مَكَانَتِكُمْ: तुम्हारी अपनी स्थिति, तुम्हारे अपने तरीके या रास्ते पर।
عَامِلُونَ: हम भी काम करने वाले हैं, हम भी अपने तरीके पर चल रहे हैं।
व्याख्या:
ऐ नबी! आप उन लोगों से कह दीजिए जो अल्लाह पर ईमान नहीं रखते और उसकी वहदानियत (एकता) को नहीं मानते: "तुम अपनी जगह और अपने तरीके पर काम करते रहो, यानी जिस राह पर हो—सत्य का विरोध करना, नबी को सताना और उसकी बात मानने वालों को तकलीफ देना—उसी पर जुटे रहो। हम भी अपनी जगह और अपने तरीके पर काम कर रहे हैं, यानी अपने दीन पर साबित क़दम रहना, उसकी दावत देना और उस पर सब्र करना। फिर तुम अपने काम का अंजाम देखो, हम भी अपने काम का अंजाम देखेंगे।" यह बात उनके लिए एक सख्त चेतावनी और धमकी है कि आखिरकार सच्चाई ही जीतेगी और झूठ मिट जाएगा।
फ़ायदे:
इस आयत से मालूम होता है कि सत्य के दावेदार को कभी डरना या घबराना नहीं चाहिए, चाहे सामने कितनी ही बड़ी ताकत क्यों न हो। हमें अपने काम पर भरोसा रखना चाहिए और अल्लाह पर तवक्कुल करना चाहिए।
यह सिखाती है कि बुराई और झूठ का रास्ता चाहे कितना ही आसान या फायदेमंद लगे, लेकिन अंजाम बुरा ही होता है। इसलिए इंसान को सब्र और सच्चाई पर कायम रहना चाहिए।
यह आयत मुसलमानों को हिम्मत देती है कि जब दुश्मन अपनी चालें चलें, तो हमें अपने ईमान और अमल में कोई कमी नहीं आने देनी चाहिए। हमारा काम अल्लाह के हुक्म के मुताबिक चलता रहेगा और आखिरकार कामयाबी हमारी ही होगी।
इसमें एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह अपने नबी और उसके साथियों के साथ है, और जो लोग सच्चाई पर हैं, उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यह चीज़ मोमिन के दिल को तसल्ली और सुकून देती है।
मगर जिस पर तुम्हारा परवरदिगार रहम फरमाए और इसलिए तो उसने उन लोगों को पैदा किया (और इसी वजह से तो) तुम्हारा परवरदिगार का हुक्म क़तई पूरा होकर रहा कि हम यक़ीनन जहन्नुम को तमाम जिन्नात और आदमियों से भर देगें
और (ऐ रसूल) पैग़म्बरों के हालत में से हम उन तमाम क़िस्सों को तुम से बयान किए देते हैं जिनसे हम तुम्हारे दिल को मज़बूत कर देगें और उन्हीं क़िस्सों में तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) और मोमिनीन के लिए नसीहत और याद दहानी भी आ गई
और सारे आसमान व ज़मीन की पोशीदा बातों का इल्म ख़ास ख़ुदा ही को है और उसी की तरफ हर काम हिर फिर कर लौटता है तुम उसी की इबादत करो और उसी पर भरोसा रखो और जो कुछ तुम लोग करते हो उससे ख़ुदा बेख़बर नहीं
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