Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَتَاعَهُمْ: अपना सामान, यानी अनाज के वे थैले जो उन्होंने मिस्र से लादे थे।
- بِضَاعَتَهُمْ: उनका माल, यानी वह राशि (चाँदी या सोना) जो उन्होंने अनाज के बदले में दी थी।
- رُدَّتْ إِلَيْهِمْ: उन्हें लौटा दी गई।
- مَا نَبْغِي: हम और क्या चाहते हैं? (यानी हमें और क्या चाहिए?)
- نَمِيرُ: हम लाएँगे (खाद्यान्न), यानी अपने परिवार के लिए रसद लेकर आएँगे।
- كَيْلَ بَعِيرٍ: एक ऊँट का भार (अनाज की वह मात्रा जो एक ऊँट पर लादी जाती है)।
- يَسِيرٌ: आसान, सरल, थोड़ा।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाई मिस्र से अनाज लेकर वापस अपने वतन लौटे और उन्होंने अपने सामान के थैले खोले, तो उन्हें वह राशि वापस मिली जो उन्होंने अनाज की कीमत के रूप में दी थी। यह देखकर वे हैरान रह गए और उनके चेहरे खुशी से चमक उठे। उन्होंने तुरंत अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) से कहा: "पिता जी! अब हमें और क्या चाहिए? देखिए, हमारी पूँजी हमें वापस कर दी गई है। यह मिस्र के अज़ीज़ (यूसुफ़) की ओर से एक बड़ा सम्मान और एहसान है।"
उन्होंने अपने पिता को यक़ीन दिलाने के लिए कहा: "यदि आप हमारे साथ हमारे भाई बिन्यामीन को भेज दें, तो हम इस राशि से अपने परिवार के लिए और अधिक अनाज ला सकते हैं। हम अपने भाई की पूरी हिफ़ाज़त करेंगे, और उसके साथ जाने से हमें एक ऊँट का अतिरिक्त भार (अनाज) भी मिलेगा, क्योंकि अज़ीज़ हर व्यक्ति को एक ऊँट के बराबर अनाज देता है। यह अतिरिक्त भार उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं, बल्कि उसके लिए बहुत आसान है।"
इस प्रकार उन्होंने अपने पिता को राज़ी करने की कोशिश की, ताकि वे बिन्यामीन को उनके साथ मिस्र भेजने की इजाज़त दे दें। उनकी बात में न केवल आर्थिक लाभ का ज़िक्र था, बल्कि भाई की हिफ़ाज़त का वादा भी था, ताकि पिता का भरोसा जीता जा सके।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की रहमत और एहसान की पहचान: जब इंसान को कोई अनपेक्षित भलाई मिले, तो उसे अल्लाह का करम समझना चाहिए और उसका शुक्र अदा करना चाहिए। यूसुफ़ के भाइयों को राशि वापस मिलना अल्लाह की मेहरबानी थी।
- परिवार के प्रति ज़िम्मेदारी: भाइयों ने अपने परिवार के लिए रसद लाने की फ़िक्र की। यह सिखाता है कि मुसलमान को अपने परिवार की ज़रूरतों का ख़याल रखना चाहिए और उनके लिए कमाई और कोशिश करनी चाहिए।
- वादे की पूर्ति और अमानतदारी: भाइयों ने अपने पिता से वादा किया कि वे बिन्यामीन की हिफ़ाज़त करेंगे। यह सिखाता है कि वादा निभाना और अमानत में ख़यानत न करना ईमान का हिस्सा है।
- अच्छे इरादे और सच्चाई: भाइयों की बात में सच्चाई और अच्छे इरादे थे, इसलिए उनके पिता ने आगे चलकर उन पर भरोसा किया। सच्चाई और नेक नीयत से इंसान के रिश्ते मज़बूत होते हैं।
- मुसीबत में उम्मीद: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। जब रास्ते बंद लगें, तो अल्लाह नए रास्ते खोल देता है, जैसे उसने यूसुफ़ के भाइयों के लिए राशि वापसी का रास्ता खोला।
📜 आयत 63-67 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 65
सूरा यूसुफ आयत 65 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उन लोगों ने अपने अपने असबाब खोले तो…सूरा आयत 65/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 63–67. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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