यूसुफ · 23/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَرَاوَدَتْهُ الَّتِي هُوَ فِي بَيْتِهَا عَن نَّفْسِهِ وَغَلَّقَتِ الْأَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۚ قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ رَبِّي أَحْسَنَ مَثْوَايَ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ ۝٢٣
Wa raawadat hul latee huwa fee baitihaa `an nafsihee wa ghallaqatil abwaaba wa qaalat haita lak; qaala ma`aazal laahi innahoo rabbeee ahsana maswaay; innahoo laa yuflihuz-zaalimoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिस औरत ज़ुलेखा के घर में यूसुफ रहते थे उसने अपने (नाजायज़) मतलब हासिल करने के लिए ख़ुद उनसे आरज़ू की और सब दरवाज़े बन्द कर दिए और (बे ताना) कहने लगी लो आओ यूसुफ ने कहा माज़अल्लाह वह (तुम्हारे मियाँ) मेरा मालिक हैं उन्होंने मुझे अच्छी तरह रखा है मै ऐसा ज़ुल्म क्यों कर सकता हूँ बेशक ऐसा ज़ुल्म करने वाले फलाह नहीं पाते
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَاوَدَتْهُ: उससे बुरे काम का प्रस्ताव रखा, बार-बार मांग की।
  • هَيْتَ لَكَ: आ जाओ, मेरी तरफ आओ, तैयार हो जाओ।
  • مَعَاذَ اللَّهِ: मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।
  • مَثْوَايَ: मेरा ठिकाना, मेरी जगह, मेरा आश्रय स्थल।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत हज़रत यूसुफ (अलैहिस्सलाम) की उस ऐतिहासिक घटना का वर्णन करती है जब मिस्र के अज़ीज़ (प्रधानमंत्री) की पत्नी ने उन्हें बुरे काम के लिए उकसाया। वह महिला जिसके घर में यूसuf (अलैहिस्सलाम) रहते थे, उनके सुंदर रूप और अच्छे आचरण से इतनी प्रभावित हो गई थी कि उसके दिल में उनके लिए गहरा प्रेम पैदा हो गया। उसने अपनी इस भावना को छुपाते हुए एक दिन अवसर देखा और यूसuf को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। उसने सभी दरवाज़े बंद कर दिए ताकि कोई बीच में हस्तक्षेप न कर सके, और फिर स्पष्ट रूप से कहा, "आ जाओ, मेरी तरफ आ जाओ।"

इस कठिन परीक्षा के समय हज़रत यूसuf (अलैहिस्सलाम) ने वही किया जो एक सच्चे ईमानवाले से अपेक्षित है। उन्होंने तुरंत अल्लाह की पनाह माँगी और कहा, "मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।" यह उनकी पवित्रता और ईमान की गहराई को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मेरा मालिक (अज़ीज़) है, जिसने मुझे अपने घर में सम्मान दिया, मेरी अच्छी देखभाल की और मुझे अपने पास रखा। मैं उसकी अमानत में ख़यानत कैसे कर सकता हूँ? उसके साथ ऐसा विश्वासघात करना मेरे लिए किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग ज़ुल्म करते हैं, वे कभी सफल नहीं होते। यहाँ ज़ुल्म से उनका मतलब था कि अल्लाह की नाफ़रमानी करना, अपने मालिक के साथ विश्वासघात करना, और अपनी पवित्रता को खोना — यह सब ज़ुल्म है, और ज़ालिम कभी फलाह (सफलता) नहीं पा सकते।


आध्यात्मिक लाभ और शिक्षाएँ:

  1. पवित्रता की रक्षा: यह आयत हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी कठिन परिस्थिति हो, इंसान को अपनी पवित्रता और ईमान की रक्षा करनी चाहिए। अल्लाह की पनाह माँगना सबसे बड़ा हथियार है।
  2. अमानत में ख़यानत न करना: जिसने हम पर एहसान किया, उसके साथ विश्वासघात करना बहुत बड़ा पाप है। यूसuf (अलैहिस्सलाम) ने अपने मालिक के सम्मान का पूरा ख़याल रखा।
  3. ज़ुल्म से बचना: जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं या दूसरों के साथ ज़ुल्म करते हैं, वे कभी सच्ची सफलता नहीं पा सकते। सफलता उन्हीं के लिए है जो अल्लाह के आदेशों का पालन करते हैं।
  4. परीक्षा में सब्र: यह आयत हमें बताती है कि जीवन में कठिन परीक्षाएँ आती हैं, लेकिन जो अल्लाह पर भरोसा करते हैं और सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। यूसuf (अलैहिस्सलाम) को इसी सब्र का फल मिला और अल्लाह ने उन्हें मिस्र का शासक बनाया।
  5. अल्लाह से मदद माँगना: मुसीबत के समय सबसे पहले अल्लाह की ओर रुख करना चाहिए। "मَعَاذَ اللَّهِ" कहना सिखाता है कि हमें अपनी कमज़ोरी का एहसास करते हुए अल्लाह से सुरक्षा माँगनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 21-25 — यूसुफ

21وَقَالَ الَّذِي اشْتَرَاهُ مِن مِّصْرَ لِامْرَأَتِهِ أَكْرِمِي مَثْوَاهُ عَسَىٰ أَن يَنفَعَنَا أَوْ نَتَّخِذَهُ وَلَدًا ۚ وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي الْأَرْضِ وَلِنُعَلِّمَهُ مِن تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ ۚ وَاللَّهُ غَالِبٌ عَلَىٰ أَمْرِهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(यूसुफ को लेकर मिस्र पहुँचे और वहाँ उसे बड़े नफे में बेच डाला) और मिस्र के लोगों से (अज़ीजे मिस्र) जिसने (उनको ख़रीदा था अपनी बीवी (ज़ुलेख़ा) से कहने लगा इसको इज्ज़त व आबरु से रखो अजब नहीं ये हमें कुछ नफा पहुँचाए या (शायद) इसको अपना बेटा ही बना लें और यू हमने यूसुफ को मुल्क (मिस्र) में (जगह देकर) क़ाबिज़ बनाया और ग़रज़ ये थी कि हमने उसे ख्वाब की बातों की ताबीर सिखायी और ख़ुदा तो अपने काम पर (हर तरह के) ग़ालिब व क़ादिर है मगर बहुतेरे लोग (उसको) नहीं जानते
22وَلَمَّا بَلَغَ أَشُدَّهُ آتَيْنَاهُ حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَكَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
और जब यूसुफ अपनी जवानी को पहुँचे तो हमने उनको हुक्म (नुबूवत) और इल्म अता किया और नेकी कारों को हम यूँ ही बदला दिया करते हैं
23وَرَاوَدَتْهُ الَّتِي هُوَ فِي بَيْتِهَا عَن نَّفْسِهِ وَغَلَّقَتِ الْأَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۚ قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ رَبِّي أَحْسَنَ مَثْوَايَ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और जिस औरत ज़ुलेखा के घर में यूसुफ रहते थे उसने अपने (नाजायज़) मतलब हासिल करने के लिए ख़ुद उनसे आरज़ू की और सब दरवाज़े बन्द कर दिए और (बे ताना) कहने लगी लो आओ यूसुफ ने कहा माज़अल्लाह वह (तुम्हारे मियाँ) मेरा मालिक हैं उन्होंने मुझे अच्छी तरह रखा है मै ऐसा ज़ुल्म क्यों कर सकता हूँ बेशक ऐसा ज़ुल्म करने वाले फलाह नहीं पाते
24وَلَقَدْ هَمَّتْ بِهِ ۖ وَهَمَّ بِهَا لَوْلَا أَن رَّأَىٰ بُرْهَانَ رَبِّهِ ۚ كَذَٰلِكَ لِنَصْرِفَ عَنْهُ السُّوءَ وَالْفَحْشَاءَ ۚ إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُخْلَصِينَ
ज़ुलेखा ने तो उनके साथ (बुरा) इरादा कर ही लिया था और अगर ये भी अपने परवरदिगार की दलीन न देख चुके होते तो क़स्द कर बैठते (हमने उसको यूँ बचाया) ताकि हम उससे बुराई और बदकारी को दूर रखे बेशक वह हमारे ख़ालिस बन्दों में से था
25وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ ۚ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَن يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और दोनों दरवाजे क़ी तरफ झपट पड़े और ज़ुलेख़ा (ने पीछे से उनका कुर्ता पकड़ कर खीचा और) फाड़ डाला और दोनों ने ज़ुलेखा के ख़ाविन्द को दरवाज़े के पास खड़ा पाया ज़ुलेख़ा झट (अपने शौहर से) कहने लगी कि जो तुम्हारी बीबी के साथ बदकारी का इरादा करे उसकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि या तो कैद कर दिया जाए
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अनुवाद — यूसुफ 23

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सूरा आयत 23/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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