हूद · 119/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ ۗ وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ ۝١١٩
Illaa mar rahima Rabbuk; wa lizaalika khalaqahum; wa tammat Kalimatu Rabbika la amla`ana Jahannama minal jinnati wannnaasi ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
मगर जिस पर तुम्हारा परवरदिगार रहम फरमाए और इसलिए तो उसने उन लोगों को पैदा किया (और इसी वजह से तो) तुम्हारा परवरदिगार का हुक्म क़तई पूरा होकर रहा कि हम यक़ीनन जहन्नुम को तमाम जिन्नात और आदमियों से भर देगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ: परन्तु जिस पर आपका रब दया करे (उसे हिदायत देकर)।
  • وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ: और इसी (दया अथवा भिन्नता) के लिए उसने उन्हें पैदा किया।
  • وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ: और आपके रब की बात पूरी हो गई (उसका फैसला लागू हो गया)।
  • لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ: कि मैं जहन्नम को भर दूँगा।
  • مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ: जिन्नात और इंसानों में से सब (गुनाहगारों) से।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि लोगों में मतभेद और अलग-अलग राहें चुनना उसकी मर्ज़ी और हिकमत से है। हालाँकि, जिन लोगों पर अल्लाह की खास रहमत होती है, वे हक़ (सत्य) पर एक हो जाते हैं और मतभेद से बच जाते हैं। यानी जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी, उन्होंने तौहीद (एकेश्वरवाद) और रसूलों के पैग़ाम को क़ुबूल किया और वे उस पर इत्तिफ़ाक़ रखते हैं।

अल्लाह ने लोगों को इसी हिकमत से पैदा किया कि उनमें से कुछ नेक और सईद (भाग्यशाली) होंगे और कुछ शकी (अभागे) होंगे। यह अल्लाह की क़ुदरत और अदल का तक़ाज़ा है कि हर इंसान अपने अमल के हिसाब से जज़ा पाए। यही वजह है कि अल्लाह ने इंसानों को इख्तियार (स्वतंत्र इच्छा) दी ताकि वे अपनी मर्ज़ी से नेकी या बुराई चुनें।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उसका फैसला पहले ही लिखा जा चुका है और उसकी बात पूरी होकर रहेगी कि वह जहन्नम को जिन्नात और इंसानों में से उन सबसे भर देगा जिन्होंने शैतान की पैरवी की और हिदायत क़ुबूल नहीं की। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है जो कभी बदलती नहीं।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की रहमत ही हिदायत का ज़रिया है: यह आयत हमें सिखाती है कि सच्ची हिदायत अल्लाह की रहमत से मिलती है। इसलिए हमें हमेशा अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हम पर रहम फ़रमाए और हमें सीधी राह पर चलाए।
  2. मतभेद अल्लाह की हिकमत है: लोगों में अलग-अलग राय और राहें होना अल्लाह की मर्ज़ी से है, लेकिन हमें हक़ की तलाश करनी चाहिए और उस पर इत्तिफ़ाक़ करना चाहिए, क्योंकि हक़ एक ही होता है।
  3. अल्लाह का फैसला अटल है: अल्लाह ने जो वादा किया है वह ज़रूर पूरा होगा। इससे हमें अल्लाह के अदल और उसकी क़ुदरत पर यक़ीन मज़बूत होता है।
  4. अमल की अहमियत: यह आयत हमें बताती है कि हर इंसान अपने अमल के लिए ज़िम्मेदार है। हमें अपनी ज़िंदगी में नेकी और तक़वा अपनाना चाहिए ताकि हम अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और जहन्नम की आग से बचें।
  5. शैतान से बचने की ताकीद: जो लोग शैतान की पैरवी करते हैं, उनका अंजाम जहन्नम है। इसलिए हमें शैतान के वसवसों से बचना चाहिए और अल्लाह की इबादत और उसके रसूल की सुन्नत पर अमल करना चाहिए।


📜 आयत 117-121 — हूद

117وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا مُصْلِحُونَ
और तुम्हारा परवरदिगार ऐसा (बे इन्साफ) कभी न था कि बस्तियों को जबरदस्ती उजाड़ देता और वहाँ के लोग नेक चलन हों
118وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ النَّاسَ أُمَّةً وَاحِدَةً ۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ
और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो बेशक तमाम लोगों को एक ही (किस्म की) उम्मत बना देता (मगर) उसने न चाहा इसी (वजह से) लोग हमेशा आपस में फूट डाला करेगें
119إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ ۗ وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
मगर जिस पर तुम्हारा परवरदिगार रहम फरमाए और इसलिए तो उसने उन लोगों को पैदा किया (और इसी वजह से तो) तुम्हारा परवरदिगार का हुक्म क़तई पूरा होकर रहा कि हम यक़ीनन जहन्नुम को तमाम जिन्नात और आदमियों से भर देगें
120وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ الرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِ فُؤَادَكَ ۚ وَجَاءَكَ فِي هَٰذِهِ الْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
और (ऐ रसूल) पैग़म्बरों के हालत में से हम उन तमाम क़िस्सों को तुम से बयान किए देते हैं जिनसे हम तुम्हारे दिल को मज़बूत कर देगें और उन्हीं क़िस्सों में तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) और मोमिनीन के लिए नसीहत और याद दहानी भी आ गई
121وَقُل لِّلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنَّا عَامِلُونَ
और (ऐ रसूल) जो लोग ईमान नहीं लाते उनसे कहो कि तुम बजाए ख़ुद अमल करो हम भी कुछ (अमल) करते हैं
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अनुवाद — हूद 119

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Tuesday, August 18, 2026

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