हूद · 93/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَيَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَاذِبٌ ۖ وَارْتَقِبُوا إِنِّي مَعَكُمْ رَقِيبٌ ۝٩٣
Wa yaa qawmi` maloo `alaa makaanatikum innee `aamilun sawfa ta`lamoona mai yaateehi `azaabuny yukhzeehi wa man huwa kaazib; wartaqibooo innnee ma`akum raqeeb
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो मैं भी (बजाए खुद) कुछ करता हू अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है जा उसको (लोगों की नज़रों में) रुसवा कर देगा और (ये भी मालूम हो जाएगा कि) कौन झूठा है तुम भी मुन्तिज़र रहो मैं भी तुम्हारे साथ इन्तेज़ार करता हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَكَانَتِكُمْ: अपनी शक्ति, सामर्थ्य और अपने तरीके पर।
  • يُخْزِيهِ: जो उसे अपमानित करे और रुसवा कर दे।
  • وَارْتَقِبُوا: इंतज़ार करो, प्रतीक्षा करो।
  • رَقِيبٌ: देखने वाला, निगरानी करने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को नसीहत करते हुए कहा: "ऐ मेरी क़ौम! तुम अपनी शक्ति, अपने तरीके और अपनी स्थिति के अनुसार जो चाहे करते रहो, मैं भी अपने तरीके और अपने रब की दी हुई ताक़त के साथ अपना काम करता रहूँगा। मैं तुम्हें एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाता रहूँगा और अपने प्रयास में डटा रहूँगा।" फिर उन्होंने उन्हें चेतावनी दी: "अनिवार्य रूप से तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि हममें से किस पर वह अज़ाब (यातना) आता है जो उसे अपमानित करेगा, और कौन झूठा है — मैं या तुम। यह बात सामने आ जाएगी कि सच्चा कौन है और झूठा कौन।" अंत में उन्होंने कहा: "तुम इंतज़ार करो, मैं भी तुम्हारे साथ इंतज़ार करता हूँ। मैं उस अज़ाब का इंतज़ार कर रहा हूँ जो तुम पर आएगा।" यह उनके लिए एक सख्त धमकी और कड़ी चेतावनी थी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. सच्चाई पर डटे रहने में कोई डर नहीं होता — नबी और सच्चे लोग अपने विरोधियों के सामने भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं।
  2. अच्छाई की ओर बुलाने वाले को अपने प्रयास में निरंतरता रखनी चाहिए, चाहे सामने वाले कितनी ही ज़िद और विरोध क्यों न करें।
  3. अंतिम फैसला अल्लाह के हाथ में है — सच्चाई और झूठ का भेद खुलकर सामने आएगा, और यही इस्लाम की सबसे बड़ी शक्ति है।
  4. अल्लाह के नबी अपनी क़ौम की बुराइयों से निराश नहीं होते, बल्कि उन्हें साफ़-साफ़ चेतावनी देते हैं — यही सच्चे नसीहत करने वाले का तरीका है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम सच्चाई पर हों, तो हमें अपने विरोधियों की धमकियों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अल्लाह पर भरोसा रखते हुए अपने काम में लगे रहना चाहिए।


📜 आयत 91-95 — हूद

91قَالُوا يَا شُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ كَثِيرًا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَاكَ فِينَا ضَعِيفًا ۖ وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَاكَ ۖ وَمَا أَنتَ عَلَيْنَا بِعَزِيزٍ
और वह लोग कहने लगे ऐ शुएब जो बाते तुम कहते हो उनमें से अक्सर तो हमारी समझ ही में नहीं आयी और इसमें तो शक नहीं कि हम तुम्हें अपने लोगों में बहुत कमज़ोर समझते है और अगर तुम्हारा क़बीला न होता तो हम तुम को (कब का) संगसार कर चुके होते और तुम तो हम पर किसी तरह ग़ालिब नहीं आ सकते
92قَالَ يَا قَوْمِ أَرَهْطِي أَعَزُّ عَلَيْكُم مِّنَ اللَّهِ وَاتَّخَذْتُمُوهُ وَرَاءَكُمْ ظِهْرِيًّا ۖ إِنَّ رَبِّي بِمَا تَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम क्या मेरे कबीले का दबाव तुम पर ख़ुदा से भी बढ़ कर है (कि तुम को उसका ये ख्याल) और ख़ुदा को तुम लोगों ने अपने वास्ते पीछे डाल दिया है बेशक मेरा परवरदिगार तुम्हारे सब आमाल पर अहाता किए हुए है
93وَيَا قَوْمِ اعْمَلُوا عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّي عَامِلٌ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَاذِبٌ ۖ وَارْتَقِبُوا إِنِّي مَعَكُمْ رَقِيبٌ
और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो मैं भी (बजाए खुद) कुछ करता हू अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि किस पर अज़ाब नाज़िल होता है जा उसको (लोगों की नज़रों में) रुसवा कर देगा और (ये भी मालूम हो जाएगा कि) कौन झूठा है तुम भी मुन्तिज़र रहो मैं भी तुम्हारे साथ इन्तेज़ार करता हूँ
94وَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ الَّذِينَ ظَلَمُوا الصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا فِي دِيَارِهِمْ جَاثِمِينَ
और जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने शुएब और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से बचा लिया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया था उनको एक चिंघाड़ ने ले डाला फिर तो वह सबके सब अपने घरों में औंधे पड़े रह गए
95كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا فِيهَا ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ
(और वह ऐसे मर मिटे) कि गोया उन बस्तियों में कभी बसे ही न थे सुन रखो कि जिस तरह समूद (ख़ुदा की बारगाह से) धुत्कारे गए उसी तरह अहले मदियन की भी धुत्कारी हुई
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सूरा हूद आयत 93 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरी क़ौम तुम अपनी जगह (जो चाहो) करो…

सूरा आयत 93/123 — हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: हूद सुनें, हूद अनुवाद, हूद mp3, हूद pdf. आयत 91–95. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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