम और परिणाम, अर्थात जिस चीज़ की उन्हें धमकी दी गई थी (अज़ाब) उसका सामना करना।
  • عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों का अंतिम परिणाम और अंजाम।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने मक्का के काफ़िरों के उस रवैये का ज़िक्र किया है जो उन्होंने क़ुरआन के साथ अपनाया। उन्होंने क़ुरआन को सुनते ही उसे झुठलाने में जल्दबाज़ी की, बिना यह जाने-समझे कि उसमें क्या है। उन्होंने उस चीज़ को झुठलाया जिसके ज्ञान को उन्होंने घेरा ही नहीं था, यानी उन्होंने क़ुरआन की आयात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं किया, न उसके अर्थ को समझा, न उसकी सच्चाई को परखा। उन्होंने क़ियामत, जन्नत, जहन्नम, हिसाब-किताब और अज़ाब की जो ख़बरें क़ुरआन में दी गई थीं, उन्हें बिना किसी दलील के झुठला दिया, जबकि उनके पास न तो उसका कोई इल्म था और न ही उन्होंने उस पर कोई तर्क पेश किया।

अल्लाह फ़रमाता है कि उन्होंने उस चीज़ को झुठलाया जिसका अंजाम अभी उनके सामने नहीं आया था। यानी अज़ाब जो उन्हें धमकी दी गई थी, वह अभी आया नहीं था, लेकिन उसका आना निकट था। फिर अल्लाह ने एक ऐतिहासिक सबक़ याद दिलाया कि ठीक इसी तरह पहले की उम्मतों ने भी अपने नबियों की बातों को झुठलाया था, बिना उसे समझे और बिना उसके परिणाम की प्रतीक्षा किए। उनका अंजाम यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा और वे तबाह हो गए। अल्लाह ने फ़रमाया: "देखो, अत्याचारियों का अंत कैसा हुआ!" — कुछ को ज़मीन में धँसा दिया गया, कुछ को पानी में डुबो दिया गया, कुछ को आँधी और पत्थरों से हलाक किया गया। यह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए एक चेतावनी और उनके लिए एक सबक़ है कि जो लोग सच्चाई को झुठलाते हैं, उनका अंजाम विनाश के अलावा कुछ नहीं होता।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि किसी भी चीज़ को झुठलाने या स्वीकार करने से पहले उसे समझना और परखना ज़रूरी है। जल्दबाज़ी में फ़ैसला करना इंसान को गुमराही की ओर ले जाता है।
  2. क़ुरआन को झुठलाने वालों का अंजाम बुरा होता है, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
  3. यह आयत हमें इतिहास से सबक़ लेने की तरग़ीब देती है — पिछली उम्मतों का हाल देखकर हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए।
  4. अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ यह है कि वह अज़ाब में जल्दबाज़ी नहीं करता, बल्कि लोगों को मौक़ा देता है ताकि वे सुधर जाएँ। लेकिन जब वे ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, तो अल्लाह की पकड़ उन्हें आ ही लेती है।
  5. इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए तसल्ली है कि आप अकेले नहीं हैं — हर ज़माने में नबियों को झुठलाया गया, लेकिन अंजाम हमेशा सच्चाई के पक्ष में रहा।


📜 आयत 37-41 — यूनुस

37وَمَا كَانَ هَٰذَا الْقُرْآنُ أَن يُفْتَرَىٰ مِن دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِن تَصْدِيقَ الَّذِي بَيْنَ يَدَيْهِ وَتَفْصِيلَ الْكِتَابِ لَا رَيْبَ فِيهِ مِن رَّبِّ الْعَالَمِينَ
और ये कुरान ऐसा नहीं कि खुदा के सिवा कोई और अपनी तरफ से झूठ मूठ बना डाले बल्कि (ये तो) जो (किताबें) पहले की उसके सामने मौजूद हैं उसकी तसदीक़ और (उन) किताबों की तफ़सील है उसमें कुछ भी शक़ नहीं कि ये सारे जहाँन के परवरदिगार की तरफ से है
38أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَاهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّثْلِهِ وَادْعُوا مَنِ اسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
क्या ये लोग कहते हैं कि इसको रसूल ने खुद झूठ मूठ बना लिया है (ऐ रसूल) तुम कहो कि (अच्छा) तो तुम अगर (अपने दावे में) सच्चे हो तो (भला) एक ही सूरा उसके बराबर का बना लाओ और ख़ुदा के सिवा जिसको तुम्हें (मदद के वास्ते) बुलाते बन पड़े बुला लो
39بَلْ كَذَّبُوا بِمَا لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ وَلَمَّا يَأْتِهِمْ تَأْوِيلُهُ ۚ كَذَٰلِكَ كَذَّبَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ
(ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर उनका हाथ न पहुँचा हो लगे उसको झुठलाने हालॉकि अभी तक उनके जेहन में उसके मायने नहीं आए इसी तरह उन लोगों ने भी झुठलाया था जो उनसे पहले थे-तब ज़रा ग़ौर तो करो कि (उन) ज़ालिमों का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
40وَمِنْهُم مَّن يُؤْمِنُ بِهِ وَمِنْهُم مَّن لَّا يُؤْمِنُ بِهِ ۚ وَرَبُّكَ أَعْلَمُ بِالْمُفْسِدِينَ
और उनमें से बाज़ तो ऐसे है कि इस कुरान पर आइन्दा ईमान लाएगें और बाज़ ऐसे हैं जो ईमान लाएगें ही नहीं
41وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّي عَمَلِي وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيئُونَ مِمَّا أَعْمَلُ وَأَنَا بَرِيءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम ज़िम्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
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अनुवाद — यूनुस 39

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Tuesday, August 18, 2026

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