यूनुस · 99/109
अनुवाद उच्चारण — यूनुस
وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَآمَنَ مَن فِي الْأَرْضِ كُلُّهُمْ جَمِيعًا ۚ أَفَأَنتَ تُكْرِهُ النَّاسَ حَتَّىٰ يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ ۝٩٩
Wa law shaaa`a Rabbuka la aamana man fil ardi kulluhum jamee`aa; afa anta tukrihun naasa hattaa yakoonoo mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब ईमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब ईमानदार हो जाएँ हालॉकि किसी शख़्स को ये एख्तेयार नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَآمَنَ — अवश्य ईमान लाते।
  • تُكْرِهُ — तुम विवश करो, ज़बरदस्ती करो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! अगर आपका रब चाहता तो धरती में जितने भी लोग हैं, वे सब के सब मिलकर ईमान ले आते। लेकिन अल्लाह ने अपनी हिकमत से ऐसा नहीं चाहा, क्योंकि उसने लोगों को इख़्तियार (स्वतंत्र इच्छा) दी है, ताकि वे अपनी मर्ज़ी से ईमान लाएँ या इनकार करें। अल्लाह अपनी इंसाफ़ भरी हिकमत से जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और अपने फज़ल (कृपा) से जिसे चाहता है हिदायत देता है। यह बात आपके बस में नहीं है कि आप लोगों को ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर कर दें। हिदायत देना तो पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है, और आपका काम केवल पैग़ाम पहुँचाना है। इसलिए आप इस बात का दुख न करें कि लोग ईमान क्यों नहीं ला रहे, क्योंकि ईमान दिल की वह चीज़ है जो सिर्फ़ अल्लाह की तौफ़ीक़ से आती है, किसी के ज़ोर-ज़बरदस्ती से नहीं आती।

फ़ायदे:

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि हिदायत देना सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। हमारा काम केवल अच्छी बात पहुँचाना और नेकी की दावत देना है, नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
  2. इस्लाम में ज़बरदस्ती की कोई गुंजाइश नहीं है। ईमान दिल का मामला है, जो मुहब्बत और यक़ीन से पैदा होता है, डर या दबाव से नहीं।
  3. अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखना चाहिए। कुछ लोगों का ईमान न लाना भी अल्लाह की योजना का हिस्सा है, और हमें उसकी रज़ा पर संतुष्ट रहना चाहिए।
  4. यह आयत दावत के काम में लगे लोगों के लिए बड़ी तसल्ली है कि अगर लोग न मानें तो निराश न हों, क्योंकि आपका इनाम आपके प्रयास पर है, न कि नतीजे पर।
  5. अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ का पता चलता है — वह जिसे चाहता है अपने फज़ल से हिदायत देता है और जिसे चाहता है अपनी इंसाफ़ी से छोड़ देता है, और उसका हर फ़ैसला हिकमत से भरा होता है।


📜 आयत 97-101 — यूनुस

97وَلَوْ جَاءَتْهُمْ كُلُّ آيَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान न लाएंगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो
98فَلَوْلَا كَانَتْ قَرْيَةٌ آمَنَتْ فَنَفَعَهَا إِيمَانُهَا إِلَّا قَوْمَ يُونُسَ لَمَّا آمَنُوا كَشَفْنَا عَنْهُمْ عَذَابَ الْخِزْيِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَمَتَّعْنَاهُمْ إِلَىٰ حِينٍ
कोई बस्ती ऐसी क्यों न हुई कि ईमान क़ुबूल करती तो उसको उसका ईमान फायदे मन्द होता हाँ यूनूस की क़ौम जब (अज़ाब देख कर) ईमान लाई तो हमने दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी में उनसे रुसवाई का अज़ाब दफा कर दिया और हमने उन्हें एक ख़ास वक्त तक चैन करने दिया
99وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَآمَنَ مَن فِي الْأَرْضِ كُلُّهُمْ جَمِيعًا ۚ أَفَأَنتَ تُكْرِهُ النَّاسَ حَتَّىٰ يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब ईमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब ईमानदार हो जाएँ हालॉकि किसी शख़्स को ये एख्तेयार नहीं
100وَمَا كَانَ لِنَفْسٍ أَن تُؤْمِنَ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۚ وَيَجْعَلُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يَعْقِلُونَ
कि बगैर ख़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो लोग (उसूले दीन में) अक़ल से काम नहीं लेते उन्हीं लोगें पर ख़ुदा (कुफ़्र) की गन्दगी डाल देता है
101قُلِ انظُرُوا مَاذَا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۚ وَمَا تُغْنِي الْآيَاتُ وَالنُّذُرُ عَن قَوْمٍ لَّا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
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अनुवाद — यूनुस 99

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Tuesday, August 18, 2026

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