हूद · 95/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ ۝٩٥
Ka-al-lam yaghnaw feehaaa; alaa bu`dal li Madyana Kamaa ba`idat Samood
📖 हिंदी अर्थ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا: गोया वे उसमें (अपने घरों में) कभी बसे ही नहीं थे।
  • بُعْدًا: दूरी, विनाश, रहमत से महरूमी।
  • مَدْيَنَ: मद्यन (शुएब अलैहिस्सलाम की क़ौम)।
  • ثَمُودُ: समूद (सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम)।

तफ़सीर:

यह आयत मद्यन की क़ौम के अंजाम को बयान कर रही है, जब उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे अपने घरों में इस हालत में गिरे पड़े थे कि गोया वे वहाँ कभी आबाद ही नहीं थे। उनकी तमाम ताक़त, उनकी इमारतें, उनकी दौलत — सब कुछ मिट गया। यह मंज़र उन लोगों के लिए सबक़ है जो दुनिया की ज़िंदगी पर इतराते हैं और अल्लाह के हुक्म को भूल जाते हैं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! मद्यन पर दूर होने (रहमत से महरूमी) की लानत है, जैसे समूद दूर हो गई थी।" यानी जिस तरह समूद की क़ौम को अल्लाह की रहमत से निकाल दिया गया और उनका नामो-निशान मिटा दिया गया, उसी तरह मद्यन वालों का भी हश्र हुआ। दोनों क़ौमों ने अपने नबियों को झुठलाया, दोनों ने सरकशी और ज़ुल्म में हद से गुज़र गए, और दोनों पर अल्लाह का अज़ाब आया। यहाँ उनका ज़िक्र एक साथ इसलिए किया गया कि उनका अंजाम एक जैसा था।


फ़ायदे (सबक़):

  1. दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है: यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की चमक-दमक और ताक़त कुछ दिनों की मेहमान है। जो लोग आज अपने घरों और दौलत पर इतरा रहे हैं, कल उनका नामो-निशान तक मिट सकता है।
  2. अल्लाह की पकड़ से बचना: जो क़ौमें नबियों को झुठलाती हैं और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ती हैं, उनका अंजाम हमेशा बर्बादी होता है। यह क़ुरआन का स्थायी क़ानून है।
  3. इबरत का पैग़ाम: जब हम पुरानी क़ौमों के हालात पर ग़ौर करते हैं, तो हमें अपनी ज़िंदगी को सँवारने का मौक़ा मिलता है। यह आयत हमें आगाह करती है कि हम अपने आख़िरत के सफ़र को संवारें और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचें।
  4. रहमत की क़द्र करना: अल्लाह की रहमत और हिदायत सबसे बड़ी नेमत है। जो इसे ठुकरा देता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में नुक़सान उठाता है। मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की रहमत का शुक्र अदा करे और उसके हुक्मों पर अमल करे।


📜 आयत 93-97 — हूद

93وَيَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَاذِبٌ ۖ وَارْتَقِبُوا إِنِّي مَعَكُمْ رَقِيبٌ
और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो मैं भी (बजाए खुद) कुछ करता हू अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है जा उसको (लोगों की नज़रों में) रुसवा कर देगा और (ये भी मालूम हो जाएगा कि) कौन झूठा है तुम भी मुन्तिज़र रहो मैं भी तुम्हारे साथ इन्तेज़ार करता हूँ
94وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए
95كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई
96وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और बेशक हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलील देकर
97إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ
फिरऔन और उसके अम्र (सरदारों) के पास (पैग़म्बर बना कर) भेजा तो लोगों ने फिरऔन ही का हुक्म मान लिया (और मूसा की एक न सुनी) हालॉकि फिरऔन का हुक्म कुछ जॅचा समझा हुआ न था
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
95आयत

अनुवाद — हूद 95

सूरा हूद आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में…

सूरा आयत 95/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए