अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَاوَدَتْهُ: उससे बुरे काम का प्रस्ताव रखा, बार-बार मांग की।
- هَيْتَ لَكَ: आ जाओ, मेरी तरफ आओ, तैयार हो जाओ।
- مَعَاذَ اللَّهِ: मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।
- مَثْوَايَ: मेरा ठिकाना, मेरी जगह, मेरा आश्रय स्थल।
विस्तृत व्याख्या:
यह आयत हज़रत यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की उस ऐतिहासिक घटना का वर्णन करती है जब मिस्र के अज़ीज़ (प्रधानमंत्री) की पत्नी ने उन्हें बुरे काम के लिए उकसाया। वह महिला जिसके घर में यूसuf (अलैहिस्सलाम) रहते थे, उनके सुंदर रूप और अच्छे आचरण से इतनी प्रभावित हो गई थी कि उसके दिल में उनके लिए गहरा प्रेम पैदा हो गया। उसने अपनी इस भावना को छुपाते हुए एक दिन अवसर देखा और यूसuf को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। उसने सभी दरवाज़े बंद कर दिए ताकि कोई बीच में हस्तक्षेप न कर सके, और फिर स्पष्ट रूप से कहा, "आ जाओ, मेरी तरफ आ जाओ।"
इस कठिन परीक्षा के समय हज़रत यूसuf (अलैहिस्सलाम) ने वही किया जो एक सच्चे ईमानवाले से अपेक्षित है। उन्होंने तुरंत अल्लाह की पनाह माँगी और कहा, "मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।" यह उनकी पवित्रता और ईमान की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मेरा मालिक (अज़ीज़) है, जिसने मुझे अपने घर में सम्मान दिया, मेरी अच्छी देखभाल की और मुझे अपने पास रखा। मैं उसकी अमानत में ख़यानत कैसे कर सकता हूँ? उसके साथ ऐसा विश्वासघात करना मेरे लिए किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ज़ुल्म करते हैं, वे कभी सफल नहीं होते। यहाँ ज़ुल्म से उनका मतलब था कि अल्लाह की नाफ़रमानी करना, अपने मालिक के साथ विश्वासघात करना, और अपनी पवित्रता को खोना — यह सब ज़ुल्म है, और ज़ालिम कभी फलाह (सफलता) नहीं पा सकते।
आध्यात्मिक लाभ और शिक्षाएँ:
- पवित्रता की रक्षा: यह आयत हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति हो, इंसान को अपनी पवित्रता और ईमान की रक्षा करनी चाहिए। अल्लाह की पनाह माँगना सबसे बड़ा हथियार है।
- अमानत में ख़यानत न करना: जिसने हम पर एहसान किया, उसके साथ विश्वासघात करना बहुत बड़ा पाप है। यूसuf (अलैहिस्सलाम) ने अपने मालिक के सम्मान का पूरा ख़याल रखा।
- ज़ुल्म से बचना: जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं या दूसरों के साथ ज़ुल्म करते हैं, वे कभी सच्ची सफलता नहीं पा सकते। सफलता उन्हीं के लिए है जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं।
- परीक्षा में सब्र: यह आयत हमें बताती है कि जीवन में कठिन परीक्षाएँ आती हैं, लेकिन जो अल्लाह पर भरोसा करते हैं और सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यूसuf (अलैहिस्सलाम) को इसी सब्र का फल मिला और अल्लाह ने उन्हें मिस्र का शासक बनाया।
- अल्लाह से मदद माँगना: मुसीबत के समय सबसे पहले अल्लाह की ओर रुख करना चाहिए। "मَعَاذَ اللَّهِ" कहना सिखाता है कि हमें अपनी कमज़ोरी का एहसास करते हुए अल्लाह से सुरक्षा माँगनी चाहिए।
📜 आयत 21-25 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 23
सूरा यूसुफ आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस औरत ज़ुलेखा के घर में यूसुफ रहते थे…सूरा आयत 23/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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