Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا كَانَ لِنَفْسٍ: किसी प्राणी/आत्मा के लिए संभव नहीं है।
- بِإِذْنِ اللَّهِ: अल्लाह की अनुमति, इच्छा और तौफ़ीक़ (सहायता) के बिना।
- الرِّجْسَ: यहाँ अर्थ है यातना, अपमान और गंदगी (शिर्क और पाप का मैल)।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत ईमान की वास्तविकता को स्पष्ट करती है कि किसी भी व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं है कि वह अपनी इच्छा या प्रयास से अकेले ईमान ले आए, जब तक कि अल्लाह स्वयं उसे ईमान लाने की अनुमति न दे। ईमान पूर्ण रूप से अल्लाह की इच्छा, उसके ज्ञान और उसकी तौफ़ीक़ (सहायता) पर निर्भर है। अल्लाह जिसे चाहता है, हिदायत देता है और जिसे चाहता है, उसे उसके अपने हठ और अहंकार के कारण गुमराह छोड़ देता है। इसलिए, हे नबी! आप उन लोगों के पीछे अपनी जान खपा कर हलाक न हों जो ईमान नहीं ला रहे हैं, क्योंकि आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है, जबकि दिलों को बदलने का काम केवल अल्लाह के हाथ में है।
फिर अल्लाह ने बताया कि वह "रिज्स" (यातना, अपमान और गंदगी) उन लोगों पर डालता है जो अक़्ल (बुद्धि) का इस्तेमाल नहीं करते, यानी जो अल्लाह के आदेशों और निषेधों पर विचार नहीं करते, उसकी निशानियों पर ध्यान नहीं देते, और अपनी समझ को हठ और अंधानुकरण के आगे बेच देते हैं। ऐसे लोगों पर अल्लाह की ओर से यातना और अपमान अनिवार्य हो जाता है। यहाँ "रिज्स" का अर्थ यातना, अपमान, या शिर्क और पाप की गंदगी से लिया गया है, जो उनके दिलों पर चढ़ जाती है और उन्हें सत्य देखने से अंधा कर देती है।
आयत से लाभ और शिक्षाएँ:
- ईमान अल्लाह की देन है: यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान केवल अल्लाह की कृपा और सहायता से मिलता है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से हिदायत की दुआ करनी चाहिए और अपने अच्छे कर्मों पर घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह सब उसी की तौफ़ीक़ से है।
- प्रचार में संतुलन: दावत और प्रचार का काम करते समय हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी ज़िम्मेदारी केवल संदेश पहुँचाना है, लोगों को ईमान लाने पर मजबूर करना या उनके इनकार पर अत्यधिक दुखी होना हमारा काम नहीं है। यह अल्लाह का काम है, जो अपनी बुद्धि के अनुसार करता है।
- अक़्ल का इस्तेमाल ईमान की कुंजी है: अल्लाह ने उन लोगों को यातना की धमकी दी है जो अक़्ल का इस्तेमाल नहीं करते। यह हमें सिखाता है कि इस्लाम अंधानुकरण का धर्म नहीं है, बल्कि यह बुद्धि, चिंतन और विचार को बहुत महत्व देता है। जो व्यक्ति अल्लाह की निशानियों पर विचार करता है, वह सत्य तक पहुँचता है, और जो विचार करना छोड़ देता है, वह गुमराही में डूब जाता है।
- अल्लाह की रहमत की उम्मीद: यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जब तक अल्लाह किसी को हिदायत न दे, कोई ईमान नहीं ला सकता। इसलिए हमें अपने उन प्रियजनों के लिए जो अभी तक ईमान नहीं लाए हैं, निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके लिए दुआ करते रहना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की रहमत और हिदायत का दरवाज़ा हमेशा खुला है।
📜 आयत 98-102 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 100
सूरा यूनुस आयत 100 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि बगैर ख़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो…सूरा आयत 100/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 98–102. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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