Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- هَمَّتْ بِهِ: उस (ज़ुलैख़ा) के मन में यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के साथ बुरे इरादे का ख़याल आया और वह उसकी तरफ़ झुकी।
- هَمَّ بِهَا: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के दिल में भी (इंसानी फ़ितरत के तौर पर) उसका ख़याल गुज़रा, लेकिन वह सिर्फ़ एक दिली ख़याल था, अमल में नहीं आया।
- بُرْهَانَ رَبِّهِ: अपने रब की ओर से एक स्पष्ट निशानी और दलील (जो उन्हें उस काम से रोकने वाली थी)।
- السُّوءَ وَالْفَحْشَاءَ: बुराई और अश्लील काम (यानी ज़िना और उसके माध्यम)।
- الْمُخْلَصِينَ: वे बंदे जिन्हें अल्लाह ने अपनी इबादत और रिसालत के लिए ख़ालिस (विशुद्ध) चुन लिया हो।
तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की उस ऐतिहासिक परीक्षा का ज़िक्र कर रहा है जब मिस्र के अज़ीज़ की पत्नी (ज़ुलैख़ा) ने उन्हें बुरे काम की तरफ़ बुलाया। अल्लाह फ़रमाता है कि उस औरत ने पूरे इरादे और तैयारी के साथ यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की तरफ़ क़दम बढ़ाया और उन्हें अपनी तरफ़ खींचना चाहा। दूसरी तरफ़, यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) भी एक इंसान थे, उनके दिल में भी (इंसानी फ़ितरत के मुताबिक़) उस काम का ख़याल आया — लेकिन यह सिर्फ़ एक दिली ख़याल था, जिस पर इंसान का क़ाबू नहीं होता। अल्लाह ने उन्हें अपनी ओर से एक ऐसा स्पष्ट प्रमाण (बुरहान) दिखाया जिसने उन्हें उस काम से रोक दिया और वह उस बुराई में नहीं पड़े। यह बुरहान अल्लाह की कोई आयत, निशानी या दिली हिदायत थी जो उन्हें अल्लाह का ख़ौफ़ और उसकी निगरानी का एहसास कराती थी।
अल्लाह फ़रमाता है कि हमने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को यह बुरहान इसलिए दिखाया ताकि उनसे बुराई और अश्लील काम (ज़िना) को दूर करें। यह अल्लाह की ख़ास मेहरबानी और हिफ़ाज़त थी। बेशक यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) हमारे उन ख़ालिस बंदों में से थे जिन्हें अल्लाह ने रिसालत और नबुव्वत के लिए चुन रखा था और उन्हें गुनाहों से महफ़ूज़ रखा। उनकी पाकीज़गी अल्लाह की ख़ास अता थी, क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत और उसके हुक्म की ताबेदारी में गुज़ारी थी।
फ़ायदे और सबक़:
- इंसानी फ़ितरत और गुनाह से बचाव: यह आयत सिखाती है कि इंसान के दिल में बुरे ख़यालात का आना कोई गुनाह नहीं है, जब तक कि वह अमल में न आए। असल परीक्षा ख़याल को रोकने और अल्लाह की रज़ा के लिए उसे छोड़ देने में है।
- अल्लाह की हिफ़ाज़त का ज़रिया: जो बंदा अल्लाह से जुड़ा होता है, अल्लाह उसे गुनाह के वक़्त रहमत का बुरहान (निशानी) अता करता है, जो उसे बुराई से रोक देती है। यह अल्लाह की ख़ास मेहरबानी है।
- पाकीज़गी अल्लाह की अता है: हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की पाकीज़गी सिर्फ़ उनकी अपनी कोशिश का नतीजा नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से ख़ास मदद और हिफ़ाज़त थी। यह हमें सिखाता है कि गुनाह से बचने के लिए अल्लाह से दुआ और मदद माँगनी चाहिए।
- परहेज़गारी का इनाम: अल्लाह ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को उनकी परहेज़गारी की वजह से दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त दी। यह साबित करता है कि जो अल्लाह की ख़ातिर किसी गुनाह को छोड़ देता है, अल्लाह उसे उससे बेहतर चीज़ अता करता है।
- इख़लास की अहमियत: अल्लाह ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को "मुख़लिसीन" (ख़ालिस बंदों) में शुमार किया। यह हमें सिखाता है कि इबादत और ज़िंदगी के हर काम में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का पैगाम होना चाहिए, तभी अल्लाह की ख़ास मदद नसीब होती है।
📜 आयत 22-26 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 24
सूरा यूसुफ आयत 24 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़ुलेखा ने तो उनके साथ (बुरा) इरादा कर ही लिया…सूरा आयत 24/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 22–26. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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