हूद · 120/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ الرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِ فُؤَادَكَ ۚ وَجَاءَكَ فِي هَٰذِهِ الْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ ۝١٢٠
Wa kullan naqussu `alaika min ambaaa`ir Rusuli maa nusabbitu bihee fu`aadak; wa jaaa`aka fee haazihil haqqu wa maw`izatunw wa zikraa lilmu` mineen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) पैग़म्बरों के हालत में से हम उन तमाम क़िस्सों को तुम से बयान किए देते हैं जिनसे हम तुम्हारे दिल को मज़बूत कर देगें और उन्हीं क़िस्सों में तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) और मोमिनीन के लिए नसीहत और याद दहानी भी आ गई
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُثَبِّتُ: हम मज़बूत करते हैं, स्थिर रखते हैं।
  • فُؤَادَكَ: तुम्हारा दिल (अर्थात् तुम्हारा हृदय)।
  • مَوْعِظَةٌ: नसीहत, उपदेश, जिससे दिल में ख़ौफ़ पैदा हो।
  • ذِكْرَى: याद दिलाना, चेतावनी, जिससे ईमानवाले सीख लें।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! हम आपसे पहले भेजे गए सभी रसूलों की वे सारी ख़बरें आपको सुनाते हैं, जिनकी आपको आवश्यकता है। इसका उद्देश्य केवल आपको जानकारी देना नहीं है, बल्कि इसका मक़सद यह है कि हम आपके दिल को मज़बूत करें, आपके सीने को खोलें और आपको उस कठिन राह पर स्थिर रखें जो रिसालत (पैग़म्बरी) के दायित्वों को निभाने के लिए ज़रूरी है। जब आप पिछले नबियों की मुश्किलों, उनके सब्र और उनकी क़ौमों के अंजाम को सुनते हैं, तो आपका दिल तसल्ली पाता है और आपका यक़ीन और बढ़ता है।

इस सूरह (हूद) में जो कुछ भी बयान किया गया है, उसमें आपके पास सच्चाई आ गई है — वह सच्चाई जो बिल्कुल स्पष्ट है, जिसमें कोई शक नहीं। यह सच्चाई उन लोगों के लिए एक सख़्त नसीहत है जो कुफ़्र और इनकार पर अड़े हुए हैं, ताकि वे अपने अंजाम से डरें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ। साथ ही, यह उन मोमिनों के लिए एक याद दिलाने वाली चीज़ है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखते हैं — वे इससे सीख लेते हैं, अपने ईमान को मज़बूत करते हैं और अल्लाह की राह पर चलते रहते हैं।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह तआला अपने नबी को पिछली उम्मतों के हालात सुनाकर उनका दिल मज़बूत करता है — इससे हमें यह सीख मिलती है कि मुश्किल वक़्त में अल्लाह की किताब और पिछले अनुभवों से ताक़त हासिल करनी चाहिए।
  2. क़ुरआन सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि हर दौर के लिए रहनुमा है — इसमें सच्चाई, नसीहत और याद दिलाने का समावेश है।
  3. जो लोग ईमान लाते हैं, वे क़ुरआन से सीख लेते हैं और उनका दिल अल्लाह की याद से सुकून पाता है — यही ईमान की निशानी है।
  4. अल्लाह का रास्ता कठिन है, लेकिन वह अपने बंदों को अकेला नहीं छोड़ता — वह उन्हें ताक़त और सब्र देता है, बशर्ते वे उस पर भरोसा करें।
🎧 सुनें

📜 आयत 118-122 — हूद

118وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ النَّاسَ أُمَّةً وَاحِدَةً ۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ
और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो बेशक तमाम लोगों को एक ही (किस्म की) उम्मत बना देता (मगर) उसने न चाहा इसी (वजह से) लोग हमेशा आपस में फूट डाला करेगें
119إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ ۗ وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
मगर जिस पर तुम्हारा परवरदिगार रहम फरमाए और इसलिए तो उसने उन लोगों को पैदा किया (और इसी वजह से तो) तुम्हारा परवरदिगार का हुक्म क़तई पूरा होकर रहा कि हम यक़ीनन जहन्नुम को तमाम जिन्नात और आदमियों से भर देगें
120وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ الرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِ فُؤَادَكَ ۚ وَجَاءَكَ فِي هَٰذِهِ الْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
और (ऐ रसूल) पैग़म्बरों के हालत में से हम उन तमाम क़िस्सों को तुम से बयान किए देते हैं जिनसे हम तुम्हारे दिल को मज़बूत कर देगें और उन्हीं क़िस्सों में तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) और मोमिनीन के लिए नसीहत और याद दहानी भी आ गई
121وَقُل لِّلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنَّا عَامِلُونَ
और (ऐ रसूल) जो लोग ईमान नहीं लाते उनसे कहो कि तुम बजाए ख़ुद अमल करो हम भी कुछ (अमल) करते हैं
122وَانتَظِرُوا إِنَّا مُنتَظِرُونَ
(नतीजे का) तुम भी इन्तज़ार करो हम (भी) मुन्तिज़िर है
हूदकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — हूद 120

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Tuesday, August 18, 2026

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