Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمْ يُحِيطُوا بِعِلْمِهِ: उसके ज्ञान को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं किया, अर्थात उसे समझा और परखा नहीं।
- تَأْوِيلُهُ: उसका अंजाम और परिणाम, अर्थात जिस चीज़ की उन्हें धमकी दी गई थी (अज़ाब) उसका सामना करना।
- عَاقِبَةُ الظَّالِمِينَ: अत्याचारियों का अंतिम परिणाम और अंजाम।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने मक्का के काफ़िरों के उस रवैये का ज़िक्र किया है जो उन्होंने क़ुरआन के साथ अपनाया। उन्होंने क़ुरआन को सुनते ही उसे झुठलाने में जल्दबाज़ी की, बिना यह जाने-समझे कि उसमें क्या है। उन्होंने उस चीज़ को झुठलाया जिसके ज्ञान को उन्होंने घेरा ही नहीं था, यानी उन्होंने क़ुरआन की आयात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं किया, न उसके अर्थ को समझा, न उसकी सच्चाई को परखा। उन्होंने क़ियामत, जन्नत, जहन्नम, हिसाब-किताब और अज़ाब की जो ख़बरें क़ुरआन में दी गई थीं, उन्हें बिना किसी दलील के झुठला दिया, जबकि उनके पास न तो उसका कोई इल्म था और न ही उन्होंने उस पर कोई तर्क पेश किया।
अल्लाह फ़रमाता है कि उन्होंने उस चीज़ को झुठलाया जिसका अंजाम अभी उनके सामने नहीं आया था। यानी अज़ाब जो उन्हें धमकी दी गई थी, वह अभी आया नहीं था, लेकिन उसका आना निकट था। फिर अल्लाह ने एक ऐतिहासिक सबक़ याद दिलाया कि ठीक इसी तरह पहले की उम्मतों ने भी अपने नबियों की बातों को झुठलाया था, बिना उसे समझे और बिना उसके परिणाम की प्रतीक्षा किए। उनका अंजाम यह हुआ कि अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा और वे तबाह हो गए। अल्लाह ने फ़रमाया: "देखो, अत्याचारियों का अंत कैसा हुआ!" — कुछ को ज़मीन में धँसा दिया गया, कुछ को पानी में डुबो दिया गया, कुछ को आँधी और पत्थरों से हलाक किया गया। यह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए एक चेतावनी और उनके लिए एक सबक़ है कि जो लोग सच्चाई को झुठलाते हैं, उनका अंजाम विनाश के अलावा कुछ नहीं होता।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत हमें सिखाती है कि किसी भी चीज़ को झुठलाने या स्वीकार करने से पहले उसे समझना और परखना ज़रूरी है। जल्दबाज़ी में फ़ैसला करना इंसान को गुमराही की ओर ले जाता है।
- क़ुरआन को झुठलाने वालों का अंजाम बुरा होता है, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
- यह आयत हमें इतिहास से सबक़ लेने की तरग़ीब देती है — पिछली उम्मतों का हाल देखकर हमें अपने आचरण को सुधारना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत और उसका इंसाफ़ यह है कि वह अज़ाब में जल्दबाज़ी नहीं करता, बल्कि लोगों को मौक़ा देता है ताकि वे सुधर जाएँ। लेकिन जब वे ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, तो अल्लाह की पकड़ उन्हें आ ही लेती है।
- इस आयत में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए तसल्ली है कि आप अकेले नहीं हैं — हर ज़माने में नबियों को झुठलाया गया, लेकिन अंजाम हमेशा सच्चाई के पक्ष में रहा।
📜 आयत 37-41 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 39
सूरा यूनुस आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये लोग लाते तो क्या) बल्कि (उलटे) जिसके जानने पर…सूरा आयत 39/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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