अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاسْتَبَقَا الْبَابَ: दोनों (यूसुफ़ और ज़ुलेख़ा) दरवाज़े की ओर दौड़े; यूसुफ़ बाहर निकलने के लिए और वह उन्हें रोकने के लिए।
- وَقَدَّتْ: उसने (ज़ुलेख़ा ने) चीर दिया / फाड़ दिया।
- قَمِيصَهُ: उनका (यूसुफ़ का) कुर्ता।
- مِن دُبُرٍ: पीछे की ओर से।
- أَلْفَيَا: दोनों ने पाया।
- سَيِّدَهَا: उसका (ज़ुलेख़ा का) पति (अज़ीज़ मिस्र)।
- لَدَى الْبَابِ: दरवाज़े के पास।
- سُوءًا: बुराई, अर्थात् व्यभिचार।
- عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक यातना (कोड़ों की सज़ा)।
विस्तृत व्याख्या:
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने महसूस किया कि अज़ीज़ की पत्नी उन्हें बुरे काम के लिए उकसा रही है और उन्होंने उसका न्योता ठुकरा दिया, तो वे तुरंत उस कमरे से बाहर निकलने के लिए दरवाज़े की ओर भागे। वह महिला भी उनके पीछे दौड़ी ताकि उन्हें रोक सके। जब वह उन तक न पहुँच सकी, तो उसने उनके कुर्ते को पीछे से पकड़कर ज़ोर से खींचा, जिससे कुर्ता पीछे की ओर से फट गया। इसी हालत में दोनों दरवाज़े के पास पहुँचे और वहाँ उन्हें अज़ीज़ (उस महिला का पति) खड़ा मिला।
यह देखकर उस महिला ने अपनी बेगुनाही जताने और यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बदनाम करने के लिए पलटकर कहा: "जो कोई तुम्हारी पत्नी के साथ बुराई का इरादा करे, उसकी सज़ा इसके अलावा क्या हो सकती है कि उसे क़ैद कर दिया जाए या उसे दर्दनाक यातना दी जाए?" उसने पहले तो कहा कि उसे मार डाला जाए, लेकिन फिर डरते हुए सज़ा को क़ैद या कोड़ों की मार तक सीमित कर दिया, ताकि यूसुफ़ को सज़ा दिलवा सके और अपने पति को यक़ीन दिला सके कि वह बेगुनाह है।
यहाँ उस महिला ने उल्टी बात को सच साबित करने की कोशिश की, जबकि असलियत यह थी कि वह खुद यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बुराई की ओर बुला रही थी। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उसके बहकावे से बचने के लिए भागने की कोशिश की, और यही उनकी पाकदामनी और ईमानदारी का सबूत था।
फ़ायदे और सबक़:
- पाकदामनी की अहमियत: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की यह हरकत हमें सिखाती है कि गुनाह के मौके पर भी इंसान को अल्लाह का डर और अपनी इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करनी चाहिए। भागकर भी उन्होंने गुनाह से बचने की कोशिश की, जो हमारे लिए बेहतरीन नमूना है।
- झूठ और फरेब की हक़ीक़त: यह घटना बताती है कि झूठ और बदनामी करने वाले लोग कितनी चालाकी से सच को छिपाते हैं, लेकिन अल्लाह सब कुछ जानता है और सच को कभी छिपा नहीं रहने देता। जल्द या बाद में सच सामने आ जाता है।
- मुसीबत में सब्र: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को झूठे इल्ज़ाम और क़ैद की सज़ा सहनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सब्र किया। यह हमें सिखाता है कि मुसीबतों में सब्र करने वालों के लिए अल्लाह की तरफ़ से बेहतरीन इनाम होता है।
- अल्लाह की मदद: जब इंसान अल्लाह की ख़ातिर गुनाह से बचता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे बड़ी बुराई से बचाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बाद में अल्लाह ने बड़ा मर्तबा दिया, जो इसी पाकदामनी का नतीजा था।
- बुराई की शुरुआत से बचाव: यह घटना बताती है कि बुराई के रास्ते पर पहला क़दम नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि एक गलती इंसान को कई मुसीबतों में डाल सकती है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने पहले ही क़दम पर इनकार कर दिया, इसलिए वे बच गए।
📜 आयत 23-27 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 25
सूरा यूसुफ आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और दोनों दरवाजे क़ी तरफ झपट पड़े और ज़ुलेख़ा (ने…सूरा आयत 25/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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