यूसुफ · 25/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ ۚ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَن يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝٢٥
Wastabaqal baaba wa qaddat qameesahoo min dubu rinw wa alfayaa saiyidahaa ladal baab; qaalat maa jazaaa`u man araada bi ahlika sooo`an illaaa any-yusjana aw azaabun aleem
📖 हिंदी अर्थ
और दोनों दरवाजे क़ी तरफ झपट पड़े और ज़ुलेख़ा (ने पीछे से उनका कुर्ता पकड़ कर खीचा और) फाड़ डाला और दोनों ने ज़ुलेखा के ख़ाविन्द को दरवाज़े के पास खड़ा पाया ज़ुलेख़ा झट (अपने शौहर से) कहने लगी कि जो तुम्हारी बीबी के साथ बदकारी का इरादा करे उसकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि या तो कैद कर दिया जाए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاسْتَبَقَا الْبَابَ: दोनों (यूसुफ़ और ज़ुलेख़ा) दरवाज़े की ओर दौड़े; यूसुफ़ बाहर निकलने के लिए और वह उन्हें रोकने के लिए।
  • وَقَدَّتْ: उसने (ज़ुलेख़ा ने) चीर दिया / फाड़ दिया।
  • قَمِيصَهُ: उनका (यूसुफ़ का) कुर्ता।
  • مِن دُبُرٍ: पीछे की ओर से।
  • أَلْفَيَا: दोनों ने पाया।
  • سَيِّدَهَا: उसका (ज़ुलेख़ा का) पति (अज़ीज़ मिस्र)।
  • لَدَى الْبَابِ: दरवाज़े के पास।
  • سُوءًا: बुराई, अर्थात् व्यभिचार।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ: दर्दनाक यातना (कोड़ों की सज़ा)।

विस्तृत व्याख्या:

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने महसूस किया कि अज़ीज़ की पत्नी उन्हें बुरे काम के लिए उकसा रही है और उन्होंने उसका न्योता ठुकरा दिया, तो वे तुरंत उस कमरे से बाहर निकलने के लिए दरवाज़े की ओर भागे। वह महिला भी उनके पीछे दौड़ी ताकि उन्हें रोक सके। जब वह उन तक न पहुँच सकी, तो उसने उनके कुर्ते को पीछे से पकड़कर ज़ोर से खींचा, जिससे कुर्ता पीछे की ओर से फट गया। इसी हालत में दोनों दरवाज़े के पास पहुँचे और वहाँ उन्हें अज़ीज़ (उस महिला का पति) खड़ा मिला।

यह देखकर उस महिला ने अपनी बेगुनाही जताने और यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बदनाम करने के लिए पलटकर कहा: "जो कोई तुम्हारी पत्नी के साथ बुराई का इरादा करे, उसकी सज़ा इसके अलावा क्या हो सकती है कि उसे क़ैद कर दिया जाए या उसे दर्दनाक यातना दी जाए?" उसने पहले तो कहा कि उसे मार डाला जाए, लेकिन फिर डरते हुए सज़ा को क़ैद या कोड़ों की मार तक सीमित कर दिया, ताकि यूसुफ़ को सज़ा दिलवा सके और अपने पति को यक़ीन दिला सके कि वह बेगुनाह है।

यहाँ उस महिला ने उल्टी बात को सच साबित करने की कोशिश की, जबकि असलियत यह थी कि वह खुद यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बुराई की ओर बुला रही थी। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उसके बहकावे से बचने के लिए भागने की कोशिश की, और यही उनकी पाकदामनी और ईमानदारी का सबूत था।


फ़ायदे और सबक़:

  1. पाकदामनी की अहमियत: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की यह हरकत हमें सिखाती है कि गुनाह के मौके पर भी इंसान को अल्लाह का डर और अपनी इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करनी चाहिए। भागकर भी उन्होंने गुनाह से बचने की कोशिश की, जो हमारे लिए बेहतरीन नमूना है।
  2. झूठ और फरेब की हक़ीक़त: यह घटना बताती है कि झूठ और बदनामी करने वाले लोग कितनी चालाकी से सच को छिपाते हैं, लेकिन अल्लाह सब कुछ जानता है और सच को कभी छिपा नहीं रहने देता। जल्द या बाद में सच सामने आ जाता है।
  3. मुसीबत में सब्र: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को झूठे इल्ज़ाम और क़ैद की सज़ा सहनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सब्र किया। यह हमें सिखाता है कि मुसीबतों में सब्र करने वालों के लिए अल्लाह की तरफ़ से बेहतरीन इनाम होता है।
  4. अल्लाह की मदद: जब इंसान अल्लाह की ख़ातिर गुनाह से बचता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे बड़ी बुराई से बचाता है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को बाद में अल्लाह ने बड़ा मर्तबा दिया, जो इसी पाकदामनी का नतीजा था।
  5. बुराई की शुरुआत से बचाव: यह घटना बताती है कि बुराई के रास्ते पर पहला क़दम नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि एक गलती इंसान को कई मुसीबतों में डाल सकती है। यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने पहले ही क़दम पर इनकार कर दिया, इसलिए वे बच गए।
🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — यूसुफ

23وَرَاوَدَتْهُ الَّتِي هُوَ فِي بَيْتِهَا عَن نَّفْسِهِ وَغَلَّقَتِ الْأَبْوَابَ وَقَالَتْ هَيْتَ لَكَ ۚ قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ رَبِّي أَحْسَنَ مَثْوَايَ ۖ إِنَّهُ لَا يُفْلِحُ الظَّالِمُونَ
और जिस औरत ज़ुलेखा के घर में यूसुफ रहते थे उसने अपने (नाजायज़) मतलब हासिल करने के लिए ख़ुद उनसे आरज़ू की और सब दरवाज़े बन्द कर दिए और (बे ताना) कहने लगी लो आओ यूसुफ ने कहा माज़अल्लाह वह (तुम्हारे मियाँ) मेरा मालिक हैं उन्होंने मुझे अच्छी तरह रखा है मै ऐसा ज़ुल्म क्यों कर सकता हूँ बेशक ऐसा ज़ुल्म करने वाले फलाह नहीं पाते
24وَلَقَدْ هَمَّتْ بِهِ ۖ وَهَمَّ بِهَا لَوْلَا أَن رَّأَىٰ بُرْهَانَ رَبِّهِ ۚ كَذَٰلِكَ لِنَصْرِفَ عَنْهُ السُّوءَ وَالْفَحْشَاءَ ۚ إِنَّهُ مِنْ عِبَادِنَا الْمُخْلَصِينَ
ज़ुलेखा ने तो उनके साथ (बुरा) इरादा कर ही लिया था और अगर ये भी अपने परवरदिगार की दलीन न देख चुके होते तो क़स्द कर बैठते (हमने उसको यूँ बचाया) ताकि हम उससे बुराई और बदकारी को दूर रखे बेशक वह हमारे ख़ालिस बन्दों में से था
25وَاسْتَبَقَا الْبَابَ وَقَدَّتْ قَمِيصَهُ مِن دُبُرٍ وَأَلْفَيَا سَيِّدَهَا لَدَى الْبَابِ ۚ قَالَتْ مَا جَزَاءُ مَنْ أَرَادَ بِأَهْلِكَ سُوءًا إِلَّا أَن يُسْجَنَ أَوْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और दोनों दरवाजे क़ी तरफ झपट पड़े और ज़ुलेख़ा (ने पीछे से उनका कुर्ता पकड़ कर खीचा और) फाड़ डाला और दोनों ने ज़ुलेखा के ख़ाविन्द को दरवाज़े के पास खड़ा पाया ज़ुलेख़ा झट (अपने शौहर से) कहने लगी कि जो तुम्हारी बीबी के साथ बदकारी का इरादा करे उसकी सज़ा इसके सिवा और कुछ नहीं कि या तो कैद कर दिया जाए
26قَالَ هِيَ رَاوَدَتْنِي عَن نَّفْسِي ۚ وَشَهِدَ شَاهِدٌ مِّنْ أَهْلِهَا إِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن قُبُلٍ فَصَدَقَتْ وَهُوَ مِنَ الْكَاذِبِينَ
या दर्दनाक अज़ाब में मुब्तिला कर दिया जाए यूसुफ ने कहा उसने ख़ुद (मुझसे मेरी आरज़ू की थी और ज़ुलेख़ा) के कुन्बे वालों में से एक गवाही देने वाले (दूध पीते बच्चे) ने गवाही दी कि अगर उनका कुर्ता आगे से फटा हुआ हो तो ये सच्ची और वह झूठे
27وَإِن كَانَ قَمِيصُهُ قُدَّ مِن دُبُرٍ فَكَذَبَتْ وَهُوَ مِنَ الصَّادِقِينَ
और अगर उनका कुर्ता पींछे से फटा हुआ हो तो ये झूठी और वह सच्चे
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अनुवाद — यूसुफ 25

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Tuesday, August 18, 2026

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