हूद · 94/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ ۝٩٤
Wa lammaa jaaa`a amrunaa najjainaa shu`aibanw wal lazeena aamanoo ma`ahoo birahmatim minnaa wa akhazatil lazeena zalamus saihatu fa asbahoo fee diyaarihim jaasimeen
📖 हिंदी अर्थ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الصَّيْحَةُ: अत्यंत भयानक और प्रचंड आवाज़, जो आकाश से आई और उन्हें विनष्ट कर गई।
  • جَاثِمِينَ: मृत अवस्था में मुँह के बल गिरे हुए, बेजान, इस तरह कि उनके चेहरे ज़मीन से लगे हुए थे और उनमें कोई हरकत नहीं थी।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हमारा आदेश (अज़ाब का) आया, तो हमने अपनी विशेष दया और कृपा से अपने नबी शुऐब (अलैहिस्सलाम) को और उन लोगों को, जो उन पर ईमान लाए थे, उस विनाश से बचा लिया। यह बचाव उनके अपने कर्मों का फल नहीं था, बल्कि अल्लाह की ओर से एक विशेष रहमत थी। इसके बाद उन ज़ालिमों (अत्याचारियों) को, जिन्होंने शुऐब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और सत्य का इनकार किया, एक भयानक चीख़ (आकाशीय आवाज़) ने आ पकड़ा। यह आवाज़ इतनी भयावह थी कि उनके प्राण निकल गए और वे सुबह होते-होते अपने ही घरों में मुँह के बल गिरे हुए मृत पाए गए। उनके शरीर बेजान होकर ज़मीन पर पड़े थे, न कोई हरकत थी और न कोई आहट। यह उनके अत्याचार और सत्य के विरोध का परिणाम था।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की रहमत उसके नेक बंदों पर हमेशा होती है, और वह अपने ईमानवालों को मुसीबतों और अज़ाब से बचाता है। यह ईमानवालों के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि वे अकेले नहीं हैं, बल्कि अल्लाह की निगरानी और सुरक्षा में हैं।
  2. अत्याचार और ज़ुल्म का अंजाम हमेशा विनाश होता है। चाहे ज़ालिम कितना भी ताकतवर क्यों न हो, अल्लाह का अज़ाब उसे ज़रूर पकड़ता है। यह हमें सिखाता है कि हमें कभी ज़ुल्म नहीं करना चाहिए और हमेशा सच्चाई और न्याय पर क़ायम रहना चाहिए।
  3. अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब उसका आदेश आता है, तो कोई उसे टाल नहीं सकता। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की नाफ़रमानी से बचे और उसकी रहमत का तालिब बने।
  4. यह आयत दुनिया की बेहक़ीक़त (नाशवानता) को भी दर्शाती है। जो लोग दुनिया के माल और ताकत पर इतराते हैं, वे एक पल में मिट्टी में मिल सकते हैं। इसलिए सच्ची कामयाबी अल्लाह की रहमत और उसके दीन पर चलने में है।
🎧 सुनें

📜 आयत 92-96 — हूद

92قَالَ يَا قَوْمِ أَرَهْطِي أَعَزُّ عَلَيْكُم مِّنَ اللَّهِ وَاتَّخَذْتُمُوهُ وَرَاءَكُمْ ظِهْرِيًّا ۖ إِنَّ رَبِّي بِمَا تَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम क्या मेरे कबीले का दबाव तुम पर ख़ुदा से भी बढ़ कर है (कि तुम को उसका ये ख्याल) और ख़ुदा को तुम लोगों ने अपने वास्ते पीछे डाल दिया है बेशक मेरा परवरदिगार तुम्हारे सब आमाल पर अहाता किए हुए है
93وَيَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَاذِبٌ ۖ وَارْتَقِبُوا إِنِّي مَعَكُمْ رَقِيبٌ
और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो मैं भी (बजाए खुद) कुछ करता हू अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है जा उसको (लोगों की नज़रों में) रुसवा कर देगा और (ये भी मालूम हो जाएगा कि) कौन झूठा है तुम भी मुन्तिज़र रहो मैं भी तुम्हारे साथ इन्तेज़ार करता हूँ
94وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए
95كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई
96وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर
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अनुवाद — हूद 94

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Tuesday, August 18, 2026

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