यूसुफ · 78/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ إِنَّ لَهُ أَبًا شَيْخًا كَبِيرًا فَخُذْ أَحَدَنَا مَكَانَهُ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ ۝٧٨
Qaaloo yaaa ayyuhal `Azeezu inna lahooo aban shaikhan kabeeran fakhuz ahadanaa makaanahoo innaa naraaka minal muhsineen
📖 हिंदी अर्थ
और जो (उसके भाई की चोरी का हाल बयान करते हो ख़ुदा खूब बवाक़िफ है (इस पर) उन लोगों ने कहा ऐ अज़ीज़ उस (इब्ने यामीन) के वालिद बहुत बूढ़े (आदमी) हैं (और इसको बहुत चाहते हैं) तो आप उसके ऐवज़ (बदले) हम में से किसी को ले लीजिए और उसको छोड़ दीजिए
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الشَّيْخُ الكَبِيرُ: बहुत बूढ़ा, उम्रदराज़ बुज़ुर्ग।
  • فَخُذْ أَحَدَنَا مَكَانَهُ: उसके बदले हममें से किसी एक को ले लो (अपने पास रख लो)।
  • مِنَ الْمُحْسِنِينَ: भलाई करने वालों में से।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के भाइयों ने देखा कि बिन्यामीन (उनके छोटे भाई) के पास से प्याला निकला और उसे पकड़ लिया गया, तो वे बहुत चिंतित हुए। उन्होंने अपने पिता याक़ूब (अलैहिस्सलाम) से किए गए वादे को याद किया और यूसुफ़ से विनती करते हुए कहा: "ऐ अज़ीज़ (सम्मानित शासक)! इस लड़के का पिता बहुत बूढ़ा है और इससे अत्यधिक प्रेम करता है। उसके लिए इससे जुदाई सहन करना बहुत कठिन होगा। इसलिए आप इसके बदले हममें से किसी एक को ले लीजिए। हम देख रहे हैं कि आप हमारे साथ और दूसरों के साथ भलाई करने वालों में से हैं, इसलिए हम पर यह एहसान पूरा कीजिए और इसके बदले हममें से किसी को रोक लीजिए।"

उन्होंने यह प्रार्थना इसलिए की क्योंकि वे जानते थे कि यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने उनके साथ अच्छा व्यवहार किया है, उन्हें अनाज दिया है और उनकी मेहमाननवाज़ी की है। उन्होंने सोचा कि शायद यही बात यूसुफ़ को नरम कर दे और वह उनमें से किसी एक को बिन्यामीन के बदले रोक ले।

फ़ायदे (सबक):

  1. इस आयत से पता चलता है कि बुज़ुर्गों और माता-पिता का सम्मान करना और उनकी भावनाओं का ख्याल रखना कितना बड़ा गुण है। भाइयों ने अपने बूढ़े पिता की मोहब्बत और उनकी तकलीफ़ को ध्यान में रखकर ही यह विनती की।
  2. अच्छे व्यवहार और भलाई का असर दूसरों पर पड़ता है। भाइयों ने यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की भलाई देखी थी, इसलिए उन्होंने उनसे भलाई की उम्मीद की। यह सिखाता है कि हमें हमेशा दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि यही दूसरों के दिलों में हमारे लिए मोहब्बत और सम्मान पैदा करता है।
  3. मुसीबत के समय इंसान को अपने बुज़ुर्गों और कमज़ोर लोगों का ख्याल रखना चाहिए और उनकी परेशानी को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हम किसी से कोई बात कहें या कोई माँग करें, तो नर्मी और अदब के साथ करें, जैसे भाइयों ने "ऐ अज़ीज़" कहकर यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को संबोधित किया।
🎧 सुनें

📜 आयत 76-80 — यूसुफ

76فَبَدَأَ بِأَوْعِيَتِهِمْ قَبْلَ وِعَاءِ أَخِيهِ ثُمَّ اسْتَخْرَجَهَا مِن وِعَاءِ أَخِيهِ ۚ كَذَٰلِكَ كِدْنَا لِيُوسُفَ ۖ مَا كَانَ لِيَأْخُذَ أَخَاهُ فِي دِينِ الْمَلِكِ إِلَّا أَن يَشَاءَ اللَّهُ ۚ نَرْفَعُ دَرَجَاتٍ مَّن نَّشَاءُ ۗ وَفَوْقَ كُلِّ ذِي عِلْمٍ عَلِيمٌ
हम लोग तो (अपने यहाँ) ज़ालिमों (चोरों) को इसी तरह सज़ा दिया करते हैं ग़रज़ यूसुफ ने अपने भाई का थैला खोलने ने से क़ब्ल दूसरे भाइयों के थैलों से (तलाशी) शुरू की उसके बाद (आख़िर में) उस प्याले को यूसुफ ने अपने भाई के थैले से बरामद किया यूसुफ को भाई के रोकने की हमने यू तदबीर बताइ वरना (बादशाह मिस्र) के क़ानून के मुवाफिक़ अपने भाई को रोक नहीं सकते थे मगर हाँ जब ख़ुदा चाहे हम जिसे चाहते हैं उसके दर्जे बुलन्द कर देते हैं और (दुनिया में) हर साहबे इल्म से बढ़कर एक और आलिम है
77۞ قَالُوا إِن يَسْرِقْ فَقَدْ سَرَقَ أَخٌ لَّهُ مِن قَبْلُ ۚ فَأَسَرَّهَا يُوسُفُ فِي نَفْسِهِ وَلَمْ يُبْدِهَا لَهُمْ ۚ قَالَ أَنتُمْ شَرٌّ مَّكَانًا ۖ وَاللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا تَصِفُونَ
(ग़रज़) इब्ने यामीन रोक लिए गए तो ये लोग कहने लगे अगर उसने चोरी की तो (कौन ताज्जुब है) इसके पहले इसका भाई (यूसुफ) चोरी कर चुका है तो यूसुफ ने (उसका कुछ जवाब न दिया) उसको अपने दिल में पोशीदा (छुपाये) रखा और उन पर ज़ाहिर न होने दिया मगर ये कह दिया कि तुम लोग बड़े ख़ाना ख़राब (बुरे आदमी) हो
78قَالُوا يَا أَيُّهَا الْعَزِيزُ إِنَّ لَهُ أَبًا شَيْخًا كَبِيرًا فَخُذْ أَحَدَنَا مَكَانَهُ ۖ إِنَّا نَرَاكَ مِنَ الْمُحْسِنِينَ
और जो (उसके भाई की चोरी का हाल बयान करते हो ख़ुदा खूब बवाक़िफ है (इस पर) उन लोगों ने कहा ऐ अज़ीज़ उस (इब्ने यामीन) के वालिद बहुत बूढ़े (आदमी) हैं (और इसको बहुत चाहते हैं) तो आप उसके ऐवज़ (बदले) हम में से किसी को ले लीजिए और उसको छोड़ दीजिए
79قَالَ مَعَاذَ اللَّهِ أَن نَّأْخُذَ إِلَّا مَن وَجَدْنَا مَتَاعَنَا عِندَهُ إِنَّا إِذًا لَّظَالِمُونَ
क्योंकि हम आपको बहुत नेको कार बुर्जुग़ समझते हैं यूसुफ ने कहा माज़ अल्लाह (ये क्यों कर हो सकता है कि) हमने जिसकी पास अपनी चीज़ पाई है उसे छोड़कर दूसरे को पकड़ लें (अगर हम ऐसा करें) तो हम ज़रुर बड़े बेइन्साफ ठहरे
80فَلَمَّا اسْتَيْأَسُوا مِنْهُ خَلَصُوا نَجِيًّا ۖ قَالَ كَبِيرُهُمْ أَلَمْ تَعْلَمُوا أَنَّ أَبَاكُمْ قَدْ أَخَذَ عَلَيْكُم مَّوْثِقًا مِّنَ اللَّهِ وَمِن قَبْلُ مَا فَرَّطتُمْ فِي يُوسُفَ ۖ فَلَنْ أَبْرَحَ الْأَرْضَ حَتَّىٰ يَأْذَنَ لِي أَبِي أَوْ يَحْكُمَ اللَّهُ لِي ۖ وَهُوَ خَيْرُ الْحَاكِمِينَ
फिर जब यूसुफ की तरफ से मायूस हुए तो बाहम मशवरा करने के लिए अलग खड़े हुए तो जो शख़्श उन सब में बड़ा था (यहूदा) कहने लगा (भाइयों) क्या तुम को मालूम नहीं कि तुम्हार वालिद ने तुम लोगों से ख़ुदा का एहद करा लिया था और उससे तुम लोग यूसुफ के बारे में क्या कुछ ग़लती कर ही चुके हो तो (भाई) जब तक मेरे वालिद मुझे इजाज़त (न) दें या खुद ख़ुदा मुझे कोई हुक्म (न) दे मै उस सर ज़मीन से हरगिज़ न हटूंगा और ख़ुदा तो सब हुक्म देने वालो से कहीं बेहतर है
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अनुवाद — यूसुफ 78

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Tuesday, August 18, 2026

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